- पहले मेले जैसा माहौल रहता था, बिल्ला, पर्चे लेने की होड़ रहती थी
- अब डर रहता है कि कहीं दूसरी पार्टी वाले गुस्सा न हो जाए
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एक-दो नहीं पूरे 50 साल हो गए, न जाने कितने चुनावों में वोट डाले हैं, लेकिन जिस तरह का माहौल अब आ गया है, वो चुनाव का अहसास नहीं कराता है। पहले हम लोग नेताओं की गाड़ियों के पीछे इसलिये भागते थे, ताकि बिल्ला और पम्पलेट आदि मिल जाएं। अब चुनाव में न तो प्रत्याशी लोगों को जानता है और न ही लोग प्रत्याशी को जानते हैं। यह कहना है कैंट क्षेत्र के बुजुर्ग मतदाता अनिल ग्रोवर का। पाकिस्तान के रावलपिंडी से आजादी के बाद कैंट क्षेत्र में बस गए अनिल का कहना है कि इस बार का चुनाव जरा भी चुनाव का अहसास नहीं करा रहा है।

दैनिक जनवाणी के साथ बातचीत में मशहूर मिठाई विक्रेता चुन्नी लाल ग्रोवर के बेटे अनिल ग्रोवर ने बताया कि 1965 में पाकिस्तान के युद्ध के बाद जब लाल बहादुर शास्त्री के समय में चुनाव के समय बच्चों के साथ नेताओं की गाड़ियों के पीछे भागने की दौड़ लगती थी। जब प्रत्याशी पर्चे हवा में उड़ाते थे तो उनको बटोरने में मजा आता था। 1969 से 1977 तक कैंट सीट से उमादत्त शर्मा कांगे्रस के प्रत्याशी थे। पहली बार जब वोट डालने गया तो बहुत अच्छा लगा। रंग-बिरंगे पर्चे और उस पर बनी दो बैलों की जोड़ी बहुत अच्छी लगती थी। प्रत्याशी या उनके समर्थक वोट डालने वाले दिन घर आते थे और सम्मान के साथ वोट डालने का आग्रह करते थे।

शहर की दीवारें नारों से पटी रहती थी और एक मेले जैसा माहौल रहता था। दिन-रात लाउडस्पीकरों की आवाज चुनाव का अहसास कराती रहती थी। उन दिनों सदर में उतनी भीड़ नहीं रहती थी और चुनावी माहौल में सभी लोग मिलजुल कर अपने अपने नेताओं के लिये प्रचार करते थे। उस वक्त जाति और धर्म की बात भी नहीं सुनाई देती थी। अब माहौल बदल गया है। पिछले तीन चुनाव से चुनाव अब एक डर का प्रतीक बन गया है। चुनाव आयोग की सख्ती ने चुनावी माहौल को पूरी तरह से बदल दिया है। इस बार का चुनाव डिजिटल कर दिया गया है।
अभी तक सदर में नहीं लग रहा कि चुनाव आ गया है। हर कोई राजनीतिक दलों की बात नहीं कर रहा, बल्कि इस पर चर्चा कर रहा है कि किस बिरादरी के कितने वोटर है। वर्ष 2000 से पहले के चुनावों में कई पार्टियां होने से माहौल भी बदलने लगा और लोग एक-दूसरे पर व्यक्तिगत आरोप लगाने लगे। अब चुनाव बस स्वार्थ और निजी लाभ के लिये होने लगे हैं किसी को भी आम जनता से मतलब नहीं है।
कैंट विधानसभा के विजयी प्रत्याशी
- 1957-प्रकाशवती सूद-कांग्रेस
- 1962-प्रकाशवती सूद-कांग्रेस
- 1967-वी त्यागी-संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
- 1969-उमादत्त शर्मा-कांग्रेस
- 1974-अजीत सिंह सेठी-कांग्रेस
- 1977-अजीत सिंह सेठी-कांग्रेस
- 1980-अजीत सिंह सेठी-कांग्रेस
- 1985-परमात्मा शरण मित्तल-भाजपा
- 1989-शशी मित्तल-भाजपा
- 1993-अमित अग्रवाल-भाजपा
- 1996-अमित अग्रवाल-भाजपा
- 2002-सत्य प्रकाश अग्रवाल-भाजपा
- 2007-सत्य प्रकाश अग्रवाल-भाजपा
- 2012-सत्य प्रकाश अग्रवाल-भाजपा
- 2017-सत्य प्रकाश अग्रवाल-भाजपा

