- ज्वाइंट कमिश्नर के न मिलने पर किया हंगामा, बाद में पहुंची ज्वाइंट कमिश्नर
- 17 मार्च को लखनऊ में होनी है आवास विकास की बोर्ड बैठक
- गुरुवार को परिषद के अधिकारियों के साथ हुई किसानों की वार्ता
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जागृति विहार एक्सटेंशन स्कीम 11 को लेकर परिषद और किसानों के बीच चले आ रहे विवाद का हल निलने की कुछ उम्मीद नजर आई है। गुरुवार को आवास विकास पहुंचे किसानों ने अधिकारियों के सामने अपनी मांगों को रखा। अधिकारियों ने उनकी मांगों का प्रस्ताव बनाकर 17 मार्च को लखनऊ मुख्यालय में होने वाली बोर्ड बैठक में रखने की बात कही है। हालांकि इससे पूर्व ज्वाइंट कमिश्नर के न पहुंचने पर किसानों ने हंगामा भी किया, लेकिन बाद में वह किसानों से बात करने पहुंची।
बता दें कि जागृति विहार स्कीम 11 को लेकर किसानों और परिषद के बीच पिछले कई वर्षों से विवाद चला आ रहा है। जिस कारण यहां आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पाता है। किसान बार-बार अपनी मांगों को अधिकारियों के सामने रखते हैं लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो पाती है जिसे लेकर वह स्कीम 11 में कोई कार्य नहीं होने देते और इसका खामियाजा वहां आवंटियों को भुगतना पड़ता है। यहां आंवटियों को अभी तक कब्जा नहीं मिल पाया है जिससे परिषद को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
नहीं पहुंची ज्वाइंट कमिश्नर, हंगामा
इससे पूर्व दो मार्च को किसानों और अधिकारियों के बीच वार्ता का दिन तय किया गया था, लेकिन उस दिन भी ज्वाइंट कमिश्नर के न होने के कारण किसानों को वापस लौटना पड़ा था। गुरुवार का दिन तय गया था। गुरुवार को भी किसान उत्तर प्रदेश सेवा के प्रदेश सचिव रोहित गुर्जर के नेतृत्व में आवास विकास कार्यालय पहुंचे, लेकिन यहां ज्वाइंट कमिश्नर शेरी नहीं मिली।
जिसके बाद किसानों ने यहां हंगामा शुरू कर दिया। हंमामे की सूचना के ज्वाइंट कमिश्नर शेरी वहां पहुंची और किसानों के साथ वार्ता की। किसानों का कहना है कि किसानों को पांच प्रतिशत विकसित भूखंड के स्थान पर छह प्रतिशत विकसित भूखंड दिये जाने चाहिए।
उन्होंने 100 रुपये के स्टाम्प पर भूखंड विकसित किये जाने, ऐसे किसान जिन्होंने समझौते के समय भूखंड नहीं भरे उन्हें भी अन्य किसानों की भांति नियमानुसार भूखंड दिये जाने की मांगों को रखा। इस दौरान तय हुआ कि किसानों की मिनट्स तैयार कर आज उस पर उनके प्रतिनिध के हस्ताक्षर करा लिये जाएंगे और तत्काल ही यह प्रस्ताव अधिकारियों के माध्यम से मुख्यालय भेजे जाएंगे।
इस प्रस्ताव को 17 मार्च को लखनऊ में होने वाली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। जिस पर कोई न कोई निर्णय निकल सकता है। इस दौरान किसानों ने सकीम 11 में कोई नया कार्य नहीं कराये जाने की बात कही। यहां ज्वाइंट कमिश्नर कु. शेरी, अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार, अधीशासी अभियंता एमबी कौशिक ने किसानों की बात सुनीं। किसानों में ज्ञानिंदर भड़ाना, विनोद, तुलसीदास, बिल्लू सिंह, असफाक, संदीप, मोहित, मास्टर सुमेरु, एसके शाहरुख, समित आदि रहे।
पांच वर्षों में भी नहीं हुये आवासों के आवंटन
डूडा की ओर से बीएसयूपी आवासीय योजना के तहत गरीबों के लिये आवास बनाये गये थे। इन आवासों को बने पांच वर्ष से भी अधिक बीत चुके हैं लेकिन अभी तक सभी आवंटियों इनका आवंटन नहीं किया गया है। इस संबंध में सूडा निदेशक लखनऊ को पत्र लिखकर आवासों का आवंटन कराये जाने की मांग की गई है।
डूडा की ओर से मेरठ के डाबका व शहर के अन्य इलाकों में बीएसयूपी के तहत लगभग 1500 आवासों का निर्माण कराया गया था। गरीबों को आवास देने के लिये यह योजना शुरू की गई थी। वर्ष 2015 में यह योजना शुरू हुई थी। दायमपुर और डाबका में 576 आवासों का निर्माण हुए करीब पांच वर्ष हो गये हैं, लेकिन अभी तक इनमें से 80 को ही आवासों का आवंटन कराया गया है बाकी किसी को आवंटन नहीं दिया गया है।
अन्य लाभार्थियों को उनका आवंटन न मिलने के कारण वह परेशान हैं। अगर वह आवास ऐसे ही पड़े रहे तो यह जर्जर अवस्था में पहुंच जाएंगे। स्वच्छ भारत अभियान के सह संयोजक काजी शादाब ने इस संबंध में सूडा लखनऊ को पहले भी शिकायत की थी।
अब फिर से एक बार इस संबंध में पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। इस मामले में सूडा निदेशक की ओर से दिसंबर 2020 में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर आवासों को आवंटन कराये जाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी अभी तक आवासों का आवंटन नहीं किया गया है। उन्होंने एक बार फिर से सूडा निदेशक को पत्र लिखकर आवासों का आवंटन कराये जाने की मांग की है।

