
प्रेसिडेंट ट्रंप के दूसरी दफा अमेरिकन राष्ट्रपति पद पर आसीन हो जाने के तत्पश्चात, फरवरी 2025 से अमेरिका और चीन के मध्य टैरिफ के विकराल सवाल परसंघर्षपूर्ण कूटनीतिक और व्यापारिक तनाव देखा गया है। विगत दस महीनों से व्यापारिक प्रतिशोध की भावना से ओतप्रोत होकर चीन और अमेरिका एक दूसरे पर एक से बढ़कर एक टैरिफ आयाद करते चले गए। महत्वपूर्ण खनिज संपदा, जिनको रेयर मिनरल भी कहा जाता है, सेमीकंडक्टर्स, जिन्हें आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग की रीढ़ करार दिया जाता है, सोयाबीन आदिअनेक वस्तुओं के आयात-निर्यात के जटिल प्रश्नों पर अमेरिका और चीन के मध्य जबरदस्त व्यापारिक और कूटनीतिक तनाव का निरंतर दीदार होता रहा। आखिरकार विगत दस माह से निरंतर जारी कटुता से परिपूर्ण व्यापारिक और कूटनीतिक कशमकश के पश्चात अमेरिका और चीन एक व्यापारिक समझौते तक आखिरकार पहुंच ही गए हैं। अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन राष्ट्रपति श्री जिनपिंग के मध्य दक्षिण कोरिया में संपन्न हुई कूटनीतिक वार्ता का परिणाम अब दुनिया के सामने आ चुका है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरमाया कि अमेरिका अब चीन में निर्मित उन वस्तुओं पर आयद किए गए टैरिफ को घटा देगा, जिन्हे अमेरिका द्वारा टैरिफ युद्ध के दौरान आयद किया गया था। अब अमेरिका द्वारा फेंटानिल टैरिफ को 20 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी फरमाया है कि व्यापारिक समझौते के मुताबिक चीन अब अमेरिका से बड़ी मात्रा में सोयाबीन का आयात करने के लिए भी तैयार हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि चीन के साथ रेयर मिनरल सप्लाई के व्यापार मुद्दे को भी सुलझा लिया गया है।
फरवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के ऊपर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ आयाद करने का ऐलान किया था। इसके प्रतिउत्तर में चीन ने अमेरिका के विरुद्ध 20 प्रतिशत टैरिफ आयद कर दिया था। अमेरिका के लिबरेशन डे ऐतिहासिक अवसर पर डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 34 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बाकायदा धमकी दी थी। चीन और अमेरिका के मध्य एक दूसरे खिलाफ टैरिफ लगाने का यह सिलसिला निरंतर गति से जारी रहा। आखिरकार अमेरिका द्वारा चीन के ऊपर 145 प्रतिशत तक टैरिफ आयद कर दिया या गया। चीन द्वारा अमेरिका के विरुद्ध प्रतिशोधात्मक रवैया अख्तियार करते हुए, अमेरिका के विरुद्ध 125 प्रतिशत टेरिफ आयद कर दिया गया। चीन और अमेरिका के मध्य जारी टैरिफ युद्ध के कारण मैन्युफैक्चरर्स और ट्रेडर्स दोनों ही विकट संकट में आ गए। चीन के गोदामों में मैन्युफैक्चर्ड माल का विशाल अंबार लग गया। अमेरिकन कंपनियां बेहद हताश निराश होकर घबरा उठीं।
जटिल प्रश्न उठा खड़ा हुआ कि आखिरकार मैन्युफैक्चरर्स और ट्रेडर्स रातों-रात अपने निर्मित माल की सप्लाई चेन बरकरार रखने के लिए एकदम नया विकल्प किस तरह से ढूंढ निकाल सकते हैं। प्रेसिडेंट ट्रंप द्वारा प्रारंभ किए गए वैश्विक टैरिफ युद्ध के दौरान ही अमेरिकन प्रशासन द्वारा ट्रांसशिपमेंट पर भी प्रबल निशाना साधा गया, ताक चीन में निर्मित सामान को वियतनाम, कंबोडिया, लाओस आदि साम्यवादी देशों के माध्यम से अमेरिका को कदाचित भेजा नहीं जा सके। अमेरिका द्वारा प्रारंभ किए गए टैरिफ युद्ध के दौरान चीन एक कदम भी पीछे नहीं हटा। अमेरिका के प्रत्येक टैरिफ आक्रमण का चीन द्वारा कड़ा प्रतिउत्तर पेश किया गया। चीन द्वारा अमेरिका के एग्रीकल्चर सेक्टर को प्रबल निशाना बनाया गया।
