Monday, March 23, 2026
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किसान आंदोलन: दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक शुरू

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: हरियाणा के सोनीपत में कुंडली समेत अन्य बॉर्डर पर लंबे समय से चल रहे किसान आंदोलन को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और सरकार के बीच जल्द समझौते की उम्मीद जगी है।

सूत्रों के अनुसार, एसकेएम को लिखे ताजा पत्र में केंद्र ने कहा है कि वह किसानों की सभी मांगें मानने को तैयार है। हालांकि इस बारे में किसी भी किसान नेता ने पुष्टि नहीं की है।

दिल्ली में बैठक शुरू

वहीं दिल्ली में ऑल इंडिया किसान सभा के दफ्तर में संयुक्त किसान मोर्चा की पांच सदस्यीय कमेटी की बैठक शुरू हो गई है। इसके बाद दोपहर दो बजे सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आगामी निर्णय लिया जाएगा। उम्मीद है कि दो बजे आंदोलन समाप्ति का एलान हो सकता है।

सरकार की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है- धवले 

संयुक्त किसान मोर्चा की पांच सदस्यीय समिति के सदस्य अशोक धवले ने कहा कि हम इस बात की सराहना करते हैं कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है और लिखित में कुछ दे रही है।

लेकिन प्रस्ताव में कुछ खामियां थीं, इसलिए कल रात हमने इसे कुछ संशोधनों के साथ वापस भेज दिया और अब हम सरकार की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

किसान संघ के सदस्यों सहित एमएसपी-केंद्रित समिति के गठन की आवश्यकता है। सरकार ने यह भी कहा कि आंदोलन खत्म करने के बाद हमारे खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे।

यह गलत है। हमें यहां ठंड में बैठना पसंद नहीं है। सैद्धांतिक रूप से मुआवजे को मंजूरी दे दी गई है, हमें पंजाब मॉडल जैसा कुछ ठोस चाहिए।

उन्होंने बिजली बिल को वापस लेने का भी वादा किया था, लेकिन अब वे हितधारकों के साथ इस पर चर्चा करना चाहते हैं और फिर इसे संसद में रखना चाहते हैं। यह विरोधाभासी है।

तीन बिंदुओं पर अटकी है बात

मंगलवार को मोर्चा की अहम बैठक शुरू होने से ठीक पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय से छह सूत्रीय प्रस्ताव लेकर आए प्रतिनिधिमंडल ने कुंडली में मोर्चा कमेटी के सभी पांच सदस्यों से गुप्त बैठक की थी।

बैठक के बाद कमेटी के सदस्यों ने सभी प्रस्ताव मोर्चा की बैठक में रखे। इन प्रस्तावों में से तीन बिंदुओं पर किसान नेताओं ने सवाल खड़े किए। उन्होंने सरकार से बुधवार तक स्पष्टीकरण मांगा था।

सरकार ने नहीं दिया था दो दिन जवाब, किसानों ने दिल्ली कूच के फैसले के दिए थे संकेत

एसकेएम कमेटी में शामिल सदस्यों ने सरकार पर नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाते हुए कड़े तेवर दिखाए थे और मंगलवार को होने वाली मोर्चा की बैठक में दिल्ली कूच जैसे कार्यक्रमों का फैसला लेने के संकेत दिए थे।

इसके चलते कुंडली में मंगलवार को एसकेएम की बैठक शुरू होते ही केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 6 सूत्रीय प्रस्ताव के साथ एक प्रतिनिधिमंडल को किसान कमेटी से बातचीत के लिए भेजा। किसान मोर्चा तब तक कुंडली बॉर्डर पर बैठक शुरू कर चुका था कि अचानक कमेटी के सदस्यों के पास बातचीत का प्रस्ताव आया।

कमेटी के सदस्यों ने प्रतिनिधिमंडल के साथ गुपचुप बैठक की। करीब एक घंटे की बैठक के बाद वह वापस मोर्चा की बैठक में पहुंचे।

यहां पर मोर्चा के नेताओं के सामने सभी प्रस्ताव रखे गए, जिस पर किसान नेताओं ने एमएसपी, मुकदमे वापसी व मुआवजे पर सरकार की शर्तों का विरोध किया और अन्य सभी मुद्दों पर किसानों ने सहमति जताई।

किसान नेताओं ने 3 बिंदुओं पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है और इसके बाद बुधवार को फिर से बैठक करने का निर्णय लिया है।

कमेटी के सदस्य बलबीर सिंह राजेवाल, शिवकुमार कक्का, गुरनाम सिंह चढूनी, युद्धवीर सिंह व अशोक धवले ने मंगलवार शाम पत्रकारों से बातचीत कर साफ कहा कि जिन 3 मुद्दों पर पेंच फंसा है, उन पर सहमति के बाद ही किसान आंदोलन वापस लेने के बारे में विचार करेंगे।

सरकार ने लिखित प्रस्ताव भेजकर अच्छी पहल की है। अब लगता है कि जल्द ही सभी मुद्दों पर बाकी सहमति बनाने का प्रयास करेगी।

