Wednesday, March 18, 2026
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जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में हो रहा उतार-चढ़ाव

  • भीषण गर्मी जल चक्र को कर रहा प्रभावित

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: इस वर्ष देखा गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कहीं पर बाढ़ की स्थिति तो कहीं पर सूखे की स्थिति दिखाई दे रही है। वातावरण में नमी बढ़ी है और वर्षा का चक्र भी प्रभावित हुआ है। जब वर्षा होनी चाहिए, उस समय कम ही वर्षा नहीं होनी चाहिए। इस समय वर्षा अधिक हो रही है। इसका सीधा संपर्क जलवायु परिवर्तन के कारण मौसमी घटनाओं में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। चरम जलवायु घटनाओं की सीमाओं की आवृत्ति तीव्रता और अप्रत्याशिता भी हाल के दशकों में चार गुना बढ़ गई है। पिछले पांच दशकों का यदि विश्लेषण किया जाए तो देखा गया है कि 1973 से 2023 तक की 50 वर्षीय अवधि में चरम जलवायु घटनाओं में काफी उतार चढ़ा हुआ है।

वैज्ञानिकों ने देखा है कि अधिक बारिश होने के बावजूद तापमान में अधिक गिरावट नहीं हो पा रही है। इस समय विनाशकारी जलवायु चरम सीमाओं की वर्तमान प्रवृत्ति जिसके कारण 10 में से 9 भारतीय चरम जलवायु घटनाओं के संपर्क में है। पिछली शताब्दी में 0.6 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि का परिणाम है। बिहार, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा,आंध्र प्रदेश, गुजरात, असम के काम से कम 60% जिले एक से अधिक चरम जलवायु वाले हैं।

आईपी ग्लोबल और ईसरी इंडिया के ताजा विश्लेषण के अनुसार पिछले दो दशकों में गुजरात के 80% से अधिक जिलों में भीषण बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि देखी गई है। शायद यही वजह है कि इस साल भी सौराष्ट्र विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा है। बाढ़ से सुख की स्थिति में पहुंचे जिलों की संख्या 149 उन जिलों की संख्या 110 से अधिक है। जो सूखे से बाढ़ की स्थिति में पहुंचे हैं। दक्षिण भारत में कर्नाटक आंध्र प्रदेश तमिलनाडु जैसे राज्यों में सूखे की स्थिति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है। पश्चिमी एवं मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी यही स्थिति बनी हुई है।

जलवायु परिवर्तन के कारण कार्बन डाइआॅक्साइड मेथेन और अन्य गैसों में वृद्धि हो रही है। जो गर्मी को रोकते हैं और ग्रह को गर्म करती है। यह गर्मी जल चक्र को प्रभावित करती है। मौसम के पैटर्न को बदलती हैं और भूमि की बर्फ को पिघलती है। यह सभी चीज चरम मौसम को और उग्र कर रही है। अचानक हो रहे जलवायु परिवर्तन में उतार-चढ़ाव के कारण सभी लोगों को सतर्क रहना होगा और वातावरण को नुकसान पहुंचाने वाले सभी कारकों को कम करना होगा।

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