- हार-जीत की चर्चाओं के बीच हो रही लोगों की सुबह से शाम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: यूपी विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मेरठ जनपद की सभी सात सीटों पर मतदान हो चुका है। वोटिंग के बाद अब शहर से देहात तक लोगों की अपने-अपने प्रत्याशी को लेकर हार-जीत की चर्चाओं के बीच सुबह से शाम हो रही है। इसमें बड़ी बात यह है कि इस बार मतदान के बाद वोटर हाथी और हाथ को साफ मान रहे हैं। बसपा और कांग्रेस को सात में से एक भी सीट पर चुनावी संघर्ष में नहीं आंका जा रहा है। हालांकि दोनों ही दलों के प्रत्याशियों को मिलने वाले मतों के आधार पर गठबंधन और भाजपा प्रत्याशियों की हार-जीत का आंकलन जरुर किया जा रहा है।

गौरतलब है कि, इस बार विधानसभा की सभी सात सीटों पर मतदान के बाद मुख्य मुकाबला सपा-रालोद गठबंधन और भाजपा प्रत्याशियों के बीच चुनाव में दिखाई दिया है। जिले में सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर, किठौर, मेरठ कैंट, मेरठ शहर व मेरठ दक्षिण सीट हैं। इनमें मेरठ शहर में कांग्रेस और मेरठ दक्षिण में हाथी को पड़े वोटों पर माथापच्ची जरुर हो रही है, मगर दोनों जगहों पर इनको मुख्य मुकाबले से बाहर माना जा रहा है।
ऐसा ही कुछ हाल बाकी पांच सीटों का है। इनमें किठौर और सिवालखास सीट पर बसपा प्रत्याशी को मिलने वाले वोटों की समीक्षा गठबंधन और भाजपा दोनों ही खेमे में हो रही है। इतना ही नहीं सरधना और हस्तिनापुर सुरक्षित सीट पर भी कांटे का मुकाबला गठबंधन व भाजपा प्रत्याशियों के बीच होने की उम्मीद मतदाता और चुनावी विश्लेषक जता रहे हैं। मेरठ कैंट सीट पर भाजपा और रालोद प्रत्याशी के बीच चुनाव होने की बात कही जा रही है, मगर ज्यादातर लोग चर्चा के बीच इस सीट को भाजपा के लिए आसान कह रहे हैं। फिलहाल पूरी तरह कयासबाजी का दौर है, मगर सभी सात सीटों के चुनाव का नतीजा क्या होगा यह आगामी 10 मार्च को मतगणना होने के बाद तय होगा।
मतदान बाद दूसरे दिन भी रही चुनावी चर्चा
पहले चरण का मतदान हो चुका है, मतदान के दो दिन बाद भी मुख्य रूप से शहर विधानसभा की सीट पर शनिवार को सियासी गलियारों में चुनावी चर्चाएं रही। हर कोई जाति के आधार पर मतदान प्रतिशत की चर्चा करता सुना गया। शहर के मुस्लिम बाहुल इलाकों में यह चर्चा ज्यादा रही कि सपा-रालोद के प्रत्याशी को बड़ी संख्या में मुसलमानों का वोट समर्थन प्राप्त हुआ है। वहीं, हिंदू बाहुल इलाकों में भाजपा प्रत्याशी कमलदत्त शर्मा की चर्चा रही। भाजपा के सियासी शतरंजी खिलाड़ियों का मनना है कि मुस्लिमों के कुल मतदान प्रतिशत में कांग्रेस, बसपा एवं ओवैसी के प्रत्याशियों ने भी सेंध लगाई है। वहीं, गठबंधन के सियासी शतरंजी बताते हैं कि कांग्रेस के प्रत्याशी रंजन शर्मा को भी बड़ी संख्या में हिंदुओं का वोट मिला है। इसका सही पटाक्षेप 10 मार्च मतगणना के दिन ईवीएम में कैद वोटों की गिनती से होगा।