चीन द्वारा अमेरिका के विरुद्ध सोयाबीन जैसे एग्रीकल्चर प्रोडक्ट पर अत्यधिक टैरिफ आयद कर दिया गया। दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने एप्पल और वालमार्ट आदि अमेरिकन कंपनियों को चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से पृथक करने की जबरदस्त कोशिशें अंजाम दी, किंतु बड़ी अमेरिकन कंपनियों को अनेक रियायतें प्रदान कर दिए जाने के कारण, डोनाल्ड ट्रंप की चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बायकॉट करने की पॉलिसी बेहद कमजोर होकर नाकाम सिद्ध हो गई।
कूटनीतिक तौर पर चीन द्वारा अनेक दफा दोहराया गया कि वह अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तत्पर है। किंतु प्रबल आत्मविश्वास से परिपूर्ण चीन हुकूमत ने बाकायदा ऐलान किया कि टैरिफ युद्ध में चीन एक कदम भी पीछे नहीं हटेगा। चीन द्वारा रेयर मिनरल्स का निर्यात अमेरिका को तत्काल रोक देने की उद्घोषणा ने अमेरिका को हतप्रभ करके रख दिया। उल्लेखनीय है कि चीन के रेयर मिनरल्स पर अमेरिकन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की निर्भरता सर्वाधिक बनी रही है। उल्लेखनीय है कि चीन में ही 70 प्रतिशत रेयर मिनरल्स का उत्पादन किया जाता है। चीन द्वारा अमेरिका को सप्लाई किए जाने वाले रेयर मिनरल्स की उपयोगिता स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिकतम उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। चीन के इस कठोर कदम के बाद अमेरिका द्वारा आॅस्ट्रेलिया, मलेशिया और जापान आदि देशों के साथ अनेक समझौते अंजाम दिए गए हैं, ताकि चीन के अतिरिक्त भी अनेक देशों के मिनरल स्रोतों से अमेरिका के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को रेयर मिनरल्स निरंतर हासिल होते रह सकें।
अपने दूसरे कार्यकाल में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत जैसे दोस्त देश को भी टैरिफ युद्ध में जबरदस्त निशाना बनाया है। यकीनन भारत द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा शुरू किए गए टैरिफ युद्ध का चीन जैसा कड़क प्रतिउत्तर तो अमेरिका को प्रदान नहीं किया जा सका है। भारत वस्तुत प्रेसिडेंट ट्रंप द्वारा भारत के निर्यात पर सौ प्रतिशत टैरिफ आयद करने के जवाब में एक प्रतिशत टैरिफ भी अमेरिका के निर्यात के विरुद्ध नहीं बढ़ा सका है। भारत अपनी संतुलित कूटनीति के तहत अमेरिका के विरुद्ध कोई व्यापारिक संघर्ष का मोर्चा नहीं खोलना चाहता है। भारत इस व्यापारिक मसअले को अमेरिका के साथ कूटनीतिक और व्यापारिक बातचीत द्वारा सुलझाना चाहता है। इंग्लैंड के साथ अत्यंत कामयाबी के साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौता अंजाम दिया है। साथ ही साथ यूरोपियन यूनियन के साथ भी आने वाले भविष्य में एक शानदार मुक्त व्यापार समझौता अंजाम दे दिया जाएगा। जहां तक अमेरिका का प्रश्न है अमेरिकन प्रेसिडेंट ट्रंप निरंतर अपने बयानों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना निकट मित्र होने का दावा पेश कर रहे हैं। दुर्भाग्य से मित्रवत व्यवहार कदाचित नहीं कर रहे हैं।
ग्लोबल इकॉनमी के दौर में सभी देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक दूसरे पर निर्भर हो चुकी हैं। प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्धोंको साम्रज्यवादी देशों के मध्य उपनिवेशों को हड़प लेने के आर्थिक लोभ और लालच की हवस द्वारा जन्म दिया गयाथा। परिणाम स्वरूप प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्धों में क्रमश: दो करोड़ और द्वितीय विश्वयुद्ध में तकरीबन नौ करोड़ इंसान कत्ल कर दिए गए थे। विश्व पटल पर नव साम्रज्यवाद निरंतर जीवित बना रहा है। अत:सारी दुनिया को लूट लेने की विनाशकारी हवस भी कायम बनी रही है।

