भई, विपक्ष वालों की ये बात ठीक नहीं है। राहुल गांधी ने जब से वोट चोरी का शोर मचाया है, जहां भी देखो भाई लोग वोट चोरी के लक्षण निकाल-निकाल कर ला रहे हैं। लेटेस्ट ये है कि खोजने वालों ने राजस्थान में उदयपुर में भी अब सैकड़ों वोटरों वाला एक घर खोज निकाला है। सैकड़ा भी एक-दो नहीं, पूरे आठ वाला यानी हजार से सिर्फ दो सैकड़ा कम। राहुल गांधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा में सत्तर-सत्तर, अस्सी-अस्सी वोटों वाले कुछ घर क्या खोज दिए, भाई लोगों का धड़का खुल गया। बिहार में तो भाइयों ने कच्ची मतदाता सूचियों तक को नहीं बख्शा। बेचारा चुनाव आयोग मिन्नतें करता ही रह गया कि कम से कम सूची को पक्का तो हो जाने दो। इस सूची पर कम से कम एक बार तो मोदी जी की पार्टी को जीत जाने दो। पर भाई लोगों ने कहीं दो सौ वोट वाला घर खोज निकाला, तो कहीं साढ़े तीन सौ वोट वाला घर। तेजस्वी यादव ने तो चुनाव आयोग को ऐसे घरों को जिला घोषित करने का ही सुझाव दे दिया। उसके बाद, मध्य प्रदेश में सैकड़ों वोटरों वाले हजारों घर खोज डाले। और वह भी चुनाव आयोग के मशीन से जांची जा सकने वाली वोटर लिस्ट दिए बिना ही। और अब ये उदयपुर का आठ सौ वोटर का घर। प्रियंका गांधी पूछ रही हैं-ये घर है या लाल किला।
वैसे लाल किले से याद आया। राजस्थान तो है ही हवेलियों, गढ़ियों, किलों का प्रदेश। झोंपड़ियों, झुग्गियों, छोटे-छोटे घरों का प्रदेश थोड़े ही है, जहां हर घर में दो-चार-छ: या बहुत हुआ तो आठ-दस लोग रहेंगे। राहुल गांधी टाइप इन अंगरेजी पढ़ों की यही प्राब्लम है। ये भारतीय यथार्थ को जानते ही नहीं हैं। जैसे किलों के प्रदेश की सचाई को। जैसे बड़े परिवारों की सचाई को। जैसे संयुक्त परिवार के आदर्श को। जैसे संयुक्त परिवार से भी ऊपर, पूरे के पूरे कुटुंबों के अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सचाई को। एक छोटे से घर में सैकड़ों वोटर हैं, तो इसका मतलब कोई फजीर्वाड़ा नहीं है। इसका मतलब है, प्राचीन संस्कृति और परंपरा की मजबूती। और अगर एक ही छत के नीचे रहने वाले ये सैकड़ों वोटर अलग-अलग जातियों के, अलग-अलग धर्मों के हों तब भी इसका मतलब कोई फर्जीवाड़ा नहीं है।
ऐसे ही राहुल गांधी ने महादेवपुरा में चार-पांच हजार, दो-दो, तीन-तीन, चार-चार जगह पर मतदान करने वाले वोटर क्या खोज लिए, भाइयों ने कहीं ज्यादा तो कहीं कम, कहीं धीरे-धीरे तो, कहीं तेजी से ऐसे डुप्लीकेट वोटर खोजने शुरू कर दिए हैं। महाराष्टÑ में दो चुनाव क्षेत्रों के उम्मीदवारों ने तो बाकायदा ऐसे दसियों हजार वोटर खोज निकाले हैं और धांधली का शोर मचा दिया है। इसमें धांधली खोजना तो और भी अन्याय है। ज्ञानेश कुमार गुप्ता के जवाब के बाद, यह शोर बंद हो जाना चाहिए। वैसे जब चुनाव आयोग ने तेजस्वी को नोटिस दिया था, तब तक कानूनन अपराध तो एक से ज्यादा जगह वोट अपना वोट बनवाना भी था। पर है यह हमारे जनतंत्र की ताकत और वोटरों के जोश का ही सबूत कि चाहे वोटर लिस्ट में नाम हो या वोट करना, लोग एक पर रुकना ही नहीं चाहते हैं; इंडियन दिल मांगे मोर!

