जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई…ये कहावत बिजली विभाग पर सटीक बैठ रही है। जो एक की आंधी का बहाना लेकर पीवीवीएनएल ने एक माह के बाद भी विद्युत व्यवस्था को पटरी पर नहीं ला सका। सबसे शर्मनाक बात ये है कि प्रदेश के विद्युत राज्यमंत्री यहां के हैं और एमडी पावर भी यही बैठती है। मगर बिजली कटौती ने लोगों के जीवन में तनाव बढ़ा दिया है। बिजली न आने से जनरेटरों चलाने पर डीजल का खर्चा भी बढ़ चुका है। ये डीजल खर्च बिजली के बिल से भी ज्यादा है। सरकार के विद्युत विभाग ने मानसिक व आर्थिक तौर पर बिजली बिल गड़बड़ा दिया है। पूरे दिन और रात में बिजली आंख मिचौली चलती रहती है।
मानसून की पहली बारिश ने नगर निगम और विद्युत विभाग के दावों की पोल खोल दी। रात से शुरू हुई बारिश सुबह तक जमकर हुई। जिसके चलते कई जगह जलभराव हो गया। रात तीन बजे से विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। रुड़की रोड पर आपूर्ति न आने से लोग पेयजल तक के लिए परेशान हो गए। अंसल कोर्टयार्ड कॉलोनी निवासी अजीत कुमार ने बताया कि रुड़की रोड पर 16 घंटे से अधिक बिजली नहीं आई, जिस कारण एक लाख से अधिक लोग पानी और बिजली को तरस गए। बताया कि बिजली नहीं आने के कारण बारिश का पानी कॉलोनी से बाहर नहीं निकाला जा सका। बिजली नहीं होने के कारण एसटीपी प्लांट भी नहीं चला, जिसके कारण बारिश का पानी कॉलोनी में घुटनों से ऊपर तक भर गया, साथ ही लिफ्ट भी बंद हो गई। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, बीमार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसकी शिकायत बिजली विभाग से की गई। आरोप है कि विभाग के अधिकारियों ने 15 से 30 मिनट में बिजली आने की बात कही। लेकिन , इसके बाद फोन ही उठाना बंद कर दिया। कई घंटों तक बिजली नहीं आई तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और लोग एकत्रित होकर अन्य कॉलोनी के लोगों के साथ बिजली घर पहुंचे और हंगामा किया। उन्होंने अधिकारियों के फोन नहीं उठाने का कारण पूछा, लेकिन वहां कोई बड़ा अधिकारी नहीं था। लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की। लोगों ने ऊर्जा मंत्री सोमेंद्र तोमर, विद्युत निगम की एमडी ईशा दुहन से लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
बताया कि ऊर्जा मंत्री से अंसल कोर्टयार्ड के फीडर को शहरी लाइन से जोड़ने की मांग की जाएगी। इस दौरान अजय त्यागी, सुभाष त्यागी, डॉ. विक्रांत राणा, लोकेन्द्र चौधरी, जितेंद्र शर्मा, पवन सरोहा, अभी चौधरी, वीके राय, सुधीर मलिक, योगराज सिंह, रोहित नागराज, नवीन, शमशेर मलिक, नीरज गुप्ता, शिव प्रकाश त्यागी, संजय मिश्रा, सेवाराम, संगीता, बीना राणा, रीना चौधरी, सुनीता मलिक, अर्चना, बेबी, रजनी, सीमा मलिक आदि मौजूद रहे। उधर, कंकरखेड़ा में भी रात में हुई तेज बारिश के चलते 10 घंटे आपूर्ति बाधित रही। इससे लोगों में हाहाकार मच गया, पानी की आपूर्ति भी नहीं होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी, बिजली घर पर स्थानीय लोगों का गुस्सा भी झेलना पड़ा, हालांकि शाम के समय बिजली आपूर्ति हो सकी। एसडीओ कंकरखेड़ा के अनुसार लगभग 10 घंटे आपूर्ति बाधित रही, हाइटेंशन लाइन में फाल्ट होने के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी, लेकिन बाद में शाम के समय आपूर्ति सुचारू कर दी गई। वहीं, दूसरी ओर गंगानगर क्षेत्र में बारिश से बिजली आपूर्ति बाधित रही और कई घंटों बाद पूर्णरूप से सुचारु हो सकी।
बरसात ने खोल दी पीवीवीएनएल की पोल
मेरठ (जनवाणी): एक दिन की बरसात ने विद्युत व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। सोफीपुर उपकेंद्र में पानी भरने के कारण 17 घंटे तक आपूर्ति बाधित रही। इस दौरान करीब 50 हजार की आबादी पीने के पानी तक को तरस गई। सोमवार को मौसम साफ होने पर विद्युत आपूर्ति सुचारू होने के बाद परेशानी से निजात मिली। बिजली विभाग उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के दावे जरूर करता है, लेकिन इन दावों की पाले एक दिन की बरसात ने खोल दी।
रविवार देर शाम बरसात शुरू होते ही कई विद्युत उपकेंद्रों में फाल्ट हो गए। इस वजह से विद्युत व्यवस्था चरमरा गई। बिजली व्यवस्था के बेपटरी होने के बाद बिजली घरों पर मौजूद स्टाफ ने फोन उठाना तक बंद कर दिया। आपूर्ति कब शुरू होगी यह जानने के लिए लोग उपकेंद्रों पर लगातार फोन करते रहे, लेकिन दूसरी ओर से कोई जवाब नहीं मिल सका। यह हालात सोमवार दोपहर तक बने रहे। गनीमत ये रही कि सोमवार को बरसात नहीं हुई जिसके बाद विद्युत व्यवस्था में सुधार हुआ। वहीं, गौर करने वाली बात यह है कि विद्युत विभाग ने बरसात के मौसम में बिजली व्यवस्था को बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाए है और जो दावे किए गए थे। उन पर अमल क्यों नहीं हो रहा है।

