Sunday, September 19, 2021
- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
- Advertisement -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeUttar Pradesh NewsMeerutलीज पर घिरी समिति, कार्रवाई से पहले मांगी विधिक राय

लीज पर घिरी समिति, कार्रवाई से पहले मांगी विधिक राय

- Advertisement -
  • गांधी आश्रम: खादी एवं ग्रामोद्योग के डायरेक्टर ने कहा-नहीं हो सकती 3800 मीटर जमीन की लीज,
  • नहीं दिया चिट्ठी का जवाब

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गांधी आश्रम की 3800 मीटर जमीन की लीज के मामले में समिति घिर गई है। कार्रवाई कब होगी? लीज निरस्त होगी या फिर नहीं? ये तमाम सवाल हैं, जिनके जवाब नहीं मिल रहे हैं।

आयोग की चिट्ठी का अभी जवाब समिति ने नहीं दिया हैं, लेकिन इसमें खादी एवं ग्रामोद्योग के डायरेक्टर राजेश कुमार ने कार्रवाई करने से पहले विधियक राय मांग ली हैं।

विधिक राय दो दिन के भीतर आ सकती हैं, जिसके बाद ही इसमें एफआईआर दर्ज करायी जाएगी या फिर लीज किस तरह से निरस्त होगी? इसके बारे में कुछ कहा जा सकता है। गांधी आश्रम राष्ट्रीय धरोहर का हिस्सा हैं, लेकिन गांधी आश्रम समिति ऐसा नहीं मानती।

समिति के पदाधिकारी अरबो की सम्पत्ति को गांधी आश्रम समिति की निजी सम्पत्ति मानते हैं, जिसके चलते ही 20 बीघा जमीन में से 3800 मीटर जमीन की लीज डीड पर हस्ताक्षर कर दिये गए हैं।

डीड पर हस्ताक्षर गांधी आश्रम समिति के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत ने किये, लेकिन इसके लिए लखनऊ हैड आफिस भी पूरी तरह से संलप्ति हैं।

बकौल, पृथ्वी सिंह रावत यह 30 वर्ष के लिए लीज डीड लखनऊ हेड आफिस से अनुमति मिलने के बाद ही की गई है।

स्थानीय स्तर पर यह निर्णय नहीं लिया गया। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मुरादाबाद में भी ठीक इसी तरह से गांधी आश्रम की जमीन की लीज की गई थी, जिसकी लीज निरस्त की गई।

क्योंकि वह प्रकरण भी सुर्खियों में आ गया था, जिसके बाद आयोग ने हस्तक्षेप कर पूरे प्रकरण की जांच कराई, जिसके बाद लीज की डीड को खत्म कर दिया गया था। ठीक उसी तरह का मेरठ के गांधी आश्रम का जमीन की लीज का मामला सामने आया है।

गांधी आश्रम समिति ने तो लीज की डीड करके भुगतान भी प्राप्त कर लिया है। यह भुगतान गांधी आश्रम लखनऊ हेड आफिस के बैंक खाते में जमा कराया गया हैं, जिसमें से 50 लाख की धनराशि मेरठ गांधी आश्रम के खाते में कर्मचारियों को पीएफ का वितरण करने के लिए बांट भी दी है।

अब इस प्रकरण में नया मोड़ यह आया कि खादी एवं ग्रामोद्योग के डायरेक्टर राजेश कुमार ने गांधी आश्रम समिति के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत को एक पत्र लिखकर लिखित स्पष्टकरण तो मांग ही लिया है, साथ ही जमीन की लीज को लेकर विधिक राय मांग ली है।

राजेश कुमार ने बताया कि दो दिन के भीतर विधिक राय मिल जाएगी, जिसके बाद इस जमीन के लीज के मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यही नहीं, उनका दावा है कि गांधी आश्रम की जमीन आयोग के पास मोर्गेज है, ऐसी दशा में जमीन को लीज पर नहीं दिया जा सकता। यही नहीं, उनका यह भी दावा है कि आवश्यक नहीं है कि गांधी आश्रम की जमीन आयोग के पास मोर्गेंज हो, यदि मोर्गेज भी नहीं है तो भी जमीन लीज पर नहीं दी जा सकती।

क्योंकि ऐसा ही मामला मुरादाबाद का था, जिसमें आयोग ने सख्त निर्णय लेते हुए लीज डीड को खारिज करा दिया था। गांधी आश्रम की जिस जमीन को निजी समिति बता रही है, वह गलत है। गांधी आश्रम की जमीन निजी नहीं है।

इसकी पूरी कारगुजारी पर आयोग निगाह रखता है। दरअसल, जमीन के लीज के मामले को लेकर गांधी आश्रम समिति व खादी एवं ग्रामोद्योग आमने-सामने आ गए हैं।

जमीन को लेकर टकराव के हालात बन रहे हैं। क्योंकि जिस कंपनी के नाम इसका लीज हुआ है, उसका गांधी आश्रम ने मौके पर काबिज होना भी आन रिकॉर्ड दर्शा दिया हैं, जबकि मौके पर गांधी आश्रम की गतिविधियां संचालित हो रही है।

अब विधिक राय आने का इंतजार किया जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि बॉयलाज क्या कहता हैं? उसको ही आधार बनाते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।

तो चार्टेट एकाउंटेंट की चुतराई धरी रह जाएगी

चार्टेड एकाउंटेंट की चतुराई आखिर धरी रह जाएगी। जिस तरह से विवादित जमीनों को लेने के मामले में चार्टेड एकाउंटेंट पंकज गुप्ता का नाम सुर्खियों में रहता हैं, अब फिर से गांधी आश्रम की जमीन को लीज पर लेने के मामले में फंस गए हैं।

इस बार उनकी चतुराई धरी रहती दिख रही है। पूर्व में भी कई स्थानों पर विवादित जमीन को लेकर चार्टेड एकाउंटेंट सुर्खियों में आ चुके हैं। पहले मुरलीपुर स्थित एक जमीन के मामले में उनका नाम खूब उछला था। अब गांधी आश्रम की जमीन को लीज पर जिस कंपनी के नाम लिया है, वह उनकी पत्नी व दो बेटों के नाम पर हैं।

इस कंपनी से चार्टेड एकाउंटेंट ने अपना और अपनी मां का नाम इस कंपनी से दो माह पहले ही वापस ले लिया, जिसके बाद ही गांधी आश्रम की जमीन का लीज तैयार कराई गयी।

लौटे गांधी आश्रम समिति के मंत्री

कई दिनों के बाद आखिर गांधी आश्रम समिति के मंत्री पृथ्वी सिंह रावत लौट आये हैं। क्योंकि इस डीड पर हस्ताक्षर होने के बाद जब भी पत्रकार उनके आफिस आ रहे थे, तब वह गायब मिल रहे थे। पूछने पर बताया गया कि वह अपने पैतृक गांव उत्तराखंड के चमौली शहर में परिवारिक कारणों से गए थे।

उन्होंने कहा कि लीज की डीड पर वह अडिग है। इसमें वह कुछ भी गलत नहीं मानते। यही नहीं, उनका तो यहां तक कहना है कि आयोग को गांधी आश्रम की सम्पत्ति में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

What’s your Reaction?
+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

+1
0

- Advertisement -

Leave a Reply

- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Most Popular

- Advertisment -spot_img

Recent Comments