
कला संगीत और नृत्य का स्रोत आनंद है। आनंद का स्रोत प्रकृति है। प्रकृति रूपों से भरी पूरी है। रूप आंखों से देखे जाते हैं। कविता में उनका वर्णन हो सकता है। नाट्य कला में गीत संगीत और नृत्य एक साथ होते हैं। भारत में अभिनयशास्त्र का विकास प्राचीन काल में ही हो रहा था। भरत मुनि का नाट्य शास्त्र इसका साक्ष्य है। नाट्यशास्त्र पांचवां वेद कहा गया था। गीता अद्वितीय दर्शनशास्त्र है। अपनी विभूतियाँ बताते हुए कृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि, ‘मैं वेदों में सामवेद हूं’।