Sunday, March 22, 2026
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श्मशान घाट में पांच दिन में 300 से ज्यादा जली चिताएं

  • कब्रिस्तानों की हालत भी बदतर, खुद परिजनों ने खोदी कब्र

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना के बढ़ते संक्रमण और आक्सीजन की लगातार हो रही कमी से लोगों की सांसे उखड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन भले कम मौतों का दावा करे, लेकिन श्मशान घाट और कब्रिस्तानों में स्थिति नियंत्रण के बाहर हो रही है।

बुधवार को सूरजकुंड श्मसान घाट पर 58 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ। जबकि कई कब्रिस्तानों में परिजनों को खुद कब्र खोदकर अपने चहेतों को सुपुर्दे-ए-खाक करना पड़ा।

कोरोना की दूसरी लहर ने हालात बद से बदतर कर दिये हैं। सबसे ज्यादा मौतें आक्सीजन की कमी के कारण बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग रोज दो या तीन मौतों की जानकारी देता है जबकि सूरजकुंड श्मशान घाट में 58 शवों का अंतिम संस्कार किया गया।

शवों की रोज बढ़ती संख्या को देखते हुए नगर निगम 25 नये प्लेटफार्म बनवा रहा है। यहां आने वाले शवों में मेरठ के बाहर के भी है। इसके अलावा कोरोना से मरने वालों की संख्या भी काफी होती है। नगर आयुक्त ने भी सूरजकुंड का दौरा कर प्लेटफार्म के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिये हैं।

श्मशान घाट में कार्यरत आचार्यों को भी इस बात की हैरानी की है जब वे लोग काफी संख्या में कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। ऐसे में सरकारी आंकड़े कम कैसे दिये जा रहे हैं। अगर एक सप्ताह की बात की जाए तो सूरजकुंड लगभग 500 के करीब शवों के अंतिम संस्कार हो चुके हैं।

मेडिकल कालेज या फिर अन्य नर्सिंग होमों में भर्ती मेरठ से बाहर के कोरोना संक्रमितों की मौत के बाद परिजन उनको बजाय अपने जनपदों में ले जाने के सूरजकुंड में अंतिम संस्कार कर रहे हैं। गंगा मोटर कमेटी से अंतिम संस्कार का सामान खरीदने वालों की लंबी लाइनें सुबह आठ बजे से लग रही है और यह सिलसिला टूटने का नाम नहीं ले रहा है।

कब्रिस्तानों के हालात भी बद से बदतर

कोरोना के कारण आक्सीजन का स्तर शरीर में गिरने के कारण लोगों की मौतें बहुत हो रही है। मुस्लिम इलाकों में स्थित कब्रिस्तानों में भी कमोबेश यही हालात देखने को मिल रहे हैं। आरटीओ के पास रहने वाले एक बुजुर्ग की मौत हो गई।

परिजन शव को लेकर बाले मियां कब्रिस्तान में पहुंचे और कब्र खोदने वाले संपर्क किया तो उसने यह कह कर मना कर दिया कि कई कब्रें खोदने के कारण वो बुरी तरह से थक गया है। इसके बाद परिजनों ने खुद कब्र खोदकर सुपुर्दे-ए-खाक किया। शाह विलायत कब्रिस्तान में भी कोरोना संक्रमित का शव सुपुर्दे-ए-खाक करवाने में लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ा।

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