Wednesday, February 28, 2024
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वित्तमंत्री के लिए मुश्किल कदम

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ATVIR SINGHबढ़ता राजकोषीय घाटा, तेज होती मुद्रास्फीति और कम होती ग्रामीण खपत की चिंताओं के साथ, सीतारमण का चुनाव पूर्व अंतरिम बजट आर्थिक मानदंडों की कसौटी पर एक कठिन कदम होगा। लेकिन केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार चुनाव पूर्व बजट प्रस्तुत करने के अवसर को व्यर्थ नहीं जाने देगी। अंतरिम बजट 2019 में, तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने छोटे और सीमांत किसानों को सुनिश्चित आय सहायता प्रदान करने के लिए प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की घोषणा की थी। योजना के तहत, दो हेक्टेयर तक खेती योग्य भूमि वाले कमजोर भूमिधारक किसान परिवारों को 6000 रुपये प्रतिवर्ष की दर से प्रत्यक्ष आय सहायता प्रदान की गई थी। यह आय सहायता सीधे लाभार्थी किसानों के बैंक खातों में 2000 रुपये की तीन समान किस्तों में हस्तांतरित की जानी थी। यह योजना, जिसमें 75,000 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय शामिल था, दिसंबर 2018 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू की गई थी और 31 मार्च, 2019 तक की अवधि के लिए पहली किस्त का भुगतान वित्तीय वर्ष 19 के दौरान किया गया था। जिसके बारे में कई लोगों का मानना था कि इससे 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की संभावनाओं को काफी मदद मिली थी। आगामी बजट में इसी तरह की योजना से इंकार नहीं किया जा सकता है, खासकर ग्रामीण खपत में गिरावट को देखते हुए ऐसी योजना को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, पर्स की डोर ढीली करने के सीतारमण के फैसले का मुद्रास्फीति पर भी असर पड़ेगा, खासकर खाद्य मुद्रास्फीति, जो नवंबर में स्थिर हो गई थी, लेकिन दिसम्बर में फिर आंखें दिखाने लगी और अभी चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार को मेगा लोकलुभावन योजनाओं के मुद्रास्फीति प्रभाव पर नजर रखनी होगी और साथ ही ग्रामीण उपभोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी विचार करना होगा। खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के कारण भारत की खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर में बढ़ने के बावजूद लगातार चौथे महीने भारतीय रिजर्व बैंक के लक्ष्य सीमा के भीतर बनी रही। खाद्य पदार्थों की कीमतें, जो मुद्रास्फीति की टोकरी का लगभग आधा हिस्सा हैं, नवंबर में बढ़ीं और पिछले महीने ऊंची बनी रहीं, जिसका मुख्य कारण सब्जियों की कीमतें और घरेलू खाद्य पदार्थ थे।

विश्लेषकों ने कहा है कि दिसंबर तिमाही में शहरी विकास के मुकाबले गांवों में दैनिक किराने का सामान, और व्यक्तिगत एवं घरेलू उत्पादों की मांग में गिरावट जारी रही। एक साल पहले से, मुद्रास्फीति और अनियमित मानसून के कारण ग्रामीण क्षेत्र की खपत में उल्लेखनीय गिरावट आई है। आय पिरामिड के निचले स्तर के लोगों का वेतन उसी गति से नहीं बढ़ रहा है, जिस गति से संगठित क्षेत्र के लोगों या ऊपरी स्तर के लोगों का बढ़ रहा है। सीतारमण अंतरिम बजट में उपभोग पिरामिड के निचले स्तर पर मौजूद लोगों के हाथों में नकदी पहुंचाने वाली योजनाओं की घोषणा करके ग्रामीण क्षेत्रों में खपत को बढ़ावा देने के उपाय कर सकती हैं।

रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने कहा है कि उच्च राजस्व व्यय और नॉमिनल जीडीपी के बजटीय अनुमान से कम रहने के कारण वित्त वर्ष 2024 में भारत का राजकोषीय घाटा सरकार के लक्ष्य 5.9 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है। हालांकि इसमें कहा गया है कि उच्च कर और गैर-कर राजस्व संग्रह से विनिवेश आय में कमी की भरपाई हो सकती है। अनुदान की संभावित दूसरी अनुपूरक मांग राजकोषीय गणना को बिगाड़ देगी, जिससे घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 6 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

बजट की बड़ी सुर्खी जो लगभग हर किसी का ध्यान खींचती है वह है कि देश ने आयकर के साथ क्या किया है। आगामी अंतरिम बजट में बदलावों की घोषणा, यदि कोई हो, भी किसी रोमांचक घटना से कम नहीं होगी। भारतीय हर साल अधिक छूट और आयकर चुकाने में कटौती के रास्ते की आशा रखते हैं, जबकि सरकार ने एक नई व्यवस्था जोड़ी है और छूट-रहित आयकर प्रणाली में जाने की इच्छुक है। आयकर विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में दिसंबर के मध्य तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में 20.66 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो 13.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इन संग्रहों में 6.95 लाख करोड़ रुपये का निगम कर और 6.73 लाख करोड़ रुपये का व्यक्तिगत आयकर (प्रतिभूति लेनदेन कर सहित) शामिल है। ये आंकड़े इस वित्तीय वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह के बजट अनुमान का 75 प्रतिशत दर्शाते हैं।

कर विशेषज्ञ बजट 2024 में धारा 80डी चिकित्सा बीमा प्रीमियम कटौती को व्यक्तियों के लिए 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 करने की मांग कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वे एक सुव्यवस्थित पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था और प्राथमिक आवासों या व्यावसायिक संपत्तियों पर गृह ऋण के लिए ब्याज पुनर्भुगतान कटौती में वृद्धि की भी वकालत कर रहे हैं। बजट में नई आयकर व्यवस्था को डिफॉल्ट विकल्प बनाने का प्रस्ताव किया गया है। नई आयकर व्यवस्था के तहत मूल छूट सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया गया। नई कर व्यवस्था में इनकम टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया गया।

नई कर व्यवस्था के तहत धारा 87ए के तहत छूट को मौजूदा आय स्तर 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया। इस प्रकार, नई आयकर व्यवस्था चुनने वाले 7 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों को कोई कर नहीं देना होगा। बजट 2023 में नई आयकर व्यवस्था के तहत टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया गया। 3 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। 3 लाख रुपये से अधिक और 6 लाख रुपये तक की आय पर 5 फीसदी टैक्स लगेगा। 6 लाख रुपये से अधिक और 9 लाख रुपये तक की आय पर 10 फीसदी की दर से आयकर लगता है। 9 लाख रुपये से अधिक और 12 लाख रुपये तक 15 फीसदी की दर से टैक्स लगता है। 12 लाख रुपये से अधिक और 15 लाख रुपये तक की आय पर 20 फीसदी की दर से टैक्स लगता है। जिन लोगों की कर योग्य आय 15 लाख रुपये से अधिक है, उनके लिए 30 प्रतिशत आयकर दर लागू है।

आगामी अंतरिम बजट में आयकर घोषणाएं अधिक महत्वपूर्ण होंगी, क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव हो रहे हैं, जहां नरेंद्र मोदी तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में वापसी करना चाहते हैं।


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