- झूले, सर्कस, लाइट, होर्डिंग्स, लाउडस्पीकर के ठेकों की बाधा हुई पार
- अब 24 को तहबाजारी और साइकिल स्टैंड के टेंडर की प्रक्रिया शेष
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आगामी 25 जून की संभावित तिथि से आरंभ होने वाले नौचंदी मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को फाइनल टच दे दिया गया है। कार्यक्रमों की सूची को स्व्ीकृति के लिए डीएम कार्यालय भेज दिया गया है। इस दौरान मेले में लाइट, झूले, सर्कस, होर्डिंग्स, लाउडस्पीकर के टेंडर डाले जाने की प्रक्रिया गुरुवार को पूर्ण कर ली गई है। शुक्रवार को टेंडर खोले जाने और ठेके छोड़े जाने का काम शेष रह गया है।
ऐसे में प्रशासन के स्तर से 25 जून को फाइनल मानकर बाकी तैयारियों को पूर्ण कराने का काम तेजी से शुरू करा दिया गया है। इसके बाद 24 जून को तहबाजारी और साइकिल स्टैंड के ठेके छोड़ने का काम शेष रहेगा, जिसके चलते मेला शुरू कराने में कोई रुकावट नहीं आएगी। नोडल अधिकारी सीडीओ नूपुर गोयल, एएमए जिला पंचायत भारती धामा और कार्यालय के स्तर से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक 25 जून को पटेल मंडप में माता की चौकी सजाकर मेले का शुभारंभ कराने की तैयारियां की जा रही हैं।
इस दौरान जिला पंचायत की ओर से मेला परिसर में टाइल्स बिछाने और रोड बनाने के साथ-साथ ग्रीन बैल्ट बनाने का काम भी अंतिम चरण में है। गुरुवार को लाइट, झूले, सर्कस, होर्डिंग्स, लाउडस्पीकर के टेंडर डाले की प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ ही इन्हें शुक्रवार को खोलकर ठेके छोड़ने का काम शेष रह गया है।
इसके अलावा तहबाजारी और तीन साइकिल स्टैंड के ठेके छोड़ने की प्रक्रिया अब 24 जून को पूर्ण की जाएगी। वहीं जिला पंचायत कर अधिकारी एकता पंडित ने बताया कि अधिकांश सांस्कृतिक कार्यक्रमों को अब तक हुई बैठकों में अंतिम रूप दे दिया गया है। कार्यक्रमों की फाइल को डीएम कार्यालय में स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
सूखे सरोवरों में वर्षा जल का करें संरक्षण: आरएस सेंगर
मोदीपुरम: सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषी एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रो. डा. आरएस सेंगर का कहना है कि इस बार सभी ने भीषण गर्मी को देखा है और यह तापमान लोगों को कई तरह की बीमारियों का निमंत्रण देता है। जब भी तापमान बढ़ता है, तभी हम लोग इसको कम करने के बारे में सोचने लगते हैं। हमें जागरूक रहकर इस समस्या से निजात पाने के लिए आगे आना होगा और आगामी दिनों में होने वाली वर्षा के माध्यम से हम अपने सरोवरों में पानी का संरक्षण करें। प्रदेश में तेजी से नीचे जा रहे भूजल स्तर को ऊपर लाने का एकमात्र उपाय यही है कि तालाबों व अन्य जलाशों में पानी बना रहे।
इससे न सिर्फ फसलों की सिंचाई के लिए पानी की कमी का संकट दूर होगा। बल्कि पशु-पक्षियों और जलीय जीवों को भी राहत मिलेगी। इसी उद्देश्य से राज में बड़े जोर शोर से और कई विभागों के सामूहिक प्रयास से अमृत सरोवर योजना की शुरुआत हुई थी। हाल ही में तालाब में कहीं भी पानी नहीं दिखाई देता लोगों के भविष्य और जीवन से जुड़ी कोई योजना यदि अपने उद्देश्य में असफल रहती है तो उस पर किया गया पूरा खर्च निरर्थक है। केंद्र सरकार ने अमृत सरोवर योजना 2022 में शुरू की थी
और अगस्त 2023 में यह पूरे देश में समाप्त हो गई, लेकिन इसके बहुउद्देशीय महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने इस इस साल 15 अगस्त तक चलने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रदेश में 16909 सरोवर या तो निर्मित किए गए या पुराने तालाबों का जो आदर किया गया। जोकि देश में सर्वाधिक है, लेकिन ऐसे तालाबों का उपयोग ही क्या जिसमें पानी न हो ग्राम विकास आयुक्त ने सर्वरों में पानी न होने को लेकर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।

