Friday, July 19, 2024
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चोकर खाएं, स्वस्थ रहें

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राजा तालुकदार |

बेकार की वस्तु समझकर फेंक दिया जानेवाला चोकर बड़े ही काम की चीज है। चोकर में अनेक विटामिन और पौष्टिक तत्व होते हैं। चोकर को आटे से निकालकर हम शरीर के लिए लाभदायक पौष्टिक तत्वों से वंचित हो जाते हैं। मोटा खाना और मोटा पहनना भारतीय जीवन शैली का मूल मंत्र रहा है। तभी तो हमारे पूर्वज दीघार्यु होते थे और लंबा स्वस्थ जीवन जीते थे। पाश्चात्य सभ्यता की चमक दमक से आकृष्ट होकर हम अपनी सभ्यता, संस्कृति और जीवन शैली को भूलने लगे हैं। हम अस्वस्थ और अल्पायु होने लगे हैं और तरह-तरह की बीमारियों का शिकार होने लगे हैं। आज हर व्यक्ति की पसंद बारीक पिसा और छना हुआ आटा है, क्योंकि ऐसे आटे की रोटी नरम और देखने में साफ-सुथरी होती है लेकिन बहुत कम लोगों का पता है कि ऐसे आटे से बनी रोटी कब्जकारक होती है।

आटे का चोकर अन्त:स्रावी ग्रंथियों के नैसर्गिक क्रिया कलाप में मदद करता है। चोकर युक्त रोटियों को चबाने में ज्यादा श्रम लगता है लेकिन इससे हमारी पाचन क्रिया में मदद मिलती है। चोकर के सेवन से जठराग्नि प्रदीप्त होती है। अपच आदि विकारों से छुटकारा मिलता है।

चोकर युक्त आटे में ‘विटामिन बी कांपलेक्स’ प्रचुर मात्र में होता है। जब गेहूं को पीसकर खूब बारीक आटा बना दिया जाता है, तब यह विटामिन नष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं।

चोकर प्रोटीन का भी बढ़िया स्रोत है। यदि चोकर को छानकर आटे से अलग कर दिया जाय तो आटा प्रोटीन से रहित हो जाता है। चोकर युक्त आटे से बनी रोटियां स्वादिष्ट तो होती ही है जीवनी शक्ति को भी बढ़ती है।

नवीन अनुसंधानों से ज्ञात हुआ है कि चोकर सहित आटे से बनी रोटियों का सेवन करने से पेप्टिक अल्सर नहीं होता। चोकर में मौजूद प्रोटीन ही पेप्टिक अल्सर से बचाव करता है।

चोकरयुक्त आटे से बनी रोटियां खाने से कब्ज से छुटकारा मिलता है।

मैदे के ज्यादा सेवन से दांतों को नुक्सान पहुंचता है वही चोकरयुक्त रोटियां खाने से दांतों व मसूढ़ों को लाभ मिलता है। बार-बार होने वाला जुकाम, सिर दर्द, भूख की कमी तथा दांतों से एनेमल हटना आदि का उपचार चोकर से हो सकता है।
चोकर मधुमेह के रोगियों के लिए काफी लाभदायक होता है। मैदे से बनी चीजों को खाने से डायबिटीज तथा हृदय रोगों से ग्रसित होने की संभावना होती है जब कि चोकरयुक्त रोटियों के लगातार कुछ दिन सेवन करने से इन रोगों का नाश होता है।

खाद्य पदार्थों को बहुत अधिक कूटने पीसने, तलने भूनने आदि से उनका स्वाद तो बढ़ जाता है लेकिन इन प्रक्रियाओं से उनके प्राकृतिक गुण खत्म हो जाते हैं। ऐसे खाद्य-पदार्थों के सेवन से शरीर का पूर्ण विकास नहीं हो पाता है।

चोकर में अल्सर पैदा करने वाले तत्त्वों को कमजोर करने की क्षमता होती है। इस तथ्य की पुष्टि वैज्ञानिकों ने भी की है। आहार पर अनुसंधान कर रहे यूनिवर्सिटी स्कूल आॅफ लंदन के सर्जरी विभाग के कंसल्टेंट फिजीशियन फैंक आई टोवे के शोध से स्पष्ट हो गया है कि गेहूं की रोटियां खाने वाले उत्तरी भारत के लोगों को दक्षिणी भारत के लोगों की तुलना में पेट का अल्सर कम होता है। ऐसा चोकर के कारण होता है क्योंकि चोकर में अल्सर पैदा करने वाले तत्वों को कमजोर करने क्षमता होती है।

चोकरयुक्त रोटियां खाने से चेहरे का फीकापन, चक्कर आना, सांस फूलना आदि परेशानियां दूर होती हैं।
प्रख्यात जर्मन प्राकृतिक चिकित्सक प्रोफेसर अर्नाल्ड इहरिट ने बतलाया है कि चोकरयुक्त आटे की रोटियां कम हानिकारक होती हैं क्योंकि उनका चिपकने वाला गुण नष्ट हो जाता है। मोटे पिसे तथा बिना छने आटे की रोटियां आंतों की पुरस्सरण गति को बढ़ा देती है जिससे कब्ज नहीं होता। इसलिए कब्ज के रोगियों के लिए चोकर युक्त आटे की रोटियां लाभदायक होती है। इस प्रकार हम देखते हैं कि बेकार समझकर फेंक दिया जाने वाला चोकर बड़े ही काम की चीज है।


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