- 95 साल पुराना हो बिजनौर घंटाघर हो चुका बदहाल
- अमीनुददीन ठेकेदार ने कराया था बिजनौर घंटाघर का निर्माण
जनवाणी ब्यूरो |
बिजनौर: बिजनौर सदर बाजार में स्थित घंटाघर का निर्माण 95 वर्ष पहले हुआ था। करीब 31 साल से इस घंटाघर की घड़ी में टिकटिक की आवाज नहीं सुनाई दी। इस समय घंटाघर बदहाल हो चुका है। ठेकेदार अमीनुददीन ने इस घंटाघर का निर्माण कराया था। इसके सौंदर्यकरण के लिए उत्तर प्रदेश शासन को नगर पालिका की ओर से एक प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव पर मोहर लगते ही घंटाघर के दिन फिर से बहुरेंगे।
बिजनौर घंटाघर का निर्माण 1926 में अमीनुद्दीन ठेकेदार ने कराया था। जिस भूमि पर अमीनुद्दीन ठेकेदार ने घंटाघर बनवाया था, उस भूमि को पालिका प्रशासन ने ठेकेदार को मुआवजे के रूप में दी थी। उस वक्त इस घंटाघर का शिलान्यास अंग्रेज कलेक्टर वोट्स ने किया था। घंटाघर 17.10 मीटर ऊंचा तथा लगभग सवा मीटर व्यास की सीढ़ियां बनी हुई है। घंटाघर के नीचे रहने वाले व्यक्तियों ने ऊपर जाने वाले रास्ते को बंद करा दिया है। करीब 31 वर्ष से इस घंटाघर की घड़ी भी बंद पड़ी हुई है।
उधर बिजनौर नगर पालिका चेयरपर्सन रुखसाना परवीन की माने तो बिजनौर घंटाघर सौंदर्यकरण के लिए करीब 50 लाख रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा गया था। यदि शासन से इस प्रस्ताव पर मोहर लगा दी तो घंटाघर का सौंदर्यकरण कराया जा सकता है। घंटाघर बिजनौर की प्राचीन सुंदर धरोहर है। इसके सौंदर्यकरण का प्रयास जारी रहेगा।
59 साल बाद घंटाघर में लगी थी घड़ी
घंटाघर में घड़ी लगाने का मुद्दा उठाते हुए लोगों ने बिजनौर के तत्कालीन डीएम दर्शन सिंह बेंस से घड़ी लगवाने की मांग की थी। वर्ष 1985 में निर्माण के करीब 59 साल बाद घंटाघर में घड़ियां लगा दी गई, लेकिन घंटाघर के रखरखाव के लिए कोई व्यवस्था नही की गई।
घड़िया लगने के बाद कुछ साल तो घड़ी के टिकटिक की आवाज सुनाई दी, लेकिन जब मरम्मत नहीं कराई गई तो कुछ साल बाद घड़ी खराब हो गई। इसी वजह से बिजनौर घंटाघर टिकटिक की आवाज नही आती। उधर ये भी चर्चाएं आम है कि इस घंटाघर की नींव में एक चांदी की ईंट रखी गई थी, लेकिन इस बात की कोई पुष्टि नहीं करता।

