Thursday, March 19, 2026
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बहलाकर ले जाए गए चार बच्चों को मिला पिता का सहारा

  • पत्नी-बच्चों को बहलाकर भगा लाया था दोस्त
  • चार बच्चों को किराये के मकान में छोड़कर हुआ था फरार

जनवाणी ब्यूरो |

शामली: शहर में चार बच्चों को मकान मालिक के घर में छोड़कर फरार हुए कथित दंपति के मामले में एक बार फिर नया मोड आ गया है। चाइल्ड केयर ने बच्चों को उनकी मौसी को सौंप दिया था जिसके कुछ दिनों में बच्चों की मां सामने आ गई।

जो युवक महिला और बच्चों बहला-फुसलाकर भगा कर लाया था वह अभी तक सामने नहीं आ सका। जबकि बच्चों का पहला पिता अब अपने बच्चों का अपनाने को तैयार हो गया है। वह तीन बच्चों को अपने परिवार से मिलाने के लिए भी ले गया जबकि बच्चों की मां व बड़ी बेटी अभी भी मौसी के पास ही है।

उधर, मां सावित्री हॉस्पिटल के संचालक व रोटरी क्लब शामली मिडटाउन के अध्यक्ष डा. रीतिनाथ शुक्ला ने बच्चों को गोद ले रखा है जिसके चलते उन्होंने गांव में पहुंचकर बच्चों को कंबल, कपड़े, दवाइयां और खर्च के लिए कुछ पैसे दिए हैं।

शामली शहर के मोहल्ला टंकी कॉलोनी में दिव्यांग सुनील संगल के मकान में संजय नाम का एक युवक एक महिला सुंदरी देवी व चार बच्चों को लेकर किराये पर रह रहा था। संजय ने सुंदरी को अपनी पत्नी बच्चों को अपने बेटा-बेटी बताया था। किराये के मकान में महिला ने एक बेटे को जन्म दिया था।

जिसके बाद दंपति समेत 15 साल की बड़ी बेटी विशाखा, 13 साल की दूसरी बेटी अंशु, 10 साल की तीसरी बेटी सिमरन, सात साल का बेटा रितेश और 7 माह का एक बेटा कनैहया साथ में रहने लगे। अचानक ही दो जून को युवक संजय अपने कथित पत्नी बच्चों को छोड़कर कहीं भाग गया था।

उसके सवा महीने बाद महिला भी अपने सात माह के बच्चों को लेकर कहीं चली गई। किराये के मकान में चार बच्चे रह गए थे। इस मामले को दैनिक जनवाणी अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर चाइल्ड केयर ने बच्चों का संज्ञान लिया।

वहीं मां सावित्री हॉस्पिटल के संचालक डा. रीतिनाथ शुक्ला ने इन चारो बच्चों को उनकी पूर्ण व्यवस्था होने तक गोद ले लिया था। चाइल्ड केयर ने बच्चों की मौसी को किसी तरह तलाश करते हुए उनकी सुपुर्दगी में गांव दूधली चरथावल भेज दिया था।

उधर, डा. रीतिनाथ शुक्ला गांव पहुंचकर भी बच्चों का हाल जानने के साथ ही मदद करते रहे। कुछ समय बाद बच्चों की मां सुुंदरी किसी तरह अखबारों में खबर पढ़कर अपने बच्चों के पास पहुंच गई थी जबकि सुुंदरी का अपनी बहन व परिवार से वर्षों से कोई संपर्क नहीं रहा था।

छोटी बहन व बच्चों को मौसी मिथलेश ने अपने पास रख लिया लेकिन संजय का कुछ पता नहीं चल सका था। बाद में पता चला था कि संजय उक्त बच्चों का असली पिता नहीं है वह तो उसके दोस्त की पत्नी व बच्चे हैं। संजय महिला सुंदरी को बहलाकर भगा लिया था लेकिन बच्चों के बिना सुंदरी ने जाने से इंकार कर दिया था। करीब डेढ़ साल साथ रहने के बाद संजय इन बच्चों व महिला को छोड़कर फरार हो गया था।

अब रोटरी क्लब शामली मिडटाउन के अध्यक्ष व मां सावित्री हॉस्पिटल के संचालक डा. रीतिनाथ शुक्ला ने गांव दूधली पहुंचकर बच्चों का हाल जाना। तब वहां जानकारी हुई कि बच्चों का असली पिता रमेश अब इन बच्चों को अपनाने के लिए तैयार हो गया है।

वह तीन बच्चों को अपने परिवार से मिलवाने को यमुनानगर भी ले गया जहां उसका परिवार रहता है। डा. रीतिनाथ शुक्ला ने बताया कि उन्होंने बच्चों, उनकी मां व मौसी तथा मौसी के बच्चों को कंबल, कपड़े, दवाई और खर्च के लिए कुछ पैसे दिए हैं ताकि मौसी इन बच्चों को बोझ न समझे। उनका कहना है कि बच्चों के आंसुओं सामने वह पिघल गए हैं।

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