Thursday, January 27, 2022
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देदवा गांव के लिए आज भी काल बनी काली नदी

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  • 17 वर्षों में लगभग 400 की मौत, आखिर कब मिलेगी गांव को जहरीले पानी से मुक्ति
  • 20 से 30 लोग अब भी कैंसर से ग्रसित 

जनवाणी संवाददाता |

दौराला: इस आधुनिक युग में आज भी 2300 लोगों की आबादी वाले देदवा गांव के लिए काली नदी का पानी श्राप बना हुआ है। यहां के लोग इस गंदे पानी का सेवन करने से जहां एक के बाद एक मौत का शिकार हो चुका है। वहीं, अगर पिछले 17 वर्षों का इतिहास देखा जाए तो उससे साफ जाहिर है कि अब तक लगभग 400 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है, लेकिन मौजूदा हालात पर नजर डाली जाए तो अब भी 20 से 30 ग्रामीण ऐसे हैं।

जो कैंसर की जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। इस गांव का पानी तो पीने योग्य है ही नहीं, लेकिन आसपास के गांवों में भी पानी ने तबाही मचा रखी है। यह समस्या आज तक ग्रामीणों के लिए नासूर बनी हुई है। फिलहाल तो काली नदी सूखी हुई है, लेकिन इस नदी का पानी जमीन में जाने के कारण इस नदी के आसपास बसे गांवों का पानी खराब हो गया है। सबसे ज्यादा पानी खराब दौराला ब्लॉक के देदवा गांव का है।

यहां नदी निकली हुई है। अब यह नदी पूरी तरह सूखी हुई है, लेकिन इस नदी के आसपास कूड़ा-करकट फैला हुआ है। नदी का पानी जमीन में जाने के कारण गांव का पानी जहरीला हो गया है। पानी खराब होने के कारण लोग कैंसर की जानलेवा बीमारी का शिकार हो रहे हैं। जिसके चलते लोग एक के बाद एक करके दम तोड़ रहे हैं। इस भयंकर समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए ग्रामीणों द्वारा कई बार आंदोलन तक किए, लेकिन हर बार उनका प्रयास विफल रहा।

ब्लॉक दौराला के गांव देदवा के ग्रामीण क्षेत्र व आसपास का पानी जहरीला होने के लिए लोग प्रदूषण विभाग को दोषी मानने लगे हैं। प्रदूषित पानी काली नदी में डालने के लिए औद्योगिक इकाइयों के अफसर जितने जिम्मेदार हैं, उतने ही प्रदूषण विभाग के अफसर भी। कागजों में इकाइयों के इटीपी से निकले पानी के नमूने लेते रहते हैं और नोटिस देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैं।

ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई नहींं की जाती। क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रदूषण विभाग के अफसर नहींं जागे तो जल्द ही प्रदूषण विभाग कार्यालय का घेराव किया जाएगा। प्रदूषण पर सख्ती और उस पर प्रशासनिक कवायद के बीच एक गांव ऐसा भी है जो जलीय प्रदूषण के चलते कैंसर से जूझ रहा है। यह गांव है देदवा। जिसमें बीते 17 सालों में 400 लोगों की कैंसर से जान जा चुकी है और 20-30 लोग वर्तमान में मौत से जूझ रहे हैं।

इसके अलावा दर्जनभर लोग हेपेटाइटिस बी और सी से पीड़ित हैं। गांव वाले इसका कारण पास बह रही काली नदी के पानी का प्रदूषित होना मानती है। इसकी के चलते गांव में लगे हैंडपंपों से इस कदर गंदा पानी निकल रहा है। जिन्हें सिर्फ उबाल कर ही पीया जा सकता है।

काली नदी बना रही ग्रामीणों को बीमार

देदवा गांव की आबादी करीब 2300 है। इस गांव के छह लोग कैंसर से और कई लोग पीलिया, आंत्र व किडनी के रोगों से पीड़ित हैं। कई बार शिकायत के बाद भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान नहींं दे रहे। काली नदी के प्रदूषण की कभी जांच नहींं कराई गई। ग्रामीण बताते हैं कि औद्योगिक इकाइयों ने काली नदी व क्षेत्र का पेयजल प्रदूषित कर दिया है, नरक बना दिया है।

जहरीले पानी से भूजल में सीसा, आर्सेनिक, एल्यूमिनियम व साइनाइड की मात्रा जानलेवा स्तर तक जा पहुंची है। इससे कैंसर, दिल का दौरा, त्वचा रोग, पीलिया व गुर्दे फेल होने की बीमारी पैदा हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पांच वर्ष के दौरान कैंसर, दिमाग की बीमारी, गुर्दे फेल होने, दिल का दौरा पड़ने, टीबी व पीलिया आदि बीमारियों से करीब 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

समस्या को झेलते हो गए बूढे

ग्रामीण महकार सिंह और अतर सिंह का कहना है कि इस समस्या को झेलते हुए वह बुजुर्ग हो गए। कई पीढ़ी उनकी इस समस्या से जूझ रही है, लेकिन आज तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है। अगर गांव पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में नौजवान युवकों और बच्चों पर भी इस खराब पानी का सेवन करने से प्रभाव पड़ेगा। यह बच्चे भी कैंसर की बीमारी से पीड़ित हो जाएंगे।

समस्या से सभी अनजान

महिला शिमला व राजकुमार देदवा का कहना है कि इस समस्या को कई बार शासन प्रशासन से लेकर लखनऊ तक अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं है। समय रहते अगर अब भी इस समस्या से निजात नहीं मिली तो ग्रामीण ऐसे ही तड़पते-तड़पते अपना दम तोड़ देंगे। इसलिए इस समस्या के प्रति बेहद गंभीर होना पड़ेगा।

बर्बादी के कगार पर गांव

देदवा गांव के पूर्व ग्राम प्रधान ओमपाल का कहना है कि यह गांव की भयंकर समस्या है। इस समस्या के खिलाफ कई बार शिकायते की जा चुकी है, लेकिन कोई भी समाधान नहीं होता। अगर समय रहते इस समस्या से नहीं निपटा गया तो यह गांव इस समस्या के चलते बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएगा।

दूषित पानी से गंभीर बीमारी

मौजूदा प्रधान अनुपमा पत्नी सुनील सिंह का कहना है कि पानी की खराबी होने से अनेकों बीमारियां ग्रामीणों में देखने को मिल रही है और इस पानी को पीकर कैंसर जैसी घातक बीमारियां भी हो रही है। जोकि गांव के लिए बेहद खराब है।

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