- छोटी छोटी-गलियों में बनाये जा रहे अवैध गैस सिलेंडर
- खुलेआम बिना मानकों के तैयार हो रहे सिलेंडर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर में गैस सिलेंडरों का अवैध कारोबार बड़े स्तर पर चल रहा है, लेकिन शासन प्रशासन इस ओर आंखे मूंदे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को शायद उस दिन का इंतजार है। जब कोई बड़ी घटना इन सिलेंडरों की वजह से होगी। शहर के बहुल इलाके में छोटी-छोटी गलियों में बिना मानकों के आधार पर छोटे गैस सिलेंडर बनाये जा रहे हैं और पूरे शहर में इन सिलेंडरों की सप्लाई की जा रही है, लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं है। जबकि कई बार शहर में हादसे तक हो चुके हैं, लेकिन संबंधित विभागीय अधिकारी सब भुला चुके हैं।
शहर में अवैध रूप से गैस सिलेंडर बनाने का कारोबार फलफूल रहा है। लिसाड़ी गेट, कोतवाली क्षेत्र में तो मानों हर गली में गैस सिलेंडर बनाने का कार्य चल रहा है। यहां कई क्षेत्रों में अवैध रूप से पांच किलो वाले गैस सिलेंडर बनाये जा रहे हैं और कोई इन पर लगाम लगाने को तैयार नहीं है। कई बार छोटे गैस सिलेंडरों की वजह से यहां हादसे तक भी हो चुके हैं, लेकिन अभी तक इनका बनना बंद नहीं हो पाया है।
कई जगहों पर बिना मानकों के इनका निर्माण किया जा रहा है। लोगों के पास ऐसा कोई लाइसेंस नहीं है। जिसमें उन्हें सिलेंडर बनाने की स्वीकृति हो, लेकिन न तो जिला प्रशासन, न ही जिलापूर्ति विभाग और न ही शहर की पुलिस इनके खिलाफ कोई कार्रवाई करती है। बल्कि पुलिस वालों ने इसे वसूली का अड्डा बना लिया है। महज कुछ रुपये के बदले पुलिस सैकड़ों हजारों लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही है।
आशियाना कालोनी में खुलेआम चल रहा कारोबार
शहर के लिसाड़ी गेट क्षेत्र की आशियाना कालोनी समेत कई कालोनियों में अवैध रूप से गैस सिलेंडर बनाये जाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। यहां काफी संख्या में छोटे हाथियों में भरकर छोटे गैस सिलेंडर शहर के अन्य क्षेत्रों में भी सप्लाई हो रहे हैं यही नहीं बल्कि शहर के बाहर भी इन सिलेंडरों की सप्लाई हो रही है। इनकी न तो किसी के द्वारा जांच कराई जाती है और न ही इन पर कोई मुहर लगी है।
जिससे इसकी गुणवत्ता को परखा जा सके। शहर में कई जगहों पर इस प्रकार से ही अवैध रूप से गैस सिलेंडर बनाये जा रहे हैं, लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। और तो और अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई कार्रवाई तक नहीं की जाती जबकि कई बार इस तरह की शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचती रही हैं। अधिकारियों को शायन किसी बड़े हादसे का इंतजार है जिसके बाद अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटेगी और उसके बाद अभियान चलेगा।

