Saturday, May 2, 2026
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…लेकिन हस्तिनापुर पुल की नैया कैसे होगी पार?

  • कमजोर पुलों के निरीक्षण के निर्देश के बावजूद मेरठ के अधिकारियों ने नहीं दिखाई तत्परता
  • गंगा नदी पर बने पुल का एस्टीमेट 22 करोड़ से 167 करोड़ पर पहुंचा, समस्या जस की तस

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गुजरात में पुल टूटने की घटना से चौकन्नी हुई प्रदेश सरकार ने पीडब्ल्यूडी के सभी चीफ इंजीनियर्स को पत्र भेजकर अपने अपने इलाके के सभी पुलों के तत्काल निरीक्षण के निर्देश दे दिए हैं। इन निर्देशों पर पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने अमल भी किया है,

लेकिन मेरठ के अधिकारी यदि थोड़ी और तत्परता दिखाते तो हस्तिनापुर के पुल का पेंडिंग पड़ा 167 करोड़ रुपये का बजट पारित हो सकता था। मामला गर्म है। गुजरात में घटना घट चुकी है और खुद मुख्यालय ने अधिकारियों को कमजोर पुलों की मॉनिटिरिंग के लिए कहा है। ऐसे में यदि पीडब्ल्यूडी के अधिकारी तत्परता से काम लें तो हस्तिनापुर के पुल की नैया पार लग सकती है।

दरअसल, हस्तिनापुर में गंगा नदी पर बने भीकुंड पुल का निर्माण कार्य 2008 में शुरू हुआ था। उस समय इसका एस्टीमेट लगभग 22 करोड़ रुपये (गाइड बंध रहित)था, जो शासन के पास एप्रूवल के लिए भेजा गया था। यह अमाउंट सेक्शन हो गया था जिसके बाद इस पर सेतू निगम ने काम शुरू कर दिया था। इसके बाद 2008 से 2015 तक धीमे-धीमे इस पुल का काम चला, लेकिन बीच में कई बैरियर भी आए।

सबसे बड़ा बैरियर वन विभाग का रहा। पीडब्ल्यूडी ने हांफते हांफते इन बैरियर्स को किसी तरह पार किया। हालांकि यदि वन विभाग अपनी मंशा पहले ही जता देता तो शायद इतने बैरियर बीच में आते ही नहीं। सूत्रों के अनुसार लोक निर्माण विभाग को साढ़े चार करोड़ रुपये वन विभाग को देने पड़े, कुछ पैसा वन विभाग को सेतू निगम ने भी अदा किया। तब कहीं जाकर काम को आगे बढ़ाने का ग्रीन सिग्नल मिला।

यहां एक औार बात जो काबिल ए गौर है वो यह कि जब हस्तिनापुर के पुल का शुरुआती एस्टीमेट 22 करोड़ भेजा गया था। तब इसमें गाइड बंध का पैसा शामिल नहीं था। यहां प्लानिंग का झोल साफ नजर आ रहा है। यदि शुरुआत में ही गाइड बंध का एस्टीमेट भी शासन को भेजे गए एस्टीमेट में जोड़ दिया जाता तो आज हस्तिनापुर का भीकुंड पुल वहां के लोगों की आंखों की किरकिरी न बनता।

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हालांकि पीडब्ल्यूडी के एक बड़े अधिकारी का यह भी कहना है कि गाइड बंध का बजट ज्यादा होने के चलते शासन भी इस प्रोजेक्ट में कम दिलचस्पी ले रहा था। पुल निर्माण में जब और बैरियर आने शुरू हुए तब पीडब्ल्यूडी ने 2016 में पुन: अपने एस्टीमेट को अपग्रेड किया और 120 करोड़ रुपयों का नया एस्टीमेट तैयार कर पुन: शासन को भेजा। अब इस एस्टीमेट में गाइड बंध का पैसा शामिल था।

