- कांवड़ यात्रा की व्यवस्था को लेकर की चर्चा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: छावनी परिषद की विशेष बोर्ड बैठक मात्र पांच मिनट में निपट गई। इस बैठक में केवल कांवड़ यात्रा को लेकर चर्चा की गई। हालांकि इस बैठक में कैंट बोर्ड के बर्खास्त सीईई अनुज सिंह के मामले में लोक अदालत में पैरवी करने के लिए विधिक राय लेने निर्णय लिया गया और इसके लिए कैंट बोर्ड के सीईओ जाकिर हुसैन को अधिकृत करने का निर्णय लिया गया। छावनी परिषद की शुक्रवार शाम आनन-फानन में विशेष बोर्ड बैठक बुलाई गई। बैठक में कैंट बोर्ड के अध्यक्ष ब्रिगेडियर निखिल देशपांडे, मुख्य अधिशासी अधिकारी जाकिर हुसैन और मनोनीत सदस्य डा. सतीश चंद शर्मा मौजूद रहे।
बैठक में सतीश शर्मा ने कांवड़ यात्रा शुरू होने से पूर्व सड़कों की मरम्मत करने, सफाई व्यवस्था का और स्ट्रीट लाइटों को ठीक कराने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सेंट जोजफ इंटर कालेज व चर्च के आगे की सड़क को बनवाने का आग्रह किया। कैंट बोर्ड के अधिशासी अभियंता पियूष गौतम ने बताया कि उक्त रोड एमईएस की है। अध्यक्ष ने आश्वस्त किया कि वह एमईएस के अधिकारियों से बात करके इस सड़क की मरम्मत करा देंगे। उन्होंने औघड़नाथ मंदिर वाली रोड को बनवाने को भी कहा। पीयूष गौतम ने कहा कि उक्त सड़क पर एमईएस की पाइप लाइन है, जो लीक हो रही है। जब तक लीकेज दूर नहीं होगी, सड़क बन नहीं पाएगी।
फिलहाल कैंट बोर्ड उक्त सड़क के गड्ढे भरवा रहा है। अध्यक्ष ने एमईएस के अधिकारियों से बात करके पाइप लाइन की लीकेज बंद कराकर सड़क की मरम्मत कराने के आदेश दिए। अध्यक्ष कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां जो फिटनेस की वजह से खड़ी है उसकी फिटनेस के बारे में जानकारी ली। कैंट बोर्ड के प्रवक्ता जय पाल तोमर ने बताया कि कैंट बोर्ड के बर्खास्त सीईई अनुज सिंह के मामले की विशेष लोक अदालत लखनऊ में पैरवी करने के लिए विधिक राय लेने का निर्णय लिया गया। इसके सीआईओ को अधिकृत करते हुए उक्त विषय में कानूनी राय लेकर आगे की कार्रवाई करने के लिए कहा गया।
सीईई की बर्खास्तगी का मामला लोक अदालत पहुंचा
कैंट बोर्ड के मुख्य अधिशासी अभियंता की बर्खास्तगी का मामला अब लोक अदालत पहुंच गया। इसको लेकर शुक्रवार को कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने मंधन किया और इस विषय में कानूनी राय लेकर आगे की कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए कैंट बोर्ड के सीईओ जाकिर हुसैन को अधिकृत किया गया। दरअसल, कैंट बोर्ड में अनुज सिंह सीईई के पद पर तैनात थे। वर्ष 2013 में तत्कालीन सीईओ डीएन यादव द्वारा उनपर सात मामलों में अनियमितता व भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मध्य कमान को जांच के लिए लिखा था।
वहां से लखनऊ की सीईओ शोभा गुप्ता को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। वर्षाें चली जांच में अनुज सिंह पर लगे आरोपों को सही पाया। वर्ष 2019 में अनुज सिंह को दोषी मानते हुए बर्खास्त कर दिया गया और उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई। इस निर्णय के खिलाफ अनुज सिंह ने लखनऊ में जीओसी के यहां अपील दायर की। जहां उनकी बर्खास्तगी को को रिटायरमेंट में बदलते हुए पेंशन सुविधा देने का निर्णय दिया गया। अनुज सिंह ने बर्खास्तगी के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने शोभा गुप्ता द्वारा की गई जांच पर सवाल खड़े किए और बर्खास्तगी को गलत बताया।
अनुज सिंह ने हाईकोर्ट में की अपील
कैंट बोर्ड के प्रवक्ता जयपाल तोमर ने बताया कि अनुज सिंह का केस सुप्रीम कोर्ट में गया था, लेकिन वहां से विशेष लोक अदालत लखनऊ में गया है। तीन जुलाई को लखनऊ की विशेष लोक अदालत में इस केस की पहली तारीख लगी थी, जिस पर बोर्ड से पैरवी नहीं की गई। अब छह जुलाई को अदम पैरवी में सुनवाई होने की उम्मीद है। इस मामले की पैरवी के लिए बोर्ड ने कानूनी राय लेने का निर्णय लिया। सीआईओ को अधिकृत करते हुए उक्त विषय में कानूनी राय लेकर आगे की कार्रवाई करने के लिए कहा गया।

