- संस्था के प्रधानाचार्य का रुझान देख मुस्लिमों में कानाफूसी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हर चुनाव में भले ही देवबंद ‘चुनावी अपीलों’ से परहेज करता हो लेकिन कोई चुनाव ऐसा होता भी नहीं जिसमें देवबंद का जिक्र न हो। कई नेताओं की हसरतें जो यहां पलती हैं। एक समय था कि जब देवबंद की अपीलों का असर राजनीतिक हलकों में होता था। कई पॉलिटिकल पार्टियों के सर्वेसर्वा देवबंद आकर यहां के उलेमाओं का हाथ अपने सिरों पर रखवाते थे। उसके बाद यह फोटो कभी अखबारों तो कभी पोस्टरों के जरिए वायरल होते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। वर्तमान हालातों को देखते हुए देवबंद ने अपना रुख बदल लिया, उसने राजनीतिक अपीलों से किनारा कर लिया।
इसके अलावा उसने अपने यहां नेताओं के आगमन को भी प्रतिबंधित कर दिया। इस बार का यदि विश्लेषण करें तो संस्था के प्रधानाचार्य व जमीयत उलेमा ए हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के रुख से मुस्लिमों में जरुर कानाफूसी शुरु हो गई है। दरअसल सोशल मीडिया पर अपलोड हुर्इं उनकी कई वीडियो में उनके बयानों के आधार पर उनका रुझान इंडिया गठबंधन की ओर देख मुसलमानों में भी चर्चाओं का दौर गर्म है। चर्चा यहां यह हो रही है कि जब मुस्लिमों के सबसे बड़े संगठनों में से एक जमीयत उलेमा ए हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी अपनी स्पीच में एनडीए गठबंधन की नीतियों की मुखालफत और इंडिया गठबंधन की हिमायत करते दिख रहे हैं
तो उससे यही निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि कहीं न कहीं देवबंद का मौन समर्थन इंडिया गठबंधन के प्रत्याशियों के साथ है। अब भले ही देवबंद ने लोकसभा चुनावों को लेकर एक बार फिर से किसी भी राजनीतिक दल को समर्थन संबधी अपील से किनारा कर लिया हो लेकिन देवबंदी बातचीत की चाल ढाल को देख अधिकतर मुसलमान यही अंदाजा लगा रहे हैं कि देवबंद की सोच में कहीं न कहीं इंडिया गठबंधन की तस्वीर उभर रही है।

