- नगर निगम अफसरों को फिर मिलेगा लूट का मौका, बेहद जीर्ण-शीर्ण हालात में हैं पूरे शहर की सड़कें
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पहले से ही लूट के लिए नगर निगम के अफसरों और बाबुओं को फिर से एक बड़ी लूट का मौका मिल रहा है। शहर की सड़कों को सुधरवाने के नाम पर निगम अफसरों को 23 करोड़ रुपये की भारी भरकम रकम मिल रही है। शहर की कौन-सी सड़कें सुधरेंगी और दिखावे के लिए उन पर कितनी रकम खर्च की जायेगी, किस अफसर और किस बाबू को कितना हिस्सा मिलेगा, इसकी जोड़-घटा का हिसाब लगाना शुरू हो गया है। संभावना है कि इसी वित्तीय वर्ष के समापन से पहले ही यह बजट ठिकाने लगा दिया जायेगा।

शहर की सड़कों के रखरखाव का बड़ा जिम्मा नगर निगम के पास है। वैसे तो शहर में सड़कों के निर्माण के लिए नगर निगम बोर्ड बनाया गया है। साथ ही सभी 90 पार्षदों को अलग से अपने वार्ड के अन्तर्गत आ रही सड़क को बनवाने के लिए प्रस्ताव देने का अधिकार है। इसके अलावा विधायक व सांसद निधि से भी सड़कों का रखरखाव व निर्माण किया जाता है। साथ ही अवस्थापना निधि व 14वें व 15वें वित्त से भी शहर की सड़कों को निर्माण कराने के लिए नगर निगम को भारी भरकम रकम दी जाती है।
सड़कों पर चलना मुश्किल
महानगर में टूटी सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। कई इलाकों की सड़कें बेहद खस्ताहाल है, जिनको न ही नगर निगम की ओर से ठीक कराया जा रहा है। यदि इन सड़कों को ठीक कराया भी जाता है तो सड़क बनने के लिए एक दिन भी नहीं गुजरता है कि सड़क टूटना शुरू हो जाती है। अभी कुछ दिन पूर्व ऐसा ही मामला माधवपुरम का सामने आ चुका था, जहां रात में सड़क बनाई गई और सुबह होते-होते वह सड़क पूरी तरह से उखड़ गई। खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नई सड़क के निर्माण के लिए मिलने वाली सड़क से किसका निर्माण और किसका विकास हो रहा है।
मुसीबतें झेल रही है जनता
शहर की किसी भी अंदरूनी और बाहरी सड़क का कमोबेश यही हाल है। जीर्ण-शीर्ण हो रही सड़कों पर जब जनता सवाल उठाना शुरू करती है तो फिर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालकर खुद उससे बचने का नाटक किया जाता है। शहर की राजनीतिक पार्टियों के अलावा आम जनता भी अधिकारियों से इन टूटी सड़कों की शिकायतें करती रहती है, लेकिन सड़कों पर निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाता है और यदि शुरू हो भी जाता है तो उस निर्माण की गुणवत्ता का आलम यह होता है कि निर्माण के दौरान ही सड़क से बजरी और तारकोल अलग हो जाता है।

मुसीबत बने हैं सड़कों के गड्ढे
खैर नगर बाजार में इन दिनों यातायात का भारी दबाव है। अहमद रोड के कछुआ गति से चल रहे सड़क चौड़ीकरण के कार्य के चलते दोपहिया और चार पहिया वाहन खैर नगर में आ तो जाता है, लेकिन यहां की टूटी सड़क और जाम से उसका जो सामना होता है तो वह फि दोबारा यहां आने से कान पकड़ लेता है। शहर में सड़कों पर पर बने गड्ढे जनता के लिए मुसीबत बन गए हैं।
पुलिस द्वारा जब भी अहमद रोड का रूट डायवर्ट किया जाता है तो बड़े छोटे वाहनों को खैर नगर बाजार से ही निकाला जाता है। टूटी सड़क की वजह से इस मार्ग पर हर समय धूल का गुबार उड़ता है। यहां के दुकानदारों का कहना है कि कई माह से अधिक समय से सड़क टूटी पड़ी है। पहले भी गड्ढे भरवाए गए थे, लेकिन एक माह बाद ही सड़क पहले जैसी हालत में पहुंच गई है।
बाकी सड़कों का भी हाल बुरा
घंटाघर से लाला का बाजार, नील गली, वैली बाजार, कबाड़ी बाजार और सर्राफा बाजार को जाने वाली सड़कों की हालत भी बेहद जीर्ण-शीर्ण है। इन मुख्य बाजारों की सड़कें कई जगह पर धंस गई और कई जगहों पर गड्ढे हैं। इस कारण इस मार्ग आए दिन ई-रिक्शाएं भी पलटते रहते हैं। इन क्षेत्रों के दुकानदारों का कहना है कि सड़कें टूटी पड़ी हैं, जिस कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं। एक माह पूर्व क्षेत्र के लोगों सड़क बनाए जाने की मांग नगर निगम के अधिकारियों से की थी, लेकिन कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया है।
सड़क सुधरवाने को मिलेंगे 23 करोड़
शहर की टूटी सड़कों की मरम्मत करने के लिए जनता के लिए यह बड़ी खुशखबरी है कि 23 करोड़ रुपये 15 वें वित्त वर्ष के लिए नगर निगम को दिये जा रहे हैं। इस भारी भरकम रकम से शहर में 28 सड़को के निर्माण का कार्य कराया जायेगा, लेकिन जनता को पहले ही यह समझ लेना होगा कि करोड़ों की इस भारी भरकम रकम से किसका निर्माण और किसका विकास होगा।
15वें वित्त से शहर की सड़कों के निर्माण के लिए जल्द ही टेंडर मांगे जायेंगे। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जायेगा। -हरिकांत अहलूवालिया, महापौर, नगर निगम, मेरठ

