- उपभोक्ता बढ़े, लेकिन आॅपरेटर्स ने अधोसंरचना का नहीं किया विस्तार इसलिए बढ़ रही समस्या
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: देशभर में संचार क्रांति का युग चल रहा है। सभी टेलीकॉम कंपनियां अपने अपने नेटवर्क के मजबूत होने और इंटरनेट की तेज रफ्तार उपलब्ध कराने का दावा करती हैं, लेकिन इसके बावजूद कॉल ड्रॉप यानी फोन बार-बार डिस्कनेक्ट होना, तीन से चार बार प्रयास के बाद फोन का मिलना, पहली बार कॉल करने पर मोबाइल स्विच आॅफ बताना, इंटरनेट स्पीड न आना और नेटवर्क फ्लकचुएशन आम बात हो गई।

वहीं, प्रतिस्पर्धा के बीच जियो ने सबसे पहले खुद को अपग्रेड करने का दावा किया। इसके बाद बीएसएनएल, एयरटेल और अंत में वोडाफोन-आइडिया ने भी बेहतर सर्विस देने का दावा किया, लेकिन इसके बावजूद शहर लाखों मोबाइल उपभोक्ताओं को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सदर, लालकुर्ती, शास्त्रीनगर, गंगानगर, रुड़की रोड और कंकरखेड़ा क्षेत्र के ग्राहकों के अनुसार सर्वाधिक समस्या वोडाफोन आइडिया में है। इसके अलवा एयरटेल, बीएसएनएल और जियो में भी काफी जगहों पर नेटवर्क में दिक्कत आ रही है।
एयरटेल के डिस्ट्रिब्यूटर के अनुसार प्रतिदिन 500 उपभोक्ता एयरटेल और ओवरआॅल 1500 ग्राहक शहर में बढ़ रहे हैं। शहर में इस समय 9 लाख से अधिक मोबाइल डाटा उपभोक्ता हैं। अन्य कंपनियों के उपभोक्ता भी हमारे नेटवर्क में आ रहे है जिसके चलते एयरटेल पर लोड काफी बढ़ गया है जिस कारण कभी कभी समस्या आ जाती है।
बीएसएनएल ग्राहकों की संख्या बढ़ी
बीएसएनएल के डीजीएम संजय पाल का कहना है कि बीएसएनएल पर लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। पिछले एक माह में ही शहर में बीएसएनएल के 6 हजार उपभोक्ता बढ़े हैं। शहर में कहीं भी बीएसएनएल के नेटवर्क में समस्या नहीं हैं। मेरठ में रविवार का एमपीएलएस राउटर्स टैरिफ 5.36 जीबीपीएस रहा है।
डेटा ड्रॉप की समस्या से लोग परेशान
जिले के मोबाइल उपभोक्ता अभी डेटा कॉल ड्रॉप और इंटरनेट डेटा ड्रॉप की समस्या से जूझ रहे हैं। बातचीत के बीच में ही फोन कट जाता है। कई बार फोन लगाने के बावजूद नहीं लग रहा है। यही हाल इंटरनेट का भी है। उपभोक्ताओं को एक समान स्पीड नहीं मिल रही है। बल्कि बीच-बीच में मोबाइल डाटा ड्रॉप हो जाता है और जूम मीटिंग या अन्य काम करते समय कुछ समय के लिए उपभोक्ता उससे कट जाते हैं। इंटरनेट की स्पीड एक समान नहीं मिल पा रही है जबकि दावे बड़े-बड़े किए जाते हैं। पहले केवल वॉयस कॉल में यह समस्या होती थी लेकिन अब डेटा कॉल में भी ड्रॉप की दर बढ़ गई है। यह स्थिति तब है जबकि कंपनियों ने इंटरनेट और कॉल डाटा की दरों में हाल ही में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है।
नंबर पोर्ट करा रहे उपभोक्ता
इंटरनेट की स्पीड और मोबाइल डेटा कॉल ड्रॉप बढ़ने के कारण लोग लगातार नंबर पोर्ट भी करा रहे हैं। यानी एक कंपनी की सेवाएं छोड़कर दूसरे पर जा रहे हैं लेकिन उन्हें कहीं भी राहत नहीं मिल पा रही है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देशभर में अभी तक करोड़ों उपभोक्ताओं ने मोबाइल पोर्टेबिलिटी के लिए आवेदन किया है। हर महीने लगभग 15 हजार लोग नंबर पोर्ट कराने के लिए आवेदन कर रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार उपभोक्ताओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। क्योंकि कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम, आॅनलाइन क्लासेज आदि के कारण इसकी जरूरत हर किसी को पड़ रही है।
उपभोक्ता बढ़े लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं
कंपनियां सिम बेचकर उपभोक्ता तो बढ़ाती जा रही हैं लेकिन इंफ्रा तैयार नहीं किया जा रहा है। अभी मोबाइल आॅपरेटर्स के बेस ट्रांसरिसीवर स्टेशन-बीटीएस अपेक्षाकृत बहुत कम हैं। इस बीटीएस के माध्यम से ही एक मोबाइल से दूसरे मोबाइल पर वॉयस या डेटा पहुंचता है। इससे नेटवर्क समस्या, कॉल ड्राप होने का सिलसिला बढ़ता है। अपेक्षित डेटा स्पीड नहीं मिलने से डेटा कॉल भी ड्रॉप हो रहे हैं। बीटीएस बढ़ाने से बैंडविथ बढ़ेगी। बैंडविथ जितनी ज्यादा होगी, इंटरनेट और वॉयस कनेक्टिविटी उतनी ही बेहतर होगी। इसके लिए व्यवस्था होनी चाहिए।
कॉल ड्रॉप पर पेनाल्टी का प्रावधान
ट्राई के अनुसार तकनीकी खामी के कारण दो प्रतिशत कॉल ड्राप को ट्राई ने छूट के दायरे में रखा है। लेकिन इससे ज्यादा होने पर पेनाल्टी का प्रावधान है। इस संबंध में मुख्यालय से निगरानी की जाती है। आॅपरेटर्स की सेवाओं में गड़बड़ी पाई जाने पर कार्रवाई की जाती है।

