Friday, May 1, 2026
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हारकर भी कैंट में गठबंधन को मजबूती कर गयी मनीषा

  • सपा-रालोद को इस सीट पर पहली बार मिले 44 हजार वोट
  • अब तक इस सीट पर नहीं बचती थी सपा व रालोद प्रत्याशी की जमानत तक
  • इस बार जमानत भी बची, बसपा-कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन कर रनरअप भी रही

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ कैंट विधानसभा सीट पर पहली बार सपा और रालोद प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में सफल ही नहीं रहा, बल्कि रनरअप भी रहा है। इस सीट पर सपा-रालोद गठबंधन की उम्मीदवार मनीषा अहलावत के हिस्से में हार भले ही आई हो, मगर उसने हारकर भी कैंट में गठबंधन दलों को मजबूत कर दिया है। इस चुनाव से पहले तक इस सीट पर मुख्य मुकाबले में कांग्रेस और बसपा ही भाजपा के सामने रहती थी। अबकी बार इन दोनों पार्टियों को मनीषा ने पटखनी देते हुए यहां सपा-रालोद को मजबूती दी और 44 हजार वोट हासिल किया है, जो अब तक का दोनों ही दलों का सबसे बेहतर प्रदर्शन है।

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बता दें कि, सपा हो या फिर रालोद दोनों दलों के लिए मेरठ कैंट की सीट पर जीतना तो दूर की बात कोई भी दल अभी तक दूसरे नंबर पर भी नहीं आ पाया था। अबकी बार सपा-रालोद गठबंधन से समाजसेवी व पूर्व विधायक चंद्रवीर सिंह की पुत्री मनीषा अहलावत को रालोद के सिंबल पर मैदान में उतारा गया और उसने इस सीट पर पार्टी के लिए पहले से बेहतर प्रदर्शन कर सभी को चौंका दिया।

हालांकि मनीषा भाजपा के मुकाबले वोटों में कहीं नहीं ठरती हैं, मगर उनको मिलने वाले वोट सपा-रालोद के लिए अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन है। अगर पूर्व के चुनाव की बात की जाए, तो यहां सपा और रालोद दोनों ही दलों के उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाते थे। इस बार के चुनाव में पहली बार यहां सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी की जमानत भी बची और वह दूसरे नंबर पर भी रही।

पिछले चार चुनाव में हुआ सपा-रालोद का बुरा हाल

कैंट की सीट पर पिछले चार चुनाव की बात करें, तो यहां सपा और रालोद का जिले में सबसे खराब प्रदर्शन रहता था। दोनों ही दलों को प्रत्याशियों को दस हजार मत भी हासिल नहीं होते थे। 2002 के चुनाव में यहां सपा के ज्ञानेन्द्र शर्मा को मात्र 3002 वोट ही मिले थे। 2007 में इस सीट पर जहां रालोद के मदन शर्मा को 4505 वोट मिले थी, वहीं सपा से चुनाव लड़े अमित अग्रवाल को 20039 वोटों पर संतोष करना पड़ा था, जबकि वह इसी सीट पर भाजपा से पूर्व में दो बार विधायक रह चुके थे।

2012 के चुनाव में भी दोनों दलों के प्रत्याशियों का प्रदर्शन बेहद खराब ही रहा था। सपा के अनिल बख्शी को 9699 वोट मिले थे, जबकि रालोद और कांग्रेस का गठबंधन था। कांग्रेस के प्रत्याशी रमेश ढींगरा थे। 2017 के चुनाव में यहां सपा-कांग्रेस गठबंधन में कांग्रेस के रमेश ढींगरा 39650 वोट ही हासिल कर पाए थे। वहीं, रालोद के सिंबल पर मैदान में उतरे संजीव धामा की 3851 वोटों के साथ जमानत जब्त हो गई थी। इस बार रालोद की मनीषा अहलावत 44 हजार वोट पाने में कामयाब रही हैं, जो अब तक के सपा-रालोद के सबसे अधिक वोट हैं।

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