- एमडी के आदेश के बावजूद बदहाल स्थिति की बसों को भेजा जा रहा है रूट पर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कानपुर से लाकर महानगर क्षेत्र में चलाई जा रही जर्जर सीएनजी बस आए दिन ब्रेक डाउन का शिकार हो रही हैं। सीएनजी बसों की टूटी-फूटी सीटों के साथ-साथ गलकर टूट चुके फर्श के चलते यात्रियों को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन बसों के मेंटीनेंस और चालक के नाम पर संबंधित कंपनी को तीन लाख रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है, इसके बावजूद बसों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है।
महानगर में कानपुर से भेजी गई एक दशक से अधिक पुरानी अधिकतर सीएनजी बसों के रखरखाव का कार्य श्यामा-श्याम कंपनी करती है। कंपनी बसों के मेंटीनेंस के साथ-साथ बसों को चलाने के लिए चालक भी उपलब्ध कराती है। जिसकी एवज में नगरीय बस सेवा विभाग की ओर से 19.71 रुपये प्रति किमी दिए जाते हैं। औसतन 87-88 बसें प्रतिदिन 180 किलोमीटर चलती हैं, जबकि प्रतिदिन आठ बसों को मेंटीनेंस के नाम पर वर्कशॉप में रखा जाता है। यानि विभाग श्यामा-श्याम कंपनी को इन बसों के रखरखाव और चालक के लिए प्रतिदिन तीन लाख रुपये का भुगतान करता चला आ रहा है।

इसके बावजूद बसों की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। बसों में सफर करने वाले लोगों के कपड़े फटी हुई बाडी की चादरों में उलझकर फट जाते हैं। नगर बस सेवा विभाग की ओर से एक फोरमैन की ड्यूटी वर्कशॉप पर लगाई जाती है। जिसमें फोरमैन का काम बसों का निरीक्षण करने के उपरांत ही उन्हें मार्ग पर भेजने का होता है। लेकिन यह काम सिर्फ कागजों में हो जाता है। दो दिन पहले ही प्रभारी एमडी/आरएम मेरठ रीजन संदीप कुमार नायक ने एआरएम वित्त मुकेश अग्रवाल को भेजकर निरीक्षण कराते हुए एक आदेश जारी किया था। जिसमें सभी खराब सीटों को बदलवाने और बदहाल बसों को रूट पर न भेजने को कहा गया था। इसके बावजूद संचालन से जुड़े अधिकारियों ने उनके आदेश की कोई परवाह नहीं की।
शाम होते ही मार्गों से गायब हो जाती हैं बसें
बेगमपुल से सरधना मार्ग पर संचालित होने वाली इलेक्ट्रिक, सीएनजी और वोल्वो बसें शाम के छह बजे तक रूट से गायब हो जाती हैं। इसके बाद प्राइवेट बसें ही मार्ग पर चलती हुई देखी जाती हैं। शाम के समय अपने-अपने घरों को जाने वाले दैनिक यात्रियों के समक्ष ट्रांसपोर्ट का संकट पैदा हो जाता है।
10 साल पूरा करने वाली बसें भेजी गर्इं रीजन से बाहर
10 साल पूरे कर चुकी बसों को एनसीआर से बाहर भेजने की प्रक्रिया के अंतर्गत बीएस-3 मॉडल की 36 बसों को अन्य परिक्षेत्र में भेज दिया गया है। अब मेरठ परिक्षेत्र में बीएस-6 नए मॉडल की बसों की संख्या 251 हो गई है। सेवा प्रबंधक मेरठ परिक्षेत्र लोकेश राजपूत ने बताया कि पांचों डिपो में निगम की 572 बसें संचालित हैं, इनमें से अब तक 251 नए बीएस-6 मॉडल की हो गई हैं।
जिनमें से अधिकतर का संचालन एनसीआर में किया जा रहा है। जबकि 10 वर्ष की अवधि पूरा करने वाली बीएस-3 और बीएस-4 मॉडल की बसों को एनसीआर से बाहर स्थित दूसरे रीजन में भेजने की प्रक्रिया जारी है। जहां डीजल से चलने वाली बसों के लिए 15 वर्ष की अवधि निर्धारित है। 10 वर्ष पूरे कर चुकी बसों को अन्य क्षेत्रों में भेजने के संबंध में मुख्यालय स्तर से स्वीकृति मिल गई है।

