- एसओसी चकबंदी हो गए डीएम से बडे, नहीं मान रहे आदेश
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नियम 109 में सीओ चकबंदी राकेश कुमार के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, फिर भी उन्हें सीओ चकबंदी पद के चार्ज से नहीं हटाया गया। इस मामले में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं, जिनकी जांच पड़ताल चल रही है।
इसका संज्ञान डीएम के आदेश के बाद एडीएम (प्रशासन) ने भी लिया था, मगर इसके बावजूद उन्हें नहीं हटाया गया। यदि किसी के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच चल रही है तो फिर उन्हें नियम 109 की सुनवाई का अधिकार नहीं दिया जा सकता। इसके बाद भी सीओ चकबंदी राकेश कुमार से नियम 109 का कार्य नहीं लिया गया है।
यही नहीं, डीएम को भी इस पत्र का संज्ञान नहीं कराया गया कि इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही है। एडीएम ने भी इन्हें हटाने के लिए लिखा गया था। उन्हें हटाकर किसी अन्य सीओ चकबंदी को नियम 109 का कार्य देने के लिए एडीएम ने पत्र लिखा था, मगर इसके बाद भी इनसे नियम-109 की जिम्मेदारी नहीं हटाई गई।
यही नहीं, मांगने के बाद भी डीएम को इसका प्रस्ताव भी नहीं भेजा गया। चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश की तरफ से एक पत्र जारी किया गया है, जिसमें कहा गया था कि मेरठ में चार सीओ चकबंदी तैनात है, जिनको आपस में बराबर कार्यक्षेत्र का बटवारा किया जाए, मगर शासनादेश के बाद भी चारों सीओ को बराबर काम का बटवारा नहीं किया गया, जिसको लेकर सीओ चकबंदी आॅफिस में विवाद बना रहता है।
इसका प्रस्ताव भी शासन ने मांगा था। यह पत्र उप संचालक चकबंदी एसके सिंह ने भेजा था। इस आदेश का भी पालन चकबंदी आॅफिस के एसओसी ने नहीं किया। इसको लेकर एसओसी पर भी अंगूली उठ रही है, लेकिन इसमें एसओसी चुप्पी साध हुए हैं। उनकी भूमिका को लेकर विभाग में अंसतोष की स्थिति पैदा हो गई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस अधिकारी की विभागीय जांच चल रही है, उसको जिम्मेदारी का पद क्यों सौंपा गया है? ये बड़ा सवाल है। यही नहीं, लंबे समय से एक ही स्थान पर उनकी तैनाती भी चल रही है।
एसओसी नहीं रहते जिला मुख्यालय
एसओसी राकेश कुमार जिले का चकबंदी विभाग का सबसे बड़ा पद है, लेकिन ये जिला मुख्यालय पर नहीं रुकते। सप्ताह में दो दिन ही मेरठ में रुकते है, बाकी दिनों में शाहजंहापुर चले जाते हैं। यहां इनका आवास होना बताया गया है।

