Friday, March 6, 2026
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मेडिकल में कोरोना संक्रमितों के इलाज पर मंडराया खतरा

  • ताबड़तोड़ समीक्षा फिर भी मेडिकल में किट और मास्क की किल्लत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना संक्रमितों के बेहतर इलाज व मौत के आंकड़ों पर नियंत्रण के नाम पर शासन प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के तमाम अफसर ताबड़तोड़ बैठकें तो कर रहे हैं, लेकिन इसका जमीन पर कितना असर दिखाई दे रहा है।

इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेडिकल अस्पताल जहां कोरोना संक्रमित मरीजों की सबसे ज्यादा संख्या है, वहां पीपीई किट व मास्क की किल्लत हो गयी है।

कोरोना आइसोलशन वार्ड खासतौर से हाईरिस्क जोन में ड्यूटी करने वाले डाक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ के लिए पीपीई किट व एन-95 मास्क की जबरदस्त किल्लत हो गयी है। इस बात की पुष्टि खुद मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने की है। उन्होंने बताया कि मेडिकल के स्टोर में फिलहाल पीपीई किट व एन-95 मास्क का स्टाक खत्म हो चुका है।

कोरोना आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करने वाले स्टाफ के लिए क्लीनिकली इंस्ट्रूमेंट का बामुश्किल इंतजाम किया जा रहा है। सामान की भले ही किल्लत हो रही हो, लेकिन आइसोलेशन वार्ड का काम किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दिया गया है। सामान की किल्लत की जानकारी विभाग के आला अधिकारियों को भी दी गयी है।

कोविड आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करने वालों के लिए पीपीई किट व मास्क के अलावा ग्लब्ज, फेस शील्ड, हैंड कवर, शूज आदि की भी जरूरत होती है। कोविड आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करने वाले मरीजों के लिए सामान का संकट मेडिकल में कोई पहली बार नहीं हो रहा है।

इससे पूर्व भी कई बार मेडिकल प्रशासन को इस प्रकार के हालात का सामना करना पड़ा है। कोरोना संक्रमण काल शुरू होने के दौरान भी संक्रमितों का इलाज करने वाले मेडिकल स्टाफ को पीपीई किट व अन्य सामान की किल्लत से जुझना पड़ा था। इसको लेकर कई बार जूनियर डाक्टरों ने तत्कालीन प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता के समक्ष नाराजगी भी जतायी थी।

मेडिकल कर्मचारियों ने नाम न छापे जाने की शर्त पर बताया कि कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करने वाले मेडिकल स्टाफ के लिए क्लीनिकल इंस्ट्रूमेंट की कमी का मामला अकेला मेरठ मेडिकल का ही नहीं है। प्रदेश के अन्य मेडिकल अस्पतालों में तो इससे भी बुरे हालात हैं।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि ताबड़तोड़ समीक्षाएं की जा रही हैं। सीएम खुद समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन आइसोलेशन वार्ड में किन हालातों में मेडिकल स्टाफ को ड्यूटी करनी पड़ रही है, इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहा है। यदि कोरोना वॉरियर्स की जिंदगी से इस प्रकार से खिलवाड़ किया जाएगा तो फिर संक्रमितों का इलाज कैसे होगा। मौत का आंकड़ा कम करने का दम भरने वाले अफसर बताएं कि कैसे वह संभव कर पाएंगे।

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