तापमान का पारा प्राकृतिक रूप से बढ़ चला है। मैदानी भागों में ग्रीष्म की उष्णता ने अपना प्रभाव दिखाना आरंभ कर दिया है। बढ़ती ऊष्मा के प्रभाव में प्रत्येक व्यक्ति का शरीर, बाहर और अंदर की गर्मी के प्रति भिन्न भिन्न प्रकार से प्रतिक्रिया करता है। परंतु मनुष्य का शरीर एक एयर कंडीशनर की तरह काम करता है। जब तापमान बढ़ता है तो शरीर से पसीने के उत्सर्जन की क्रिया आरंभ हो जाती है।
यही पसीना शरीर की गर्मी का अवशोषण कर वाष्प में परिवर्तित होता है, जिसके कारण शरीर का तापमान कम हो जाता है। इस लिहाज से हमारा शरीर एक प्राकृतिक एयर कंडीशनर या कूलर की तरह काम करता है। परंतु कई बार विभिन्न कारणों से शरीर का यह एयर कंडीशनर ठीक से काम नहीं कर पाता और शरीर में अधिक ऊष्मा की स्थिति बन जाती है।
मनुष्य के शरीर का सामान्य तापमान लगभग 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है। जब शरीर बाहरी तापमान और शरीर के अंदर की स्थिति के बीच सामंजस्य नहीं बिठा पाता , इससे शरीर के तापमान में वृद्धि हो सकती है। जिसमे व्यक्ति का चिड़चिड़ा होना , चक्कर आना आदि जैसे लक्षण आ सकते हैं।
ऐसी स्थिति को हीट स्ट्रेस कहते हैं । हीट स्ट्रेस को हम कुछ सामान्य घरेलू और प्राकृतिक उपाय से संतुलित कर सकते हैं परंतु चिकित्सक की राय लिया जाना भी जरूरी है, क्योंकि कई बार शरीर में निर्जलीकरण के कारण भी हीट स्ट्रेस हो सकता है। इस स्थिति में तुरंत चिकित्सक की सहायता ली जानी चाहिए। मुख्यत: योग और उचित आहार प्रबंधन से कुछ हद तक हम शरीर की ऊष्मा को कम करके निर्जलीकरण को नियंत्रित कर सकते हैं जैसे:
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-पानी व अन्य तरल पदार्थों ( नारियल , नींबू पानी , सादा पानी) का सेवन शरीर को ठंडा रखने के साथ ही शरीर को निर्जलीकरण से बचाता है । शरीर को आंतरिक रूप से ठंडा रखने में सहायता करता है।
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-तीखे मसालेदार ,तेल के अत्यधिक सेवन से शरीर में बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न होती है।बहुत अधिक तले हुए खाद्य पदार्थ खाने से बचें। हल्के खाद्य पदार्थों का सेवन करें।गर्मियों के दौरान उबले हुए, ग्रिल्ड या स्टीम्ड प्रकार के व्यंजन पेट के लिए हल्के हो सकते हैं।
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-नहाने से तरोताजा और ठंडा महसूस करते हैं। जब कई बार नहाना संभव न हो, तो बस अपने पैरों को कुछ देर के लिए पानी में डुबोकर रखने से आरामदायक और सुखदायक अनुभव मिलता है।
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-कैफीन और अल्कोहल भी शरीर में बहुत अधिक गर्मी पैदा करते हैं और खासकर गर्मियों में इससे बचना चाहिए।
यह शरीर की गर्मी को कम करने का एक प्रभावी तरीका है। शीतली शीतकारी श्वास जैसी सांस लेने की तकनीक -अपने मुंह से धीरे-धीरे अपनी जीभ को घुमाकर सांस लेना ताकि गुजरती ठंडी हवा को महसूस किया जा सके और अपनी नाक से सांस छोड़ना मदद कर सकता है।



