- मानसिक कष्टों से मिलेगी मुक्ति, वैशाख पूर्णिमा लगेगा साल का प्रथम चंद्र ग्रहण, सूतक नहीं होंगे मान्य
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हिंदू धर्म में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। वैशाख महीने में पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। इसलिए इस पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। इस साल बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार 16 मई को मनाया जाएगा। बुद्ध पूर्णिमा का पर्व बौद्ध अनुयायियों के साथ-साथ हिंदुओं के लिए भी बहुत खास महत्व रखता है।
ज्योतिषाचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा 16 मई को है। यह स्रान-दान की पूर्णिमा भी रहेगी। सनातन धर्मावलंबी दान-पुण्य और भगवान विष्णु की पूजा करेंगे, वहीं बौद्ध विहारों में तथागत भगवान बुद्ध की वंदना की जाएगी। इस दिन की गई पूजा और खरीदारी शुभ और समृद्धिदायी रहेगी।
भारत में नजर नहीं आएगा चंद्रग्रहण, सूतक काल मान्य नहीं
16 मई को वैशाख पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्रग्रहण होगा, जो कि भारत में नहीं दिखेगा। हालांकि ये भी सिर्फ खगोलीय नजरिये से खास रहेगा। धार्मिक रूप से इसका महत्व नहीं होने से इसका अशुभ असर नहीं पड़ेगा। ये ही वजह है कि इसका सूतक काल भी देश में नहीं माना जाएगा और पूर्णिमा पर होने वाले धार्मिक काम करने में किसी भी तरह का दोष नहीं लगेगा।
जिससे स्रान-दान और पूजा-पाठ किए जा सकेंगे। ज्योतिष गणना के अनुसार साल का यह पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसके अलावा चंद्रग्रहण पर इस साल दो शुभ संयोग भी निर्मित हो रहे हैं। ज्योतिष के के मुताबिक इन दो शुभ योग के कारण मेष, सिंह और धनु राशियों पर इसका शुभ है।
कहां दिखेगा साल का पहला चंद्रग्रहण
साल का पहला चंद्रग्रहण दक्षिणी पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी-पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका में भी दिखाई देगा। भारत में यह चंद्रग्रहण नजर नहीं आएगा जिसके कारण देश में सूतक काल मान्य नहीं होगा।
बुद्ध को विष्णु भगवान का नौवां अवतार माना गया
वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों और पवित्र सरोवरों में स्रान के बाद दान-पुण्य करना पुण्यकारी होता है। भगवान बुद्ध का जन्म इसी दिन हुआ था। उन्हें हरि विष्णु का अंशावतार भी माना जाता है भगवान बुद्ध को विष्णु भगवान का नौवां अवतार माना जाता है।
वैशाख पूर्णिमा का महत्व
- वैशाखी पूर्णिमा के दिन हो सके तो पूजन के समय तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
- पितरों के निमित्त पवित्र नदियों में स्रान कर हाथ में तिल रखकर तर्पण करने से पितरों की तृप्त होते हैं एवं उनका आशीर्वाद मिलता है।
- पुराणों के अनुसार वैशाख का यह पक्ष पूजा-उपासना के लिए विशेष महत्वपूर्ण कहा गया है।
- वैशाखी पूर्णिमा के दिन पूजा के दौरान जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