सरकार के प्रस्ताव और तीन बिंदुओं पर किसानों का जवाब 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एमएसपी गारंटी कानून को लेकर प्रस्तावित कमेटी में केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार, कृषि विशेषज्ञ व वैज्ञानिकों के अलावा एसकेएम व अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की समिति गठित करने की बात कही है। किसानों की मांग है कि इस कमेटी में अन्य किसान संगठनों की जगह सिर्फ संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों को ही शामिल किया जाए।

केंद्र सरकार ने कहा है कि यूपी और हरियाणा में किसानों के खिलाफ सभी मामले वापस लिए जाएंगे, लेकिन पहले किसान आंदोलन समाप्त करें।

इस पर एसकेएम सदस्यों ने कहा कि आंदोलन खत्म करने की शर्त न रखी जाए। पहले ही केस वापस ले लिए जाएं। पहले भी इस तरह आंदोलन खत्म करवाने के बाद केसों को वापस नहीं लिया गया। जिससे मुसीबत बढ़ गई।

सरकार सैद्धांतिक तौर पर मुआवजा देने को तैयार है, लेकिन किसानों का कहना है कि पंजाब की तर्ज पर मुआवजा और नौकरी दी जाए।

लखीमपुर खीरी प्रकरण पर साधी चुप्पी, बोले-कल जवाब देंगे

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में एसकेएम ने लखीमपुर खीरी प्रकरण में आरोपियों की गिरफ्तारी व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग को रखा था, लेकिन मंगलवार को पत्रकार वार्ता के दौरान किसान कमेटी के सदस्यों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली।

उनका कहना है कि शहीद किसानों को मुआवजा देने की मांग की गई, जिसमें लखीमपुर खीरी के शहीद किसान भी शामिल हैं और लाल किले पर प्रदर्शन के दौरान मारा गया नवदीप भी शामिल है। बार-बार पूछने पर बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि वह बुधवार को इसका जवाब देंगे।

टीकरी बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन निरंतर जारी है। मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में होने वाले फैसलों की आंदोलनकारी किसान दिन भर इंतजार करते रहे।

एसकेएम की ओर से आंदोलन खत्म होने की कॉल का किसानों को इंतजार तो रहा, लेकिन धैर्य की कमी भी नजर नहीं आई।

किसान नेताओं ने कहा कि हमें घर जाने की कोई जल्दी नहीं है। सारे काम पूरे होने के बाद जब एसकेएम आदेश देगा, तभी जाएंगे। सेवानिवृत्त सूबेदार दर्शन सिंह ने कहा कि इस आंदोलन से हमने बहुत कुछ सीखा है।

सबसे बड़ा तो भाईचारा बनाना सीखा है। भाईचारे ने तीनों कानून रद्द करवाकर सरकार को मुंह-तोड़ जवाब दिया है और पराली का मुद्दा भी खत्म करवाया है। यह हमारी बड़ी जीत है। हमने इस लड़ाई अपने कई साथी गंवाए। हम उनकी शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।

जाटों मसूदपुर हांसी से 40-50 महिलाओं का जत्था समर्थन देने के लिए टीकरी बार्डर पहुंचा। ऑल इंडिया किसान सभा रोहतक के प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि हमें अपना मोर्चा और भी मजबूत करना पड़ेगा।

पंजाब, हरियाणा में एमएसपी का प्रावधान होने के बावजूद कोई भी फसल एमएसपी पर नहीं खरीदी जाती। अधिक बारिश से खराब हुई फसलों का अभी तक मुआवजा नहीं दिया है और न ही गिरदावरी हुई है। होशियार सिंह मसूदपुर ने टीकरी बॉर्डर पर किसानों में एक ट्रॉली लड्डू बांटे।

किरती किसान यूनियन के प्रधान राजिंदर सिंह दीपसिंहवाला ने कहा कि कोई भी लड़ाई महिलाओं के सहयोग के बिना पूरी नहीं हो सकती। इस आंदोलन में महिलाओं ने बढ़-चढ़ कर सहयोग दिया।

हमारी जीत में मातृशक्ति की अहम भूमिका रही है। आने वाले दिनों में हम मिलकर रहेंगे, तो और भी आंदोलन करेंगे और उनमें भी जीत दर्ज करेंगे।

उन्होंने कहा कि 70 साल से किसानों के पैरों में बेड़ियां बांध रखी थी, लेकिन अब किसानों को पता चल चुका है कि आंदोलन किस तरह लड़ना और जीतना है।

हरियाणा-पंजाब के किसानों ने दिखा दिया है कि आंदोलन किस तरह लड़ा जा सकता है और उसके बाद यूपी व अन्य कई सूबों के किसान भी हमारे साथ आए। जसबीर कौर नट, लखविंदर सिंह पीर मोहम्मद, अमरजीत सिंह भुल्लर, बलदेव सिंह भाई रूपा ने भी किसानों को संबोधित किया।

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