जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर किए गए जवाबी हमलों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए जनपद के अग्निशमन विभाग ने भी कमर कस ली है। विभाग के स्टाफ की तो कमी नजर आती है, लेकिन संसाधानों का कोई अभाव नहीं है। इसलिए सूचना मिलने पर एक मिनट के अंदर सायरन बजाती फायर ब्रिगेड घटनास्थल की ओर दौड़ती नजर आएगी।
भारत-पाक सीमा पर तनाव के बीच गृह मंत्रालय द्वारा जारी संवेदनशील जनपदों में मेरठ भी शामिल है। इसलिए यहां भी आतंकवादी और हवाई हमलों से बचाव के लिए गत सात मई को मॉक ड्रिल की गई। मॉक ड्रिल में पुलिस-प्रशासनिक अफसरों के साथ-साथ फायर ब्रिगेड का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। भले ही जनपद के मुख्य अग्निशमन अधिकारी का अतिरिक्त जनपद हापुड़ के सीएफओ मनु शर्मा पर हो, लेकिन जनपद में फायर ब्रिगेड के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है।
जनपद में पुलिस लाइन के अलावा औद्योगिक क्षेत्र परतापुर, टाउन हाल घंटाघर, सरधना और मवाना में फायर स्टेशन हैं। घंटाघर व मवाना में एफएसओ के पद फिलहाल रिक्त चल रहे हैं, लेकिन पुलिस लाइन व परतापुर में एफएसओ की तैनाती है। इनके अलावा मवाना में फायर मैन के दो, परतापुर में 34 तथा पुलिस लाइन में एक पद रिक्त है। इसके बाद अग्निशमन दल हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है। इसका एक बड़ा कारण, संसाधनों का अभाव न होना है। फिर भी, उपलब्ध स्टाफ के हौंसले बुलंद हैं। फायर स्टाफ हर विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे तैनात है।
अग्निशमन संसाधनों की उपलब्धता
वाटर बाउजर 1200, 6500, 5500, 5000 तथा 4500 लीटर एक-एक,वाटर मिस्ट दो, बोलेरो कैम्पर एक, फायर क्विक रेस्पांस व्हीकल एक, एंबुलेंस एक, बुलेट मोटरसाइकिल विद बैक पैक एक्सटिंग्यूशर एक, इमरजेंसी फायर इंजर मोटरसाइकिल एक, एडवांस रेस्क्यू टेंडर एक। ये सभी क्रियाशील हैं।
घंटाघर फायर स्टेशन
वाटर टेंडर 2500 लीटर, एफक्यूआरवी फिटेड वाटर मिस्ट पंप 800 लीटर, इमरजेंसी फायर इंजन मोटरसाइकिल, ईसुजु वाहन, पोर्टेबल पम्प तथा फ्लोटिंग पम्प उपलब्ध हैं।
परतापुर फायर स्टेशन
फायर टेंडर दो, फोम टेंडर ए, वाटर मिस्ट एक, एंबुलेंस एक, बुलेरो एक, बुलेरो कैम्पर एक, बुलेट मोटरसाइकिल विद बैक पैक फायर एक्सटिंग्यूशर उपलब्ध हैं।
मवाना फायर स्टेशन
वाटर टेंडर 4500 लीटर, वाटर टेंडर 5000 लीटर, बुलेरो कैम्पर, पोर्टेबल पम्प 60 जीपीएम, वाटर मिस्ट तथा बुलेट मोटरसाइकिल विद बैक पैक फयर एक्सटिंग्यूशर उपलब्ध हैं।
उजड़ गए निगम के हाइडेंट, जनता के भरोसे फायर ब्रिगेड
जनवाणी संवाददाता
मेरठ: भारत पाक सीमा पर तनाव के चलते यहां भी सभी विभाग अलर्ट हैं, ऐसे हालात में फायर ब्रिगेड को आग से निपटने के लिए दिन रात अलर्ट जारी किया गया, लेकिन इन विभाग के सामने समस्या फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में पानी भरने की है। महानगर में नगर निगम के अधिकांश हाइडेंट उजड़ गए। ऐसे में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में पानी भरने का काम जनता के भरोसे है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को होटल, मेडिकल कॉलेज से पानी लेना पड़ रहा। विभाग के अधिकारियों द्वारा नगर निगम के अधिकारियों को पूर्व में कई बार पत्र भेजकर सभी ट्यूबवेलों, ओवरहैंड टैंकों और भूमिगत जलाशयों पर हाइडेंट लगाने की मांग की जा चुकी, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों इतने अहम कार्य को गंभीरता से नहीं लिया। निगम के अधिकारियों की लापरवाही की हद यहां तक है कि जिम्मेदार अधिकारी को भी यह पता नहीं कि महानगर में कितने हाइडेंट हैं।
भारत पाक के बीच युद्ध की स्थिति को देखते हुए अग्नि शमन विभाग को अहम जिम्मेदारी देते हुए अलर्ट किया गया। कहीं भी आग लगने की स्थिति में तुरंत इस विभाग की टीम को आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंचने के आदेश दिए गए। विभाग ने पूरी तैयार कर रखी है। महानगर में 19 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां हैं। सभी गाड़ियां तैयार हैं। विभाग का पूरा स्टाफ तैनात है और पूरी तरह अलर्ट है, लेकिन विभाग के सामने आग लगने वाली जगह के आसपास अग्नि शमन की गाड़ियों को पुन: पानी भरने की समस्या है। इसकी वजह है महानगर में नगर निगम की अधिकांश हाइडेंट का उजड़ जाना।
यूं तो देश के हालात को देखते हुए नगर निगम में भी अलर्ट जारी किया गया, लेकिन नगर निगम ने यह नहीं सोचा कि वर्षों से अग्नि शमन विभाग द्वारा की जा रही हाइडेंट लगवाने की मांग को ऐसे समय में पूरा कर दिया जाए। नगर निगम के अधिकारी इससे पूरी तरह आंखें मूंदे हैं। खास बात है कि हाइडेंट लगाने के लिए लाखों रुपये का खर्च नहीं होता। मात्र एक पाइप ट्यूबवेल, पानी की टंकी की सप्लाई लाइन से जोड़ना होता है।
इसे खोलने व बंद करने के लिए एक टैप की जरूरत होती है, लेकिन इसके लिए किसी अधिकारी ने नहीं सोचा। महानगर में अग्निशमन के तीन स्टेशन हैं, घंटाघर जो अब टाउन हॉल में शिफ्ट है, सिविल लाइंस और परतापुर। अग्नि शमन विभाग के अधिकारी आरके सिंह के अनुसार महानगर में नगर निगम के करीब 48 हाइडेंट थे, जो अब लगभग 10 रह गए। उनके क्षेत्र में 13 थे, जो अब मात्र तीन हैं ऐसे में आग लगने वाले स्थल के नजदीक में गाड़ी में पानी भरने के होटलों या मेडिकल कॉलेज से मदद ली जाती है।
मेरी जानकारी में नहीं कितने हाइडेंट हैं
अपर नगरायुक्त पंकज कुमार से जब यह पूछा गया कि महानगर में कितने हाइडेंट हैं, तो उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में नहीं कि कितने हाइडेंट हैं।

