Saturday, December 4, 2021
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स्वच्छता अभियान के नाम पर बड़ा मजाक

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  • 55 लाख से ज्यादा यूरिनल पोर्ट पड़े हैं बदहाल
  • प्रत्येक यूरिनल बनाने में आया था 90 हजार से लेकर एक लाख तक का खर्च

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: देश को स्वच्छ बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न प्रयास कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने खुद झाड़ू उठाकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए बीड़ा उठाया था। वही, दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों में शौचालय बनाने के लिए मुहिम शुरू की थी, ताकि शौचालय न होने के कारण उत्पन्न होने वाली बीमारियों से देश की जनता को बचाया जा सके।

मुहिम शुरू होने के पश्चात शौचालय तो बन गए, लेकिन उनकी साफ-सफाई और रखरखाव का कोई ध्यान नहीं दे रहा। हालात यह हैं कि अब जिन लोगों के लिए यूरिनल बनाए गए थे, वह लोग ही यूरिनल का उपयोग करने से बचते हैं। क्योंकि इतनी गंदगी और अव्यवस्था हैं कि बीमारी फैलने का भी डर रहता है।

55 लाख से ज्यादा कीमत में बने थे 52 यूरिनल पोर्ट

स्वच्छता अभियान के अंतर्गत जनपद में नगर निगम द्वारा दो प्रकार के शौचालय बनाए गए थे। उसमें 200 से ज्यादा शौचालय एवं 52 यूरिनल शामिल थे। शहर भर में बनाए गए 52 यूरिनल की लागत 50 लाख रुपये से ज्यादा की है। नगर निगम के सूत्रों के अनुसार प्रत्येक यूरिनल बनाने में 90 हजार से लेकर एक लाख तक का खर्चा आया था।

गंदगी देख लोग नहीं करते यूरिनल का प्रयोग

नगर निगम द्वारा लाखों रुपये खर्च कर कर भले ही आम जनमानस की सुविधा के लिए शहर भर में यूरिनल का निर्माण कराया हो, लेकिन उसकी अव्यवस्था के कारण कहीं न कहीं लाखों रुपये का खर्चा भी पानी में ही बेकार हो रहा है, क्योंकि यूरिनल के हालात देखकर वहां कोई भी जाना नहीं चाहता।

दरअसल न तो वहां पानी की व्यवस्था है और न ही साफ-सफाई होती है। इसी वजह से उस क्षेत्र से निकलने वाले लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन लोगों के लिए यूरिनल बनाए गए थे। अगर वही लोग उनको प्रयोग करने से कतराते हैं तो बनाने का क्या फायदा।

कोविड के बीच भी नहीं हो रही सफाई व्यवस्था

कोविड-19 से उत्पन्न हुई परिस्थितियों में प्रदेश सरकार द्वारा सहारे निय कार्य किया गया था, जिसमें हर शनिवार एवं रविवार को शहर की सफाई करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा आदेश जारी किए गए, लेकिन फिर भी नगर निगम से संबंधित यूरिनल में उस प्रकार की सफाई व्यवस्था नहीं हुई। जिस प्रकार की होनी चाहिए थी।

पार्षद पति नरेंद्र राष्ट्रवादी ने कहा कि कई बार साफ-सफाई के लिए अवगत कराया गया है, लेकिन उसके पश्चात भी साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि इसकी देखभाल के लिए भी कई बार अवगत कराया गया है, उसके पश्चात भी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं दिखाई दे रहा।

 

अरुण कुमार ने कहा कि यूरिनल की साफ-सफाई न होने के कारण यहां से निकलने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आसपास के व्यापरियों को भी दुर्गंध से अनेकों परेशानी होती है और बीमारी फैलने का भी अंदेशा रहता है, लेकिन साफ-सफाई न होने से इनकी हालत खराब है।

 

गौरव कुमार ने कहा कि कोविड-19 की परिस्थितियों के बीच भी यूरिनल की साफ-सफाई व्यवस्था नहीं हुई। इतना ही नहीं यहां पर पानी की व्यवस्था भी नहीं है। जिस कारण यहां पर अब लोग आने से भी कतराते हैं कि कहीं कोई बीमारी न घेर ले। बस ये ही डर सताता है।

 

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