शासन स्तर से यह 120 करोड़ का एप्रूवल भी सेक्शन हो गया। जब पैसा रिलीज होने की बात आई तो लगभग इसका आधा पैसा ही रिलीज हो पाया। इस पैसे से पुल और एप्रोच रोड का निर्माण हो गया। गाइड बंध फिर अधर में रह गए। पीडब्ल्यूडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब यह सब कुछ हो रहा था तब उस समय के चीफ इंजीनियर आईआईटी रुड़की द्वारा डिजाइन किए गए गाइड बंध पर ही जोर दे रहे थे।

बहरहाल शासन से भेजे गए पैसे से पुल और एप्रोच रोड तो बन गई, लेकिन अब गाइड बंध व अन्य कार्यों के लिए जब शासन से और पैसे की मांग की गई तो फिर नया एस्टीमेट तैयार हुआ और अब यह एस्टीमेट बढ़कर 120 करोड़ रुपए से 167 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

अब इस नए एस्टीमेट पर विजिलेंस जांच कुंडली मारे बैठा है। शासन का कहना है कि जब तक विजिलेंस जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक यह एमाउंट एप्रूव्ड नहीं होगा। यही कारण है कि हस्तिनापुर का भीकुंड पुल आज 12 साल बाद भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

पीडब्ल्यूडी एक्सईएन ने अप्रोच रोड के निर्माण पर ठेकेदारों की लगाई क्लास

पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन ने हस्तिनापुर गंगा पर अप्रोच रोड बनाने के मुद्दे पर ठेकेदार को बुलाया गया था। करीब एक घंटे तक ठेकेदार की क्लास चली, लेकिन ठेकेदार का कहना है कि सड़क का कटाव तो आपदा हैं, इसमें ठेकेदार की क्या गलती हैं? फिर से ठेकेदार से उसके ही खर्चे पर सड़क बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी के अधिकारी दबाव बना रहे हैं, लेकिन ऐसी हालत में ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिये हैं।

ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी के बीच अनुबंध था, जिसमें अप्रोच रोड बनाकर देनी थी, जिसे ठेकेदार दे चुका हैं। हैंडओवर भी कर चुका हैं। इसी बीच पानी के बहाव में अप्रोच रोड का कटाव हुआ, जिसके चलते बिजनौर और हस्तिनापुर के बीच का संपर्क भी टूट गया हैं। बीच में हादसा हो गया था, जिसमें नाव पलट गई थी। इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद भी पीडब्ल्यूडी के अधिकारी सबक नहीं ले रहे हैं। गाइड बंद नहीं किया जा रहा हैं। इसके लिए धनराशि शासन से नहीं मांगी जा रही हैं।

प्रांतीय खंड के 50 पुलों में 42 ठीक, आठ की होगी रिपेयरिंग

गुजरात में सस्पेंशन पुल टूटने के बाद सरकारी अमले में हड़कंप की स्थिति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल ही पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे अपने-अपने इलाकों में सभी पुलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजें। लोक निर्माण विभाग मेरठ के प्रांतीय खंड में इस समय 50 पुल हैं। सभी संबंधित अभियंताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में इन पुलों का निरीक्षण कर मंगलवार शाम रिपोर्ट अधिशासी अभियंता को सौंप दी।

अधिकतर पुल ठीक हालत में पाए गए हैं। इसके बाद सभी रिपोर्ट्स को कंपाइल कर अधिशासी अभियंता ने यह रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अधिशासी अभियंता एसके सारस्वत ने बताया कि प्रांतीय खंड में कुल 50 पुल हैं, इनमें से 42 पुल दुरुस्त हैं। जबकि 8 पुलों की रिपेयरिंग होनी है। अधिशासी अभियंता के अनुसार जो 42 पुल ठीक हैं उनमें से तीन पुल निर्माणाधीन भी हैं।

बाकी के 8 पुलों को रिपेयर होना है जिसके लिए एस्टीमेट तैयार किए जा रहे हैं। कुछ एस्टीमेट शासन को भेजे भी जा चुके हैं तथा बजट स्वीकृत होते ही इन पर काम तेजी से शुरू कर दिया जाएगा। अधिशासी अभियंता के अनुसार मेरठ में कोई सस्पेंशन वाला ब्रिज नहीं है और ना ही कोई पॉन्टून वाला पुल है।

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