Monday, March 16, 2026
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24 लाख का सोना लेकर बंगाली कारीगर लापता

  • शहर सराफा बाजार से सोना लेकर भागने की घटनाएं जारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर सर्राफ बाजार से कारीगरों के सोना लेकर भागने की घटनाएं लगतार जारी हैं। शुक्रवार को ऐसे ही एक मामले को लेकर पीड़ित कारोबारी ने मेरठ बुलियन टेÑडर्स एसोसिएशन के महामंत्री विजय आनंद अग्रवाल की मदद से थाना देहलीगेट पर तहरीर दी है। सराफा बाजार से एक और कारीगर मजदूरी पर सोने के जेवर बनाने का काम करने वाले कारोबारी का करीब 300 ग्राम सोना लेकर फरार हो गया है। सोने की कीमत तकरीबन 23.50 लाख बताई जा रही है। पुलिस ने तहरीर मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है।

थाने में दी तहरीर में सराय लाल दास निवासी सुदीप भुईया ने बताया कि वह मजदूरी पर सराफा कारोबारियों के जेवरात तैयार करने का काम करते आ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कुछ कारीगर भी रखे हुए हैं। सुदीप ने बताया कि गत दो अक्टूबर को उन्होंने कारीगर प्रदीप बेरा पुत्र नंदलाल बेरा मूल निवासी पश्चिम बंगाल हाल पता नौरंग हलवाई वाली गली थाना कोतवाली को 300 ग्राम सोना गले का सेट तैयार करने के लिए दिया था।

तय हुआ कि 15 अक्टूबर को वह माल तैयार कर दे देगा। सुदीप का कहना है कि 13 अक्टूबर को जब वह अपने कारीगर के घर पहुंचे तो पता चला कि वह गायब है। कई दिन उसके मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास हुआ, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने बाजार के पदाधिकारियों को घटना की जानकारी दी। आसपास के लोगों ने बताया कि उन्होंने कारीगर को आखिरी बार 13 अक्टूबर की शाम करीब छह बजे देखा था। उसके बाद किसी ने उसे नहीं देखा।

सुदीप मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मिले और फिर देहलीगेट थाने आकर पुलिस को तहरीर दे दी। इंस्पेक्टर विनय कुमार का कहना है कि पुलिस को दो मोबाइल नंबर मिले हैं जो फिलहाल बंद आ रहे हैं। जल्द ही एक टीम को तैयार कर पश्चिम बंगाल भेजा जाएगा। यह कोई पहला मौका नहीं है जब कोई कारीगर सोना लेकर भागा है। सोना लेकर भागने की घटनाएं थमती नजर नहीं आ रही है।

पहल: बेटियां रहे बेखौफ और खौफ में रहे शोहदे

मेरठ: घर से निकलने के बाद महिलाएं खुद को सुरक्षित समझें, इसके लिए एक बार फिर शहर में गुंडादमन दल सक्रिय होगा। इसके लिए पुलिस ने काम शुरू कर दिया है। त्योहारी सीजन में भी छेड़खानी की घटनाएं रोकने के लिए गुंडादमन भीड़ वाले बाजारों तथा खासतौर से वहां जहां मेले लगते हैं। लोग बड़ी संख्या में परिवार के साथ मेलों में आते हैं। ऐसे तमाम बाजारों में गुंडदमन दल को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पुलिस का गुंडादमन दल कोई नया कॉसेप्ट नहीं है।

पूर्व में पुलिस के इस दस्ते ने प्रभावी काम भी किया है। उसके सकारात्मक परिणाम भी समाने आए थे और छेड़खानी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश भी लगाया जा सकता था। गुंडादमन दल में पुलिस महकमे की सुंदर नजर आने वाले महिला पुलिस कर्मियों को सादावर्दी में बाजारों में उतारा जाता है। उनके आसपास सादीवार्दी में हट्टे कट्टे पुलिस कर्मियों को सादावर्दी में उतारा जाता है। ये महिला पुलिस कर्मी बाजारों में दो-दो की टोली या फिर अकेली भी घूमती हैं। इन्हें देखकर यदि कोई शोहदा छेड़खानी का प्रयास करता है तो इनके साथ सादावर्दी में चल रहे पुलिस वाले उसको दबोच लेते हैं।

पहले बाजार में और फिर समीप की चौकी या थाने में ले जाकर उसकी खबर ली जाती है। केवल खबर ही नहीं ली जाती बल्कि आरोपी शोहदे के परिवार वालोंं को भी पुलिस बुलाती है और बताते हैं कि उनके परिवार का सदस्य सड़क पर किस प्रकार की हरकत कर रहा है। पूर्व में मेरठ पुलिस का यह प्रयोग काफी सफल भी रहा था। गुंडादमन दल केवल बाजारों में ही नहीं बल्कि स्कूल कालेजों के पास भी जहां आमतौर पर शोहदे नजर आत हैं, वहां भी काम करता है। एसएसपी डा. विपिन ताडा ने बताया कि इस पर जल्दी ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

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