- इमरजेंसी में हर समय सक्रिय रहते हैं बाहरी पैथलैब के दलाल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लाला लाजपत रॉय मेडिकल कॉलेज में ज्यादातर वह मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं जो या तो मध्यम वर्ग या गरीब परिवारों से होते है। यहां पर सरकार द्वारा मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं को इन मरीजों तक पहुंचानें की जिम्मेदारी मेडिकल प्रशासन की है। लेकिन मेडिकल की इमरजेंसी में इलाज के बदले भ्रष्ठाचार फैला है, निजी पैथलैबों के दलाल हर समय यहां मरीजों के सैंपल लेने के लिए मैजूद रहते है,

वहीं यहां पर एक भी सरकारी एंबुलेंस की तैनाती है। ऐसे में मरीजों को दिल्ली ले जानें के लिए निजी एंबुलेंस के चालकों के नंबर दीवार पर लिखे गए हैं। उधर, शनिवार को सीएमओ के नेतृत्व में मेडिकल कॉलेज के आसपास स्थित पैथलैबों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इन्हीं में से एक गुडविल पैथलैब का कर्मचारी इमरजेंसी में खड़ा हुआ जनवाणी के कैमरे में कैद हुआ।
अच्छा व सस्ता इलाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा मेरठ में मेडिकल कॉलेज बनाया गया है। इसमें अलीगढ़, बुलंदशहर, हापुड़, गाजियाबाद, पिलखुआ, गढ़मुक्तेश्वर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बागपत समेत मेरठ से ही बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं।
इन मरीजों में वह मरीज जो किसी हादसें का शिकार हो या जिनको आपातकालीन चिकित्सा सेवा की जरूरत पड़ती है, उन्हें इमरजेंसी में लाया जाता है। इमरजेंसी में मरीज को तुरंत इलाज देने के लिए मेडिकल कॉलेज के जूनियर डाक्टर हर समय तैयार रहते हैं, लेकिन मरीजों को इलाज के दौरान यदि टेस्ट की जरूरत पड़े तो उसके लिए यहां बाहरी पैथलैब के दलाल हर समय सक्रिय पाए जाते हैं।
इमरजेंसी में नहीं है सरकारी एंबुलेंस की सुविधा
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में सरकारी एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। अगर किसी मरीज की हालत बिगड़ती है और उसे इलाज के लिए दिल्ली ले जाने की नौबत आती है तो मरीज को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है। मेडिकल की इमरजेंसी में निजी एंबुलेंस लेने के लिए बाकायदा नंबरों को कागज पर लिखकर दीवारों पर चस्पा किया गया है।

निजी एंबुलेंस के चालकों द्वारा मरीजों के तीमादारों से मोटी रकम वसूली जाती है। ऐसे में अपने मरीज की जिंदगी बचाने के लिए परिजन कहीं न कहीं से पैसे का इंतजाम करते हैं और निजी एंबुलेंस की सेवा लेने को मजबूर होते हैं।
डाक्टरों द्वारा दलालों से जांच का बनाया जाता है दबाव
इमरजेंसी का दौरा करने पर यह बात सामने आई कि यदि किसी मरीज की कोई भी जांच होनी होती है तो मेडिकल के जूनियर डॉक्टर वहां मौजूद दलालों से जांच करानें का दबाव मरीज के तीमारदारों पर बनाते हैं। मेडिकल कॉलेज में जांच की सुविधा होने के बाद भी कहा जाता है कि बाहर से जांच कराओगे तो उसकी रिपोर्ट जल्दी मिल जाती है। मेडिकल में जांच कराने की रिपोर्ट आने में समय लगता है। यह भी पता चला है कि जो दलाल मेडिकल की इमरजेंसी में सक्रिय रहते हैं, वह जांच के सैंपल लेने के लिए जूनियर डॉक्टरों की हर तरह से सेवा करते हैं। इसी कारण डाक्टर बाहरी लैब से जांच करानें का दबाव बनाते हैं।
किन मरीजों को पड़ती है टेस्ट की जरूरत
हादसे में घायल मरीज को यदि खून की जरूरत पड़ती है तो उसका ब्लड टेस्ट होता है। साथ ही डिलीवरी या दूसरी बीमारियों के इजाज से पहले भी मरीज के खून समेत अन्य तरह की जांच की जाती है। इसके लिए मेडिकल में पैथलैब है बावजूद इसके यहां पर बाहरी पैथलैब के दलाल हर समय सक्रिय रहते हैं। यह दलाल मरीजों की किसी भी जांच के लिए तीमारदारों से मोटी रकम वसूलते हैं। यह दलाल 24 घंटों में तीन बार अपनी शिफ्ट में आते हैं। इमरजेंसी के कमरा नंबर 15 में मरीजों की जांच होती है, उसके दरवाजे पर यह दलाल मौजूद रहते हैं।

