जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारत के प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
रावत ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के लगातार छद्म युद्ध और भारत के खिलाफ दुष्ट बयानबाजी के कारण भारत और पाकिस्तान के संबंध और भी खराब हो गए हैं। ये बातें उन्होंने नेशनल डिफेंस कॉलेज द्वारा आयोजित डायमंड जुबली वेबिनार, 2020 में कहीं।
जनरल रावत ने कहा कि चीन की जनमुक्ति सेना (पीएलए) लद्दाख में अपने दुस्साहस को लेकर भारतीय बलों की मजबूत प्रतिक्रिया के कारण अप्रत्याशित परिणाम का सामना कर रही है। रावत ने कहा, ‘हमारा रुख स्पष्ट है कि हम वास्तविक नियंत्रण रेखा में कोई बदलाव स्वीकार नहीं करेंगे।’ उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
have now increasingly resorting to non-kinetic means by launching vicious anti-India rhetoric on social media & propagating false communal narrative to create social disharmony within India: Chief of Defence Staff (CDS) General Bipin Rawat. (2/2). https://t.co/06AnS4dJhJ
— ANI (@ANI) November 6, 2020
रावत ने कहा कि सीमा पर झड़पों और बिना उकसावे के सैन्य कारवाई के बड़े संघर्ष में तबदील होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में हाड़ जमा देने वाली ठंड में भारत के लगभग 50,000 सैनिक किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्वतीय ऊंचाइयों पर तैनात हैं।
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के लगातार छद्म युद्ध और भारत के खिलाफ दुष्ट बयानबाजी के कारण भारत और पाकिस्तान के संबंध और भी खराब हो गए हैं। पाकिस्तान ने सशस्त्र इस्लामी विद्रोह और आतंकवाद के केंद्र में रहना जारी रखा है।
तीन दशकों से, पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध कर रही है। पाकिस्तान भारत के अंदर सामाजिक असहमति पैदा करने के लिए झूठी सांप्रदायिकता का प्रचार कर रहा है।
सीडीएस रावत ने शुक्रवार को कहा, ‘आने वाले वर्षों में, हम देखेंगे कि हमारा रक्षा उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और समग्र रक्षा तैयारियों में योगदान दे रहा है।
इसके अलावा हमें अत्याधुनिक हथियार और उपकरण पूरी तरह से भारत में उपलब्ध करवा रहा है। जहां तक रक्षा सहयोग का सवाल है, हम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ आपसी विश्वास और साझेदारी बनाने में रक्षा कूटनीति का महत्व समझते हैं।’

