Wednesday, October 27, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsSaharanpurसंपर्क मार्गों पर भी टोल कंपनी के लठैत कर रहे दबंगई

संपर्क मार्गों पर भी टोल कंपनी के लठैत कर रहे दबंगई

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  • स्टेट हाईवे 59 पर हो रही है टोल के नाम पर खुली लूट
  • संपर्क मार्गों पर भी लगा दिए गए हैं अवैध रूप से टोल बैरियर

जनवाणी संवाददाता |

सहारनपुर/ देवबंद:  स्टेट हाईवे-59 के जनपद सहारनपुर और मुजफ्फरनगर की सीमा पर बनाए गए टोल प्लाजा पर जमकर गुंडई हो रही है। हाईवे निर्माण करने वाली कम्पनी बेतहाशा टोल टैक्स वसूल रही है। हद तो ये है कि टोल के निकट गांवों से निकलने वाले रास्ते पर भी बैरियर लगा दिया गया है। कंपनी के लठैत यहां भी वसूली कर रहे हैं।

ऐसे में दूर-दराज से आने वाले वाहन चालकों को परेशान किया जाता है। अगर वह संपर्क मार्ग से भी निकल रहे होते हैं तो भी उनसे जबरन वसूली की जाती है। इससे शासन की छवि खराब हो रही है। इसको लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। इस मुद्दे पर जल्द ही ग्रामीण आंदोलन कर सकते हैं।

बता दें कि जनपद मुजफ्फरनगर के स्वामी कल्याणदेव राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज (रामपुर तिराहे) से जनपद सहारनपुर के गागलहेड़ी स्थित ज्योतिबाफूले चौक तक की सड़क को उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण के साथ मिलकर देवबंद हाईवे प्राइवेट लिमिटेड ने करोड़ों के बजट से फोरलेन किया है।

पीपी माडल में बनाए गए उक्त स्टेट हाइवे में लखनऊ के एपको ग्रुप की सहभागिता है। देवबंद हाइवे प्राईवेट लिमिटेड कंपनी एपको से ही जुड़ी हुई है। स्टेट हाइवे 59 पर फोरलेन निर्माण होने से सड़क पर सफर आसान तो हुआ है लेकिन, जनपद सहारनपुर-मुजफ्फरनगर सीमा पर बनाए गए टोल प्लाजा पर बेतहाशा टोल टैक्स वसूली की जा रही है। इससे हर कोई हलकान है।

टोल पर मनमाने तरीके से टैक्स वसूली से राहगीरों को मुश्किलों से दो-चार होना पड़ता है। यहां आए दिन झगड़े होते हैं। बता दें कि टोल के आसपास गांव के रास्ते होकर हाईवे पर निकलने वाले संपर्क मार्गों पर भी इन दिनों कंपनी ने टोल बैरियर लगा दिए हैं। यही नहीं यहां पर हर समय कंपनी के लठैत तैयार खड़े रहते हैं।

यदि कोई गांव के संपर्क मार्ग से निकलता है तो उससे भी जबरन वसूली की जाती है। न देने पर उसे वापस जाने को मजबूर किया जाता है। ऐसे में आसपास क्षेत्र के लोग और दूसरी जगहों से इस मार्ग से आने वाले अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लेकिन हैरत की बात यह है कि सबकुछ देखने और जानने के बावजूद प्रशासन इस ओर से आंखें मूंदे हुए है। इसका खामिया जनता को भुगतना पड़ रहा है।

करार के आधार पर 23 सालों तक कंपनी वसूलेगी टोल

मार्च 2016 में शुरू हुआ हाइवे निर्माण कार्य पूरा होने में करीब 27 महीनों का समय लगा था। तत्कालीन अखिलेश सरकार में इस राज्यमार्ग को मंजूरी मिली थी। और वर्तमान योगी सरकार की कैबिनेट ने फोर लेन हाइवे पर टोल टैक्स वसूली को 12 जून 2019 को मंजूरी दी थी।

प्रदेश सरकार की कैबिनेट की मंजूरी के बाद मुजफ्फरनगर-सहारनपुर स्टेट हाइवे-59 पर जिले के रोहाना खुर्द में बनाए गए टोल प्लाजा पर टोल टैक्स वसूली का कार्य शुरू हो गया था। प्रदेश सरकार से हुए करार के आधार पर निर्माणकर्ता एपको कंपनी 23 सालों तक इस स्टेट हाइवे पर टोल टैक्स वसूल करेगी। जैसी अंधेरगर्दी मची है उससे तो यही लगता है कि कंपनी तो मालामाल हो जाएगी किंतु आम-अवाम की जेब पर इसी तरह डाका पड़ता रहेगा।

हाइवे के पूर्ण निर्माण से पहले ही हो गया था टैक्स वसूलना शुरू

स्टेट हाइवे 59 के पूर्ण निर्माण से पूर्व ही टैक्स वसूलना शुरू हो गया था। टोल से कुछ ही किमी दूर जनपद मुजफ्फरनगर के रोहाना में मानकों के अनुरूप पुल निर्माण न होने से नाराज लोगों ने पुल निर्माण का कार्य बीच में ही रुकवा दिया था। इसके चलते वाहनों को अधूरे पुल के नीचे संकरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता था। इतना ही नहीं देवबंद आबादी क्षेत्र में भी सर्विस रोड का निर्माण पूरी तरह नहीं हुआ था। इतना ही नहीं देवबंद में बनाए गए 4 किमी लम्बे पुल के नीचे आज तक भी मानकों के अनुरूप निर्माण नहीं हो सका है। लेकिन इस सबके बावजूद कम्पनी बेरोक टोक टोल वसूल रही है।

टोल के रूप में वसूली जा रही है यह रकम

स्टेट हाईवे 59 पर सहारनपुर व मुजफ्फरनगर की सीमा पर बने भगवे रंग के टोल प्लाजा पर कम्पनी द्वारा चार पहिया छोटे वाहन जैसे कार-जीप आदि के लिए 120 रुपये, मिनी बस के लिए 180 रुपये, बस व ट्रक के लिए 350 रुपये टोल निर्धारित कर चुकी है। यह टोल मात्र एक ओर की यात्रा के लिए है। अगर आप दोनों ओर का टोल एक साथ देना चाहते हैं तो इसमें आपको छूट मिलेगी लेकिन यह केवल 24 घंटों के भीतर वापस लौटने पर ही मान्य होगा। फिलहाल, कंपनी की गुंडागर्दी से हर कोई हलकान है। इस संबंध में जिलाधिकारी अखिलेश सिंह का कहना है कि अगर ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी और उचित कार्रवाई होगी। फिलहाल, कंपनी के लठैत जबरन वसूली कर रहे हैं। इस पर अभी तक रोक नहीं लग सकी है।

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