जनवाणी ब्यूरो |
बलरामपुर/पचपेड़वा: गोपाष्टमी के अवसर पर भाजपा नेता वा वरिष्ठ समाजसेवी रामसरन गुप्ता ने अपने हाता पर गौ माता को गुड़ खिलाकर गौरक्षा का सङ्कल्प लिया। गौ प्रेमी रामसरन ने कहा कि उनकी हृदय में गौ सेवा है जो आजीवन रहेगा, उन्होंने कहा कि गौहत्या का कड़ा विरोध करना चाहिए। किसान गाय, बछड़ा, बैल आदि को बेचें नहीं। दूध न देने वाली गाय अथवा बूढ़ा बैल जितना घास (चारा) खाते हैं, उतना गोबर और गोमूत्र के द्वारा अपना व्यय निकाल देते हैं। हर व्यक्ति को केवल गाय के ही दूध-घी का उपयोग कर गौसेवा में कम-से-कम इतना योगदान तो अवश्य देना चाहिए।
हिन्दू संस्कृति में गाय का विशेष स्थान हैं. माँ का दर्जा दिया जाता हैं क्यूंकि जैसे एक माँ का ह्रदय कोमल होता हैं, वैसा ही गाय माता का होता हैं. जैसे एक माँ अपने बच्चो को हर स्थिती में सुख देती हैं, वैसे ही गाय भी मनुष्य जाति को लाभ प्रदान करती हैं. गाय का दूध, गाय का घी, दही, छांछ यहाँ तक की मूत्र भी मनुष्य जाति के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं. इसे कर्तव्य माना जाता हैं कि गाय की सुरक्षा एवम पालन किया जाये।
गोपाष्टमी हमें इसी बात का संकेत देती हैं कि पुरातन युग में जब स्वयं श्री कृष्ण ने गौ माता की सेवा की थी, तो हम तो कलयुगी मनुष्य हैं. यह त्यौहार हमें बताता हैं कि हम सभी अपने पालन के लिये गाय पर निर्भर करते हैं इसलिए वो हमारे लिए पूज्यनीय हैं. सभी जीव जंतु वातावरण को संतुलित रखने के लिए उत्तरदायी हैं, इस प्रकार सभी एक दुसरे के ऋणी हैं और यह उत्सव हमें इसी बात का संदेश देता हैं.

