Monday, March 23, 2026
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दो साल में दो किमी निर्माण कार्य पूरा नहीं कर पाया ठेकेदार

  • खेड़ाखाल-डुंगरीपंथ मोटरमार्ग पर किया जा रहा घटिया कार्य
  • स्कबर, पुश्ते के निर्माण में किया जा रहा मिट्टी का प्रयोग
  • डंपिंग जोन के बजाय ग्रामीणों के खेतों में डाली जा मिट्टी

जनवाणी संवाददाता |

देहरादून: बच्छणस्यूं पट्टी को जोड़ने वाला खेड़ाखाल-डुंगरीपंथ मोटरमार्ग पर घटिया कार्य चलने से ग्रामीणों में आक्रोश बना हुआ है। आलम यह है कि मार्ग पर लगाये जा रहे पुश्तों और स्कबर में रेत, बजरी की जगह मिट्टी का प्रयोग हो रहा है, जबकि सड़क का चौड़ीकरण भी सही तरीके से नहीं किया जा रहा है।

मार्ग पर किये जा रहे कार्यो में कोई गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है और मोटरमार्ग की मिट्टी डंपिंग जोन में डालने के वजाय सीधे ग्रामीणों के खेतों में डाली जा रही है।

कोरोना महामारी के चलते घर लौटे प्रवासियों ने निर्माण कार्य को देखकर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि शहरी इलाकों में हो निर्माण कार्यो में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है, मगर ग्रामीण इलाकों में चल रहे निर्माण कार्य में धांधली की जा रही है। इसमें अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत साफ झलक रही है।

बता दें कि खेड़ाखाल-डुंगरीपंथ मोटरमार्ग का दो किमी का हिस्सा रुद्रप्रयाग जनपद में पड़ता है, जबकि बाकी का हिस्सा पौड़ी में हैं। यह दो किमी का हिस्सा वर्षो से विभागीय अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के कारण उबड़-खाबड़ था। यहां पर सफर करना किसी खतरे से खाली नहीं था।

ग्रामीणों की मांग पर लोनिवि डिवीजन श्रीनगर ने दो किमी हिस्से के सुधारीकरण को लेकर टेंडर निकाले और निर्माण कार्य शुरू करवाया, मगर दो साल बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। दो साल में दो किमी मोटरमार्ग पर निर्माण कार्य पूरा न होना, विभागीय ठेकेदार की हकीकत को बयां कर रहा है।

इन दिनों मोटरमार्ग पर स्कबर और पुश्तों का कार्य चल रहा है, जिसमें रेत और बजरी की जगह मिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है। मोटरमार्ग चौड़ीकरण से निकाली जा रही मिट्टी को पुश्तों में लगाया जा रहा है। ऐसे में यह पुश्ते कितने समय तक टिक पायेंगे, यह भी सवाल बना हुआ है।

इसके अलावा मोटरमार्ग चौड़ीकरण से निकाली जा रही मिट्टी को डपिंग जोन में डालने के वजाय ग्रामीणों के खेतों में फेंका जा रहा है। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अभियंताओं से की, मगर कोई कार्यवाही नहीं की। कोरोना महामारी के कारण विभिन्न राज्यों से अपने गांव लौटे प्रवासियों ने जब मोटरमार्ग का निर्माण कार्य देखा, तो उन्होंने कार्य की गुणवत्ता पर सवालियां निशान उठाने शुरू कर दिए।

प्रवासी अनिल सिंह, मनोज सिंह, हरेन्द्र नेगी ने कहा कि सरकार की योजनाओं का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। विभागीय अभियंताओं और ठेकेदार की मिलीभगत से निर्माण कार्य में गुणवत्ता का कोई भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। जहां एक ओर शहरी इलाकों में निर्माण कार्यो पर हर समय नजर रहती है, वहीं ग्रामीण इलाकों में चल रहे निर्माण कार्यो में अनदेखी की जाती है।

पुश्तों और स्कबर में रेत व बजरी की जगह मिट्टी का प्रयोग हो रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला लगा रहता है और ये पुश्ते कितनी बारिश झेल पायेंगे। उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने डंपिग जोन की आड़ में ग्रामीणों के खेतों को तबाह कर दिया है। ठेकेदार को किसी का डर नहीं है।

दुर्भाग्य है कि ग्रामीणों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इधर, मामले में जिलाधिकारी वंदना सिंह ने बताया कि मोटरमार्ग के निर्माण कार्य की जांच को लेकर एसडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई है।

इसमें दो तकनीकि एजेंसी के अधिकारियों को रखा गया है। कमेटी की ओर से मोटरमार्ग पर चल रहे निर्माण कार्यो की जांच की जायेगी और एक सप्ताह के भीतर आख्या प्रस्तुत की जायगी।

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