Thursday, March 19, 2026
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याकूब के ‘मील के पत्थर’ तक पहुंचने में नाकाम रहे देवव्रत

  • मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर जमानत भी नहीं बचा पाए बसपा प्रत्याशी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर इस बार चुनाव में भाजपा और इंडिया गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर रही, लेकिन चुनाव में बसपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। बसपा प्रत्याशी देवव्रत त्यागी 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बसपा प्रत्याशी हाजी याकूब ने वोट हासिल कर जो मील का पत्थर गढ़ा था, उस तक पहुंचने में नाकाम रहे। इतना ही नहीं वह जमानत भी बचाने में कामयाब नहीं हो पाए।

मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर एनडीए गठबंधन की ओर से भाजपा ने अरुण गोविल को चुनावी अखाड़े में उतारा था। वहीं, इंडिया गठबंधन की ओर से सपा के सिंबल पर हस्तिनापुर के पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी और पूर्व मेयर सुनीता वर्मा को चुनावी मैदान में उतारा था। वहीं, दूसरी ओर बसपा ने इस सीट पर दवा कारोबारी देवव्रत त्यागी को चुनावी रण में उतारा था। अरुण गोविल ने राजनीति में अभी कदम रखा, इसी तरह देवव्रत त्यागी भी लोकसभा चुनाव में पहली बार किस्मत आजमाई। इन प्रत्याशियों सुनीता वर्मा मंझी हुई खिलाड़ी रहीं।

वह मेयर के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को पटखनी दे चुकी थीं। उनके पति भी हस्तिनापुर सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे थे। सुनीता वर्मा दलित समाज से हैं। मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र में मेरठ शहर, मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण, किठौर और हापुड़ विधानसभा का क्षेत्र है। इस सीट पर दलित मुस्लिम गठजोड़ जीत का मजबूत आधार माना जाता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर हाजी याकूब कुरैशी ने 5,81,455 वोट हासिल की। इस सीट पर बसपा को पहली बार इतनी वोट मिली थी।

हालांकि भाजपा के राजेन्द्र अग्रवाल ने 5,86,184 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। याकूब मात्र 4229 वोटों से हार गए थे। जबकि इस सीट पर 2014 में बसपा ने पूर्व सांसद व पूर्व मेयर हाजी शाहिद अखलाक को चुनाव मैदान में उतारा था। तब शाहिद अखलाक को कुल 3,00, 655 वोट मिली थीं, जबकि भाजपा प्रत्याशी राजेन्द्र अग्रवाल ने 5,32,981 वोट हासिल कर शाहिद अखलाक को करीब दो लाख 32 हजार वोटों से हराया था।

तब बसपा को इस सीट पर करारी हार मिली थी। इस बार बसपा ने मेरठ-हापुड़ सीट पर देवव्रत को उतारकर दलित मुस्लिम के साथ-साथ त्यागी समाज का नया समीकरण बनाने की कोशिश की। इसकी वजह थी, त्यागी समाज का भाजपा से नाराज होना। बसपा त्यागी की नाराजगी को कैश करके अपने पक्ष में लाना चाहती थी। हालांकि त्यागी समाज के हजारों लोगों ने देवव्रत त्यागी के पक्ष में मतदान किया,

लेकिन चुनावी नतीजे बता रहे हैं कि त्यागी समाज के अधिकांश मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में ही वोट डाले। देवव्रत त्यागी को मात्र 86,693 वोट मिले। इस तरह देवव्रत त्यागी 2019 के लोकसभा चुनाव में मेरठ-हापुड़ सीट पर हाजी याकूब द्वारा हासिल की गर्इं वोटों के आंकड़े को पाना तो दूर अपनी जमानत भी बचाने में कामयाब नहीं हो पाए।

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