- आइवरमैक्टिन के दाम हुए दोगुने, सरकार का दावा कोरोना हो रहा कम
ज्ञान प्रकाश |
मेरठ: हर कोई आपदा में अवसर खोजने में लगा हुआ है। एक तरफ सरकार कह रही है कि कोरोना का संक्रमण कम हो रहा है। वहीं, दूसरी तरफ कोरोना की दवा आइवरमैक्टिन धड़ल्ले से बिक रही है। दवा बनाने वाली एक कम्पनी ने तो एक महीने में ही दवा के दाम लगभग दोगुने कर दिए। हालात यह हो गए हैं कि होम आइसोलेशन वालों को प्रशासन इस दवा को फ्री में दे रहा है। इसके बाद भी सरकार का नियंत्रण न होने के कारण इस दवा को एमआरपी तक पर बेचा जा रहा है।
कोरोना का संक्रमण सरकारी कागजों में लगातार कम हो रहा है। 15 दिन तक रोज डेढ़ हजार से अधिक संक्रमण निकल रहे थे, जो घट कर चार सौ से कम हो गए है। सरकारी तंत्र न जाने क्यों कोरोना के संक्रमण और मौत के आंकड़े छुपाने में लगा हुआ है। जबकि हकीकत यह है कि शहर के लगभग हर मेडिकल स्टोरों में कोरोना की यह दवा खूब बिक रही है।
मेरठ में इस वक़्त 4600 पंजीकृत मेडिकल स्टोर है। इसके अलावा सैकड़ों बिना रजिस्ट्रेशन के मेडिकल स्टोर चल रहे है। इनमें 70 फीसदी स्टोरों में रोज कम से कम चार पांच लोग कोरोना की इस दवा का पांच दिन का कोर्स लेने आ रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि इस दवा की इतनी खफ्त क्यों हो रही है।
लोगो के भेड़ चाल के कारण ही आइवरमैक्टिन बनाने वाली एक कंपनी की दवा डिंजो-12 सितम्बर 2020 में 195 रुपये की बिक रही थी। इस कंपनी ने अक्टूबर में फिर यह दवा बाजार में उतारी तो इसका दाम 350 रुपये कर दिया। यही नहीं आइवर साल्ट बनाने वाली हर कंपनी ने दवा महंगी कर दी।
मोहिनी मेडिकल स्टोर के विकास गिरधर ने बताया कि आइवर लेने वाले कम नहीं हो रहे हैं। मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट असोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि कोरोना के लिए आइवरमैक्टिन खरीदने वाले कम नहीं हो रहे हैं। अभी बाजार में इस दवा की डिमांड कम नहीं हुई है। वहीं सरकार की तरफ से जो मेडिकल किट मरीजों को दी जा रही है उसके कारण भी खपत बढ़ी है।
सरकारी नियंत्रण न होने के कारण इन दवाओं के दाम आसमान पर पहुंच रहे हैं। औषधि नियंत्रक पवन शाक्य ने बताया कि कोरोना की दवाएं मार्केट में है और कमी नहीं है। शहर में 4600 मेडिकल स्टोर है और दवा की कमी नहीं है। हर मेडिकल स्टोर में रोज चार से पांच मरीज इस दवा को लेने आ रहे हैं।
सीएमओ के मुताबिक, आइवरमैक्टिन दवा कोरोना से बचने में मददगार है। होम आइसोलेशन में रहने वाले कोरोना पॉजिटिव मरीजों को तीन दिन तक रोजाना एक-एक टेबलेट लेनी चाहिए। जबकि प्राइमरी और सेकेंड्री कांटैक्ट को पहले दिन एक और सातवें दिन एक टेबलेट लेने की सलाद दी गई है। वहीं लोग कोरोना से बचने के लिये पांच दिन का कोर्स अपने परिवार के सदस्यों को करा रहे हैं।
अब 2500 में होगा सीटी स्कैन
डीएम के. बालाजी ने बताया कि कोविड संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के और लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए निजी चिकित्सालयों एवं निजी चिकित्सकों द्वारा रेडियों डायग्नोस्टिक सेंटरों को संदर्भित एचआर सीटी स्कैन की जांच करने की दर (पीपीई किट एवं सैनिटाइजेशन व अन्य व्यय सहित) शासन द्वारा निर्धारित कर दी गयी है।
उन्होंने बताया कि 16 स्लाइस तक रुपये 2,000 16 स्लाइस से 64 स्लाइस तक रुपये 2,250 तथा 64 स्लाइस से अधिक रुपये 2,500 निर्धारित किये गये हैं। उन्होंने बताया कि अपर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन चिकित्सा के कार्यालय पत्र द्वारा यह आदेश एपीडेमिक डिजीज ऐक्ट 1897 (यथा संशोधित) एवं उत्तर प्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं महामारी अधिनियम-2020 के संगत प्राविधानों के अंतर्गत जारी किया गया है। उक्त आदेशों का उल्लंघन एपीडेमिक डिजीज ऐक्ट 1897 (यथा संषोधित) एवं उत्तर प्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं महामारी अधिनियम-2020 की संगत धाराओं के अंतर्गत दंडनीय है।

