Thursday, March 19, 2026
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पीढ़ियों के आर्थिक विकास के लिए

प्रगति के सोपान चढ़ते हुए उन्होंने जब अपनी उन्नति के उपादानों से परिचित करवाया, तो अपन चकित थे। वे मंद-मंद मुस्काते हुए अपनी उपलब्धियां गिना रहे थे। उनके चेहरे का नूर देखते ही बनता था। ऐसा लग रहा था कि वे इससे पहले कभी इतना खुश हुए ही नहीं। मुस्कुराते हुए हमसे पूछ ही लिया, कहिए कैसा महसूस कर रहे हैं?

हम भला क्या कहते। अचानक मुंह से निकल पड़ा, ‘अद्भुत, अनुपम और अद्वितीय है आपका विकास।’ वे बोले, ‘धन्यवाद। हम वैसे तो कुछ करते नहीं हैं, मगर जब करते हैं तो ऐसे ही करते हैं।’ हमारे मुंह से फिर निकल पड़ा, ‘दोनों में समानता है।’ वे अचकचाकर बोले, ‘क्या मतलब?’ इस बार अपना मुंह संभला, ‘मतलब यही कि आपकी सोच में विकास ऐसा है, जैसे विकास के भग्नावशेष।’ इस गूढ़ार्थ को वे समझ नहीं सके। बोले, ‘ये कुछ उलझन वाली बात कह दी आपने। हमारे समझ में नहीं आ रही है।’ अपने मुंह को इस बार दबा कर बोलना पड़ा, ‘समझ से वैसे भी नाता कहां है आपका? खैर छोड़िए। आप तो इस राज का खुलासा कीजिए कि आपने शहर की जिन सड़कों को बरसों बाद ‘सड़क’ होने का गौरव प्रदान किया था, उन्हें फिर से उखड़वा क्यों रहे हैं?’

इस जिज्ञासा पर वे खिलखिला कर हंसने लगे। कह पड़े, ‘आप समझे नहीं। हम सड़क उखड़वा नहीं रहे हैं। धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।’ भोलेपन से अपना मुंह खुला, ‘किसके धैर्य की परीक्षा?’ वे बोले, ‘नागरिकों के धैर्य की परीक्षा। दरअसल इतने बरसों बाद बनी सड़क पर रहने के लोग आदी तो नहीं हो गए हैं, यही पता करना है।’ अपना मुंह फिर ऐसे खुला, ‘इस मामले में आप निश्चिंत रहें। यहां के लोग इतने सहनशील हैं कि तब तक कुछ नहीं बोलते हैं जब तक इनके घर से कोई र्इंट निकालने की कोशिश न करे। सड़क, नाली, बिजली, पानी पर तो इनका खून कभी खौलता ही नहीं। लेकिन बनी बनाई सड़क को उखाड़ने से आपको मिलेगा क्या?’ वे इससे तनिक भी विचलित नहीं हुए। बोले, ‘आप सचमुच भोले हैं। इस उखाड़ पछाड़ में ही तो हमारी पीढ़ियों की संभावनाएं हैं। हम एक बार में ही सबकुछ ठीक बनवा देंगे तो हमारा तो भविष्य ही अंधकारमय हो जाएगा।’

उलझन में इस बार हम थे। पूछने लगे, ‘आपकी बात सुनकर तो हमारे आगे अंधेरा छाने लगा। तनिक विस्तार से बताइए।’ वे कहने लगे, ‘वो क्या है कि हम पहले सड़क बनाते हैं फिर पानी की पाइप लाइन बिछाते हैं। फिर सड़क बनवाते हैं और सीवरेज लाइन बिछाते हैं। फिर सड़क बनाते हैं और गैस लाइन बिछाई जाती है। इतना होते-होते पानी की पाइप लाइन फूट जाती है। उसके लिए फिर सड़क खोदते हैं, फिर बनवाते हैं। एक ही सड़क को इतनी बार बनवाने से हमारे आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आर्थिक सड़क बन जाती है।’ खुल्ला पड़ा अपना मुंह बोला,‘ कमाल की प्लानिंग है आपकी।’ वे समझाते हुए कहने लगे, ‘आप तो अब कभी भी शहर की खुदती सड़क देखें तो चिंतित न हों। हमारी आने वाली पीढ़ियों के आर्थिक विकास के लिए दुआएं करें।’

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