दीपक शर्मा |
सहारनपुर: रामपुर मनिहारान विस क्षेत्र दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग पर है। यह प्रदेश की छह नंबर की सीट है। इसका अपना दिलचस्प इतिहास रहा है। सपा की दाल तो यहां कभी नहीं गली। अलबत्ता, मतदाताओं ने कभी कांग्रेस, कभी जनता पार्टी, कभी जनता दल, कभी बसपा और भाजपा को भी जिताया है।
इस बार यहां लड़ाई काफी दिलचस्प है। बसपा ने पुराने धुरंधर रवींद्र मोल्हू तो सपा-रालोद गठबंधन से विवेककांत मैदान में हैं। भाजपा ने सिटिंग विधायक देवेंद्र निम को उतारा है। कुल 3,22,722 मतदाता वाली इस सीट के विधानसभा के चुनावों का रिकार्ड देखा जाए तो सबसे अधिक पांच-पांच बार कांग्रेस और चार बार बसपा के नुमाइंदों को जिता कर विधानसभा भेजा। जबकि तीन बार भाजपा,दो बार जनता पार्टी और एक बार जनता दल के सिर जीत का सेहरा बांधा। जबकि यहां पर साइकिल कभी दौड़ नहीं पाई। इस बार बसपा के लिए बड़ी मुश्किलें हैं।
रामपुर सीट को पहले नागल सीट के नाम से जाना जाता था। परिसीमन में यह सीट रामपुर के नाम से जानी जाने लगी है। जो भी यहां से चुना गया वह मालामाल हो गया। लेकिन जन समस्याओं का निदान शायद ही किसी ने कराया हो। यह हाल जब है कि कस्बा दिल्ली-यमुनौत्री हाई-वे पर बसा है।
साथ ही तहसील भी है। इसके अलावा रामपुर को तहसील का दर्जा तो मिला। लेकिन,अभी तक भवन का निर्माण नहीं हो सका। हालांकि भवन के लिए जमीन की व्यवस्था हो गई है। इसके अलावा क्षेत्र में कोई बड़ा उद्योग नहीं है, जिससे यहां के युवाओं को रोजगार मिल सके।
- 1974–कांग्रेस–हरी राम
- 1977–जनता पार्टी–राम सिंह
- 1980–जनता पार्टी–राम स्वरुप
- 1985–कांग्रेस–चमन लाल चमन
- 1989–जनता दल–हरफूल सिंह
- 1991–भाजपा–मामचंद
- 1993–भाजपा–मामचंद
- 1996–बसपा–इलम सिंह
- 2002–बसपा–इलम सिंह
- 2007–बसपा–रविंद्र कुमार मोल्हू
- 2012–बसपा–रविंद्र कुमार मोल्हू
- 2017–भाजपा–देवेंद्र निम

