Thursday, April 25, 2024
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नीचे जा रही चीनी अर्थव्यवस्था, एक्सपर्टस ने की यह बात…

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नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉट कॉम वेबसाइड पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन करते है। तो चलिए जानते है कि कोरोना वायरस के बाद चीन की अर्थव्यवस्था पर क्या फर्क पड़ा है…जैसे कि आप जानते ही है कि 2020 में कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था।

मीडिया रिर्पोट के मुताबिक दावा किया गया था कि यह जानलेवा वायरस चीन से आया है लेकिन तब चीन सरकार ने इस बात को गफलत में रखा था। लेकिन कहते है ना सच ज्यादा दिन तक नही छिप सकता…तो ऐसा ही अब चीन सरकार के साथ हुआ है।

दरअसल, अब चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक वहां एक महीने के अदंर लगभग 60 हजार लोगों की मौत का कारण कोरोना वायरस ही बताया है। लेकिन इस पर विश्वास करना ना मुमकिन है क्योंकि कोरोना के कहर ने न ही लाखों लोगो की जान ली है बल्कि अर्थव्यवस्था को कई वर्ष पीछे पहुचा दी है।

2021 के 8% के मुकाबले भारी गिरावट

हाल ही में हुए ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट के घोषणा से पहले एक्सर्पटोें ने आशंका जतायी है कि कोरोना महामारी के संकट की वजह से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना शासित दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था आर्थिक संकट का सामना कर रही है। वहीें एएफपी ने 10 एक्सपर्ट की राय के आधार पर बीते साल इसकी GDP में एक साल पहले के मुकाबले औसतन 2.7 बढ़ोतरी का अनुमान जताया है। 2021 के 8% के मुकाबले यह भारी गिरावट है।

जीरो कोविड पॉलिसी ने स्थिति को किया खराब

चीन के तानाशाह शी जिनपिंग ने 5.5 का विकास दर तय किया था लेकिन तानाशाह की जीरो कोविड पॉलिसी ने स्थिति को और खराब कर दिया। जिससे चीन की गतिविधियों और खपत दोनों ही निचले स्तर पर पहुंच गयी है। बता दें कि 1976 में जब चीन के तानाशाह माओ जेडॉन्ग की मौत हुई थी, तब चीन की अर्थव्यवस्था सिर्फ 1.6 फीसदी के हिसाब से बढ़ी थी। इसी तरह 2019 के अंतिम में वुहान से कोरोना वायरस के निकलने के बाद 2020 में भी चीन की अर्थव्यवस्था बहुत बुरी तरह प्रभावित रही थी और उस साल के आंकड़े की तुलना मौजूदा परिस्थितियों में नहीं की जा रही है।

शी जिनपिंग की ‘जीरो-कोविड’ पॉलिसी के तहत सख्त लॉकडाउन, क्वारंटीन और अनिवार्य मास टेस्टिंग की वजह से झेंग्झोउ जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में निर्माण और व्यापारिक प्रतिष्ठान ठप पड़ गए। दुनिया की सबसे बड़ी आइफोन निर्माण फैक्ट्री में काम रुक गया, जिससे पूरी दुनिया में खराब छवि बनी सो अलग, वैश्विक सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा। लेकिन, नवंबर में जब जीरो-कोविड पॉलिसी का विरोध शुरू हुआ तो दिसंबर की शुरुआत में इसे अचानक से हटा लिया गया और फिर वहां कोरोना का विस्फोट शुरू हो गया।

एक्सपर्ट का जीडीपी के विकास दर पर 4.3 का अनुमान

2023 में चीन की अर्थव्यवस्था का क्या होगा? रैबोबैंक के एनालिस्ट तीयुवी मेविसीन ने उनकी बातों पर सहमति जताते हुए कहा है कि चौथी तिमाही में ‘निश्चित तौर पर गिरावट दिखेगी, कोविड के तेज संक्रमण के कारण।’ उन्होंने कहा कि ‘इससे डिमांड और सप्लाई दोनों ही स्थितियों पर खराब असर पड़ेगा।’ वहीं प्रॉपर्टी सेक्टर में अभी भी विकास का इंतजार है। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट की उम्मीद है कि अब सबसे बुरा दौरा गुजर चुका है। वैसे फिर भी वर्ल्ड बैंक ने साल 2023 के लिए चीन की जीडीपी के विकास दर का अनुमान 4.3 फीसदी ही रखा है, जो कि उम्मीदों से काफी कम है।

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