Wednesday, February 28, 2024
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पांच ट्रिलियन का रोड मैप

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SATISH SINGH 1केंद्र सरकार ने अंतरिम बजट से पहले आर्थिक सर्वे के बदले ‘द इंडियन इकनॉमी: ए रिव्यू’ रिपोर्ट पेश किया था,जिसमें देश के आर्थिक और सामाजिक सेहत के साथ-साथ अंतरिम बजट का भी खाका खींचा गया था। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि आगामी 3 सालों में यानी 2027 में भारतीय अर्थव्यवस्था जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ते हुए 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जायेगी और 2030 तकयह 7 ट्रिलियन डॉलर की बन जायेगी। गौरतलब है कि इसी रणनीति के तहत अंतरिम बजट में प्रावधान किए गए हैं। ‘द इंडियन इकनॉमी: ए रिव्यू’ रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में लगातार चौथे साल भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक रह सकती है, जबकि अभी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का विकास दर लगभग 3 प्रतिशत के आसपास है। हालांकि,भारत में वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान महंगाई दर के 5.5 प्रतिशत रहने के आसार हैं, जो कुछ ज्यादा जरूर है, लेकिन इसे खतरनाक स्तर नहीं माना जा सकता है। सामाजिक मोर्चे पर केवाईसी की लागत 2014 के पहले लगभग 1000 रुपए थी, जो डिजिटल पब्लिक आधारभूत संरचना में हुए तेज विकास के कारण घटकर 5 रुपए रह गई है। वर्ष 2021 में 78.6 प्रतिशत महिलाओं के पास अपना बैंक खाता था, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में यह प्रतिशत महज 53 थी। देश के कुल श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 37 प्रतिशत हो गई है, जो वित्त वर्ष 2017-18 में सिर्फ 23.3 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2020-21 में उच्च शिक्षा में लड़कियों की सकल नामांकन अनुपात बढ़कर 27.9 प्रतिशत हो गई है, जो 2000-01 में केवल 6.7 प्रतिशत थी। इसतरह, 20 सालों में उच्च शिक्षा में लड़कियों के सकल अनुपात में 4 गुणा की बढ़ोतरी हुई है। सेकेंडरी शिक्षा में लड़कियों का नामांकन अनुपात वित्त वर्ष 2020-21 में बढ़कर 58.2 प्रतिशत हो गया है, जो वित्त वर्ष 2004-05 में सिर्फ 24.5 प्रतिशत था।

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 1 फरवरी 2024 को केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मलाने अंतरिम बजट पेश किया, जिसे युवा भारत के युवा आकांक्षाओं का प्रतिबिंब कहा गया है और इसमें भारत के 4 स्तंभों गरीब, युवा, महिला और किसान को सशक्त बनाने वाले उपायों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके साथ,समावेशी विकास को सुनिश्चित करने, सरकारी सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और मौजूदा क्षमताओं का समुचित दोहन किया जा सके से संबंधित प्रावधान भी इस अंतरिम बजट में किये गए हैं। आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने के लिए रेलवे, सड़क,सौर ऊर्जा आदि क्षेत्रों को सशक्त बनाने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि विगत 5 सालों में इस क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बजटीय प्रावधानों में 2.5 गुणा से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है।

इसके तहत रेलवे के 40 हजार बोगियों को उन्नत करके वंदे भारत से जोड़ा जाएगा। सड़क मार्ग को सशक और भरोसेमंद बनाने के लिए पीएम गति शक्ति योजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है, ताकि देशभर में सड़कों का जाल जल्द से जल्द बिछ सके और लोग कम अवधि में अपनी मंजिल तक पहुंच सकें। अंतरिम बजट की घोषणाओं के अनुसार ऊर्जा एवं सीमेंट कॉरीडोर, पोर्ट कनेक्टिविटी कॉरीडोर, हार्ड डेंसिटी कॉरीडोर आदि को यथाशीघ्र विकसित किया जायेगा। इन कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए पूंजीगत व्यय में 11.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, जिससे यह बढ़कर 11.1 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसके पहले यानी वित्त वर्ष 2024 में यह राशि 10 लाख करोड़ रुपए थी। अंतरिम बजट में 44.90 लाख करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है, जबकि पिछले साल इस मद में 45 लाख करोड़ रुपए खर्च किए
गए थे।

चालू वित्त वर्ष में 1.4 करोड़ युवाओं के कौशल को विकसित किया गया है। 7 नए आईआईटी और 7 नए आईआईएम,3 हजार आईटीआई, 390 विश्वविधालय आदि भी खोले गए हैं। कोरोना महामारी से सबक लेते हुए अस्तपतालों का भी मुसलसल निर्माण किया जा रहा है। बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि विगत 10 सालों में 30 करोड़ मुद्रा योजना ऋण महिला उधमियों को दिये गए हैं। 11.8 करोड़ किसानों को पीएम सम्मान निधि योजना का लाभ मिला है और 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकलने में सफल रहे हैं। यह सब संभव हो सका है लोगों की पहुँच बैंक तक होने की वजह से। आज प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और प्रधानमंत्री जनधन योजना से लोग आत्मनिर्भर बन रहे हैं और पीएम सम्मान निधि की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की मदद से सेकेंडों में लाभार्थियों के खातों में क्रेडिट करना संभव हो
रहा है।

अनुसंधान और नवोन्मेष को विकसित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का कोष बनाया जाएगा, ताकि तकनीक और बैंक की मदद से गरीब, युवा, किसान और महिला आत्मनिर्भर बन सकें। स्टार्ट अप को दिये जाने वाले कर छूट का विस्तार किया जाएगा, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) एमएसएमई क्षेत्र को फायदा होना निश्चित है। देश में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं, जिनमें 12 करोड़ से अधिक लोग काम करते हैं और इस क्षेत्र का देश की जीडीपी में लगभग 35 प्रतिशत का योगदान है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अगले 5 सालों में ग्रामीण इलाकों में 2 करोड़ घर और बनाए जाएंगे। झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के लिए भी सरकार आवास योजना लाएगी, ताकि सभी गरीबों को पक्का मकान मिल सके। सरकार ने 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का भी लक्ष्य रखा है, ताकि महिला आत्मनिर्भर बन सकें। दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए डेयरी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए काम किया जाएगा और हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए जैव-विनिर्माण और बायो-फाउंडरी जैसी नई योजनाओं को शुरू किया जाएगा।
देश में मत्स्य उत्पादन दोगुना हो गया है।

फिर भी, सरकार मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है, क्योंकि इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की अकूत संभावनाएं हैं। किसानों की आय बढ़ाने वाले उपायों पर भी सरकार काम कर रही है। इसके लिए अनुसंधान पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि तकनीक की मदद से कृषि उत्पादन में वृद्धि की जाए। कहा जा सकता है कि भारत के 4 स्तंभों गरीब, युवा, महिला और किसान को सशक्त बनाने वाले उपायों और समावेशी विकास को सुनिश्चित करने वाले प्रावधानों की मदद से हमारा देश 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में समर्थ हो जाएगा और 2047 में एक विकसित देश भी बन सकेगा।


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