- निर्माण में कमीशन ने कर दिया शहर का बेड़ा गर्क
- नगर निगम के अधिकारियों को कमीशन से सरोकार
- शहर की दर्जनों पुलिया पर हो सकता है बड़ा हादसा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जब निर्माण में कमीशन का खेल होगा और ठेकेदार के लिए कमीशन देने की बंदिश कर दी जायेगी तो फिर निर्माण का बेड़ा गर्क होना तय है। कुछ ऐसे ही हालात से इन दिनों अपने शानदार शहर की पुलिया गुजर रही हैं। अफसरों और बाबुओं की जेबें गर्म करने के बाद जो थोड़ा बहुत पैसा बचा। उसे निर्माण में लगाया तो निम्न स्तर का। अब शहर की इन सड़कों पर बनी पुलिया से सीमेंट तो गायब हो गया है और रह गया है सरिया और रोड़ी। सरिया भी अराजक तत्व तोड़कर निकाल रहे हैं। इससे इन पुलिया पर हादसे का अंदेशा बना हुआ है। जिम्मदार हमेशा की तरह सब कुछ देखकर आंखें मूंदे हुए हैं।
इन जर्जर हो चुकी पुलिया से राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। यह पुलिया कभी भी सड़क के बीच में टूट कर नीचे गिर सकती है। नगर निगम के अधीन आने के बावजूद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अंधेरा हो जाता है तो आमतौर पर इन पुलिया से निकल रहे सरियों की वजह से गाड़ी चालक हादसे का शिकार हो जाते हैं, लेकिन इस पुलिया की मरम्मत नहीं की जा रही है। शहर में सरकारी योजनाओं में जमकर धांधली हो रही है।

जहां करोड़ों की लागत में बनने वाली सड़क योजना में घटिया सामान का इस्तेमाल कर सरकारी पैसों का बंदरबांट किया जा रहा है। सरकारी योजनाओं में जमकर धांधली हो रही है। जहां करोड़ों की लागत में बनने वाली सड़क योजना में घटिया सामान का इस्तेमाल कर सरकारी पैसों का बंदरबांट किया जा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रही शहर के सड़क निर्माण में खुलकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जहां निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान बिल्कुल नहीं रखा जा रहा है।
माधवपुरम में पुलिया के निकले सरिये
भूमिया के पुल से माधवपुरम होते हुए दिल्ली रोड को जाने वाले मार्ग पर मेन माधव पुरम में पुलिया का निर्माण नगर निगम की ओर से 13 वें वित्त आयोग से कराया गया था। अभी निर्माण हुए वर्ष भर भी नहीं हुआ है कि यह पुलिया जर्जर हो गई है। योजना के मुताबिक पुलिया के दोनों तरफ पीसीसी सड़क निर्माण किया जाना था, लेकिन यहां मिट्टी युक्त बालू और मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा पीसीसी सड़क निर्माण कार्य में मशीन का भी इस्तेमाल नहीं किया गया है। भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी वजह नगर निगम की लापरवाही है.
जहां सड़क निर्माण के दौरान कार्यस्थल पर निगम के अभियंता मौजूद ही नहीं होते हैं तथा निर्माण के बाद भी उसके निरीक्षण और नियमित मॉनिटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं होती है। तभी इसी तरह की लापरवाही सामने आती है। निर्माण के समय देखरेख का अभाव होने के नतीजे अब सामने आ रहे हैं। इस मेन पुलिया पर नाममात्र के लिए लगाया गया सीमेंट तो गायब हो गया है। जबकि अब सरिये बाहर निकल आये हैं। नीचे रह गया है सीमेंटेड पुलिया, जो कभी भी वाहन के साथ ही नीचे को धंस सकती है।
अधिकारियों को कमीशन से सरोकार
जब अधिकारियों और बाबुओं को महज अपने कमीशन से सरोकार होता है तो वह न तो निर्माण की गुणवत्ता देखते हैं। और न ही यह देखने का प्रयास करते हैं कि कितने सूत का सरिया इस्तोमल किया जा रहा है। यही वजह है कि ठेकेदार मनमाने ढंग से घटिया सामान का इस्तेमाल करता है और कम मजदूरी देकर मजदूरों से चलाऊ काम करवाकर कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है। जबकि जरूरत है कि निगम प्रशासन निर्माण के समय ही लगातार इसकी जांच करता रहे तोगुणवत्तापूर्ण सड़क का निर्माण हो सकता है।
हादसों को बुलावा, स्मिथ गंज की पुलिया
कुछ ऐसे ही दौर से शहर कबाड़ी बाजार स्मिथ गंज की पुलिया भी दो चार हो रही है। स्मिथ गंज के पास स्थित ये पुलिया महीनों से खतरनाक स्थिति में है। कई बार क्षेत्रीय दुकानदारों ने नगर निगम मुख्यालय जोन पहुंचकर समस्या से अवगत कराया, परंतु समाधान की दिशा में जिम्मेदार लगातार अनजान बने हुए हैं। क्योंकि मेन दिल्ली रोड तथा ईदगाह रोड व अन्य मार्गों पर जाने के लिए लोग इस पुलिया का उपयोग करते हैं,

इसलिए यहां आवागमन अधिक होता है। पुलिया के दोनों तरफ होल बन जाने से राहगीर सहमे रहते हैं, कि कहीं किसी दुर्घटना का वे शिकार न हो जाएं। क्षेत्रवासियों ने बताया कि पुलिया के नीचे का आधार बिल्कुल गायब है, कुछ ही निर्माण शेष बचा है, यदि पुलिया दुरुस्त नहीं कराई गई तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है।
10 हजार से ज्यादा गुजरते हैं वाहन
इन पुलिया पर प्रतिदिन करीब एक पांच हजार से ज्यादा छोटे-बडेÞ वाहनों को गुजरना पड़ता है। पहले भी कई बार इस पुलिया पर हादसे हो चुके हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारी हादसों से सबक नहीं ले रहे हंै। हालांकि क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्होंने उच्चाधिकारियों को बता दिया कि पुलिया हादसे का प्वाइंट बन सकती है। इसलिए जल्द निर्माण होना चाहिए, लेकिन अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। मुख्य मार्ग पर स्थित पुलिया हवा में लटकती दिख रही है। नीचे की मिट्टी बह भारत भारी मुख्य मार्ग पर स्थित पुलिया हवा में लटकती दिख रही है। नीचे की मिट्टी बह जाने के कारण दोनों तरफ खतरनाक होल बन गए हैं। क्षतिग्रस्त पुलिया कब किसी हादसे की वजह बन जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है।
हमने शहर की जर्जर हो रही पुलिया के बारे में नगर निगम में कई बार शिकायत की है, लेकिन एक बार भी शिकायत को देखते हुए मौका मुआयना तक नहीं किया गया है। इन पुलिया से हादसा हो सकता है। असामाजिक तत्व इन पुलिया से सरियों को निकालकर ले जा रहे हैं। पुलिया कभी भी गिर सकती है। -पंकज गोयल, भाजपा पार्षद
शहर की जर्जर पुलिया का सर्वे कराने के लिए नगर निगम के निर्माण विभाग को निर्देशित किया गया है। वास्तव में कई पुलिया की तत्काल मरम्मत नहीं होती है तो आकस्मिक दुर्घटना हो सकती है। इन क्षतिग्रस्त पुलिया के तत्काल पेचवर्क कराने के लिए कहा गया है। -हरिकांत अहलूवालिया, महापौर, नगर निगम, मेरठ।

