Monday, March 23, 2026
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सीसीएसयू फायरिंग मामले में आठ छात्रों पर गिर सकती है गाज

  • विवि स्तर पर मामले से जुड़े छात्रों पर कार्रवाई की तैयारी
  • विवि सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए भी शुरू हुई तैयारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चौधरी चरण सिंह विवि परिसर में फायरिंग करने वाले आठ छात्र शनिवार या सोमवार को निलंबित हो सकते हैं और चिह्नित बाहरी 11 युवाओं के प्रवेश पर विवि में प्रतिबंध लग गया है। विवि में फिर से इस तरह की घटना न हो उसको लेकर विवि ने सख्ती दिखाना शुरु कर दिया है और विवि में सुरक्षा को लेकर भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे है। विवि के संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। इतना ही नहीं ई-रिक्शा से सुरक्षा गार्ड लगातार पेट्रोलिंग करेंगे।

विवि में बिना आई कार्ड छात्र-छात्राओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। कॉलेजों के विद्यार्थियों को विवि में आने के लिए आईकार्ड के साथ प्राचार्य से स्वीकृति प्रार्थना पत्र लाना होगा। विवि परिसर में पिछले माह गोली चलने की घटना हुई थी। पुलिस ने मामले में 19 लोगों को चिह्नित कर उनकी सूची विवि प्रशासन को थमाई थी। सूची में जिनके नाम हैं, उनमें आठ विवि के विद्यार्थी और 11 बाहरी युवा चिह्नित हुए हैं।

एसपी सिटी की तरफ से भेजी गई लिस्ट के आधार पर विवि प्रशासन सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की संस्तुति के बाद शनिवार या फिर सोमवार को आठ छात्रों का निलंबन तय हो गया है। फायरिंग में शामिल 11 युवाओं का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

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दोबारा से विवि परिसर का माहौल नहीं बिगड़े, इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए गए हैं। विवि परिसर में लगने वाले कैमरों का कंट्रोल रूम प्रॉक्टर आॅफिस और सिक्योरिटी गार्ड रूम बनेगा। ताकि शरारती तत्वों पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा तय किया गया है कि अब बिना आई कार्ड के किसी भी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

यदि किसी महाविद्यालय अथवा कॉलेज का विद्यार्थी किसी कार्य से विवि आता है तो उसे आई कार्ड के अलावा प्रधानाचार्य को कार्य के बाबत दिए प्रार्थना पत्र को लेकर आना होगा। इनमें से यदि कोई एक चीज नहीं है, तो प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

एक साल में पूरी नहीं हुई बीएड कॉलेजों की जांच

मेरठ: प्रदेश में बीएड व अन्य निजी संस्थानों की जांच के लिए सभी राज्य विवि को शासन स्तर पर जांच कमेटियों का गठन कर जांच के आदेश दिए गए थे। मगर गौर करने वाली बात यह है कि बीएड कॉलेजों की हकीकत पता करने को गठित टीमें एक साल गुजरने के बाद भी जांच पूरी नहीं कर सकी हैं। जांच को लेकर जब अधिकारिक स्तर पर चर्चा की जाती है तो बताया जाता है कि अभी जांच चल रही है।

सूत्रों की माने तो जांच धीमी होने की वजह कई बीएड कॉलेज प्रभावशालियों द्वारा संचालित करना है। चौधरी चरण सिंह विवि के अंतर्गत आने वाले छह जिलों में करीब 364 बीएड कॉलेज हैं, जिनकी जांच विवि स्तर पर बनाई गई कमेटियों द्वारा की जानी थी। बीएड कॉलेज तो चल रहे हैं, लेकिन उनकी कहानी कुछ और ही है, उनमें न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न व्यवस्था।

इसकी गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर से बीएड कॉलेजों की हकीकत पता करने के लिए जांच के आदेश दिए गए थे। जिसके चलते विवि स्तर पर तीन-तीन सदस्यों की दो टीमें गठित की गई थी। दोनों टीमों को तीन-तीन जिलों के बीएड कॉलेज की जांच सौंपी गई, जो आज तक पूरी नहीं हो सकी है जबकि एक साल से ज्यादा समय गुजर चुका है।

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