Tuesday, March 24, 2026
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अधूरी तैयारियों के बीच चल रही बर्न यूनिट

  • आक्सीजन पाइप भी नहीं, 10 मई 2022 को सीएम योगी ने मेडिकल में किया था बर्न यूनिट का लोकार्पण
  • परमानेंट स्टॉफ और आक्सीजन लाइन तक की कमी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाओं में इजाफा हो जाता है, इन हादसों के शिकार हुए लोगों का एकमात्र सहारा मेडिकल कॉलेज है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में बनी बर्न युनिट अधूरे इंतजामों के बीच चल रही है। पिछले साल ही हापुड़ में हुए दर्दनाक हादसे के सभी मरीजों को मेरठ मेडिकल की इमरजेंसी में भर्ती किया गया था।

हालांकि उस समय मेडिकल में बर्न युनिट बनकर तैयार हो चुकी थी, लेकिन वह चालू हालत में नहीं थी। अब एक साल बाद बर्न यूनिट शुरू तो हो गई है, लेकिन आधी-अधूरी तैयारियों के बीच। ऐसे में गंभीर हादसा होने पर यहां उसके शिकार लोगो को भर्ती कराने पर क्या वह सभी सुविधाएं मिल सकेगी जो जरूरी है, यह बड़ा सवाल है?

क्या कमियां है बर्न यूनिट में

बीते वर्ष 10 मई को सीएम योगी ने मेरठ मेडिकल कॉलेज की बर्न युनिट का लोकार्पण किया था। लेकिन महिनों बीत जाने के बाद भी यह शुरू नहीं हो सकी थी। अब किसी तरह यह चालू हुई तो इसमें वह सभी सुविधाएं नदारत है जो किसी भी जले हुए इंसान के इलाज के लिए जरूरी होती है। यहां न तो परमानेंट स्टाफ रखा गया है, न ही इस युनिट में आॅक्सीजन पाइपलाइन लगी है जिससे गंभीर मरीजों को बैड पर आॅक्सीजन दी जा सके, हां इतना जरूर है कि ऐसे में आॅक्सीन सिलेंडर का प्रयोग किया जा सकता है।

लगभग तीन करोड़ की लागत से बनी है बर्न यूनिट

मेडिकल में तैयार हुई बर्न युनिट की लागत 292 लाख 98 हजार है जो यहां लगे शिलापट पर दर्ज है। लेकिन करीब तीन करोड़ रूपये खर्च होने के बाद भी यहां सुविधाओं का आभाव क्यों है यह बड़ा सवाल है। युनिट में कुल 26 बैड है इनमें से 6 बैड आईसीयू व 20 नार्मल बैड है।

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लेकिन यहां आॅक्सीजन पाइपलाइन नहीं लगी है, जबकि बर्न केसों में आॅक्सीजन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। बताया जा रहा है आॅक्सीजन के लिए फिलहाल सिलेंडरों का प्रयोग किया जाएगा।

केवल तीन नर्सिंग स्टॉफ की है तैनाती

26 बैड की क्षमता वाली बर्न युनिट में इस समय केवल तीन लोगो का नर्सिंग स्टॉफ तैनात है। इनमें एक सिस्टर इंचार्ज, एक वार्ड ब्वॉय व एक सफाई कर्मी शामिल है। जबकि यहां कम से कम 20 नर्सिंग स्टॉफ, 50 वार्ड ब्वॉय व इतने ही सफाइकर्मियों की जरूरत है।

पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश के मरीज आते है मेडिकल में

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कहीं भी कोई बड़ा अग्निकांड हो जाए तो सरकारी अस्पताल के नाम पर केवल मेरठ मेडिकल कॉलेज में ही जले हुए लोगों के इलाज की सुविधा है। यहां तक की जिला अस्पताल में भी कोई बर्न युनिट नहीं है। ऐसे में शमली, सहारनपुर, बागपत, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, हापुड़, अमरोहा व मेरठ जैसे बड़े शहर के जले हुए मरीजों को मेडिकल कॉलेज का ही सहारा है।

पिछले साल हापुड़ में दर्दनाक हादसा हुआ था जिसमें कई लोगों ने आग की चपेट में आकर अपनी जान गवां दी थी जबकि 13 मरीजों को मेडिकल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। लेकिन आज बर्न युनिट शुरू तो हो गई है मगर तैयारी अधूरी है।

बर्न युनिट शुरू हो गई है लेकिन इसमें केवल आॅक्सीजन पाइपलाइन नहीं है। ऐसे में यहां भर्ती होने वाले मरीजों को जरूरत पड़ने पर सिलेंडर से आॅक्सीजन दी जाएगी। -डा. भानू प्रताप, एचओडी बर्न व प्लास्टिक विभाग, मेडिकल।

26 बैडों के लिए कम से कम 120 नर्सिंग स्टॉफ की जरूरत होगी, जबकि डाक्टरों की शिफ्ट चलती है उसी के हिसाब से वह विजिट करते है। शासन से बर्न युनिट में परमानेंट स्टॉफ की मांग की गई है, जैसे ही वहां से नियुक्ति होगी स्टॉफ उपलब्ध हो जाएगा। अभी तो मौजूदा स्टाफ से ही काम चलाया जा रहा है। -डा. वीडी पांडेय, मीडिया कॉर्डिनेटर, मेडिकल।

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