- व्यापारियों ने की भूख हड़ताल, एडीएम एलए और आरआरटीएस पर मनमानी करने का आरोप
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: देश की पहली रैपिड रेल के लिए दिल्ली रोड पर दुकानों के अधिग्रहण कर उचित मुआवजा व दुकानें किश्तों पर न देने के विरोध में वहां के व्यापारियों ने दुकानें बंद करके भूख हड़ताल की। उन्होंने एडीएम एलए और आरआरटीएस के अधिकारियों पर मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने उचित मुआवजा देने और किश्तों पर दुकानें अलाट करने की मांग की। रैपिड रेल के लिए दिल्ली रोड पर बहादुर मोटर्स से लेकर जगदीश मंडप तक करीब 65 दुकानों का अधिग्रहण किया गया जाना है। इस संबंध में एडीएम एलए और आरआरटीएस द्वारा पिछले डेढ़ वर्ष से आपत्तियां मांगी गर्इं।
भूस्वामियों ने आपत्तियां दर्ज कराई, पर उन्हें कोई संतोषजनक जवाब या आश्वासन नहीं मिला। रविवार को बहादुर मोटर्स के सामने के कुछ दुकानदारों ने दुकानें बंद करके भूख हड़ताल की। उन्होंने जिला प्रशासन व आरआरटीएस के खिलाफ नारेबाजी की। भूख हड़ताल पर बैठने वाले हरबंस सिंह, अरुण कुमार, अनिल गर्ग, दिनेश और अजय कुमार का कहना है कि वे पिछले 60-70 वर्षोंे से यहां दुकानें चलाते आ रहे हैं। उनकी पूरी दुकानों का अधिग्रहण किया जा रहा है। उनकी दुकान का क्षेत्रफल बेहद कम दर्शाया जा रहा है।
उनकी दुकानों की बाजारी कीमत एक-एक करोड़ से अधिक है, पर उन्हें पुराने सर्किल रेट से मुआवजा देने और कहीं भी किश्तों को दुकान नहीं दी जा रही। वे बर्बाद हो जाएंगे। उन्होंने मांग की कि उन्हें कमर्शियल नए सर्किल रेट पर मुआवजा दिया जाए। उन्हें किश्तों पर दुकान अलाट करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे।
मर जाएंगे, नहीं चलने देंगे बुलडोजर
दिल्ली रोड पर भूख हड़ताल पर बैठे व्यापारियों ने चेतावनी दी कि वे मर जाएंगे, लेकिन अपने दुकान पर तब तक बुलडोजर नहीं चलने देंगे, जब तक उन्हें नए सर्किल रेट पर कमर्शियल श्रेणी में मुआवजा नहीं मिलेगा। यदि उन्हें उचित मुआवजा देने से पहले वहां बुलडोजर भेजा गया तो वे बुलडोजर के आगे लेटकर अपनी जान दे देंगे।
भाजपा नेताओं, सांसद पर सुनवाई न करने का आरोप
भूख हड़ताल पर बैठे व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने भाजपा के नेताओं और राज्यसभा सांसद डा. लक्ष्मीकांत वाजपेई तक से गुहार की, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की। वे भाजपा के पक्के वोटर हैं, पर भाजपा नेता उनकी पीड़ा को समझने को तैयार नहीं। वे इस मामले को मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के समक्ष उठाएंगे।

