- लोगों ने अपर नगरायुक्त के आफिस पर किया हंगामा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम में जमीन में नाम दर्ज कराने को लेकर बड़ा खेल चलता है। यह खेल क्लर्क के स्तर से कर दिया जाता है। एक-दो नहीं, बल्कि कई मामले सामने आये हैं। इसी तरह का एक मामला लिसाडी गेट क्षेत्र का सामने आया है, जिसको लेकर शुक्रवार को नगर निगम में पहुंची एक फैमिली ने क्लर्क पर गंभीर आरोप लगाये तथा पूरे मामले की नगरायुक्त मनीष बंसल से जांच कराने की मांग की।
यह मामला है लिसाड़ी रोड रशीदनगर का। शादाब पुत्र इफ्तखारुद्दीन की 609 वर्ग गज जमीन है। शादाब अपने पिता का इकलौता पुत्र है तथा शाबिया, रोकाना तीन बहन भाई है। इसमें इफ्ताखारुद्दीन ने ही बैनामा अपने पुत्र शादाब के नाम कर रखा था। इसके अनुसार जमीन व मकान शादाब के नाम नगर निगम में दर्ज करा देना चाहिए था, लेकिन नगर निगम ने इसमें खेल कर दिया।
आरोप है कि निगम क्लर्क राणा ने शाबिया व रोमाना का नाम नगर निगम के दस्तावेजों में दर्ज करने की प्रक्रिया कर दी, जिस पर शादाब ने अपर नगरायुक्त श्रद्धा शाडिलियायान के सामने पेश होकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। शादाब व उनकी पत्नी निलोफर ने आरोप लगाया कि नगर निगम के क्लर्क राणा इसमें दूसरे पक्ष से मिलकर खेल कर रहे हैं। यह करोड़ों की जमीन है, जिसमें नाम दर्ज कराने के लिए निगम अधिकारी व क्लर्क भी खेल कर रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग शादाब व उसकी पत्नी ने मांग की है। शादाब की पत्नी निलोफर का आरोप है कि पिछले कुछ समय से नगर निगम के क्लर्क राणा उनसे चक्कर कटवाते रहे तथा दूसरे पक्ष से साज खा ली और पूरे मामले में एक तरफा कार्रवाई की जा रही है।
जब इसमें ही बैनामा है तो दूसरे का नाम निगम कैसे दर्ज कर सकती है? इस पूरे प्रकरण को लेकर नगरायुक्त के सामने रखा जाएगा तथा प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जाएगी। यदि यहां से भी उन्हें न्याय नहीं मिला तो वो हाईकोर्ट की शरण में जाएंगी। क्योंकि दूसरे पक्ष ने कुछ फर्जी दस्तावेज बनवा लिये हैं, जिनकी जांच कराने की भी मांग की जाएगी। इस पूरे प्रकरण के पीछे एक कर्नल की भूमिका भी बतायी है, जिसके चलते कर्नल की भी हाईकोर्ट में पार्टी बनाया जाएगा, ताकि इस मामले में उन्हें न्याय मिल सकेगा।
निगम में ही हो गई थी भिड़ंत
करोड़ों की इस जमीन के मामले में दोनों पक्ष नगर निगम स्थित अपर नगरायुक्त श्रद्धा शाडिलियायन के आॅफिस में ही भिड़ गए थे। दोनों पक्षों को अपर नगरायुक्त ने अपने आॅफिस में दस्तावेज पेश करने के लिए बुलाया था। दोनों पक्ष दोपहर में अपर नगरायुक्त के आॅफिस में पहुंचे, जहां पर दस्तावेजों को लेकर दोनों पक्षों के बीच भिड़ंत हो गई। मौके पर मौजूद निगम कर्मियों ने ही किसी तरह से मामले को संभाला, तब जाकर दोनों पक्षों को अपर नगरायुक्त के आॅफिस से बाहर निकाला। इसके बाद ही मामला शांत हुआ तथा दोनों पक्ष चले गए।

