
इसमें कोई दो राय नहीं कि विपरीत हालात के बावजूद देश की आर्थिक विकास दर के आंकड़े लगातार उत्साह जनक सामने आ रहे हैं। खासबात यह है कि चालू वित्तीय वर्ष के पहली तिमाही के आंकड़े आशा से अधिक बेहतर रहने के साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष की चारों तिमाही से अधिक रहे हैं। यह सब तो तब है, जब दुनिया के देश अभी आर्थिक संकट के दौर से ही गुजर रहे हैं। दरअसल कृषि क्षेत्र बड़ा सहारा बन कर उभर कर आता रहा है। हालांकि आने वाली तिमाही कृषि क्षेत्र के लिए अनुकूल इसलिए नहीं मानी जा सकती कि देश में मानसून धोखा देता दिखाई दे रहा है। देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के आंकड़े निराशाजनक आ रहे हैं। यह सर्वविदित है कि खरीफ की फसल लगभग पूरी तरह मानसून पर निर्भर करती है और मानसून ने जिस तरह से अगस्त माह में बेरुखी दिखाई है, उससे कृषि जगत में निराशा आई है।