- दूसरे अनुभागों में भी फर्जी नियुक्ति के मामले
- शासन से मांगी गई जांच, नतीजा फिर भी सिफर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम में फर्जीवाड़ों की लंबी कतारें हैं। हर अनुभाग में जिसका जैसा मौका लग रहा है, वह वैसा ही बड़ा घोटाला करने में मशगूल है। पहले भी ऐसे ही एक नौकरी के फर्जीवाड़े में शासन स्तर पर जांच के आदेश हुए। मेरठ नगर निगम में रहे पूर्व नगर आयुक्त ने जांच कराई। लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। जनता की सेवा के लिए बनाये गये नगर निगम में इन दिनों सिर्फ अव्यवस्था का ही आलम है। यहां जनता की सेवा के लिए कई अनुभाग बनाये गये हैं।
इनमें निर्माण विभाग, जलकल अनुभाग, हाउस टैक्स अनुभाग, लेखा अनुभाग, स्वास्थ्य अनुभाग, मार्ग प्रकाश अनुभाग, जन्म-मृत्यु अनुभाग आदि मुख्य हैं। हर अनुभाग में मठाधीशों की भारी भरकम फौज है। हर अनुभाग में जिसका जहां दाव चढ़ रहा है। वह वहीं घोटाला करने में मशगूल है। सबसे बड़ी बात यह है कि कोई अगर घोटाले को पकड़ लेता है और इसकी शिकायत लेकर आला स्तर तक उसकी शिकायत लेकर जाता है तो वह शिकायत भी दबा दी जाती है।
ताजा मामला नगर निगम में फर्जी बेगम को फर्जीवाड़ा करके नौकरी दिलाने का सामने आया है। स्वास्थ्य अनुभाग में नगर निगम में फर्जी बेगम की बात सामने आई है। जिसमें अपनी पूरी सेटिंग से न सिर्फ अपने फर्जी मरहूम शौहर की इकलौती वारिस बन गर्इं। साथ ही अपने को असली वारिस दर्शाते हुए नौकरी भी हासिल कर ली। मजेदार बात तो यह है कि अपने मरहूम बेटे के सदमे से जब तक उबरकर घर वाले इस पूरी साजिश का पर्दाफाश कर पाते।

उससे पहले ही इस फर्जी बेगम ने फर्जी कागजातों के आधार पर फंड भी निकलवा लिया और ठाठ से परमानेंट पोस्ट की नौकरी भी हथिया ली। आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि जब इतना बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा हो, तो बिना मिलीभगत के कुछ भी हो पाना संभव नहीं है। अब असली वारिस तो दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। और फर्जी बेगम ठाठ से नौकरी कर रही है। नगर निगम में स्थाई सफाई कर्मचारी के पद पर मुजफ्फरनगर निवासी शंकर का पुत्र रघुवीर लगा था। वह नियमित कर्मचारी था।
उसकी ड्यूटी नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग के दिल्ली रोड वाहन डिपो के अन्तर्गत आने वाले माधवपुरम क्षेत्र में लगाई गई थी। पन्द्रह साल की अनवरत सेवा करते हुए रघुवीर बीमार हुआ तो वह कई बार ड्यूटी भी नहीं पहुंच पाता था। एक बार वह अपनी ड्यूटी मुख्यालय जोन में करवाने के लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी से मिला तो यहां उसकी बीमारी देखकर यहां के बाबुओं ने खेल की रूपरेखा बना ली तथा इसको अंजाम पर भी पहुंचाकर फर्जी बेगम की ज्वाइनिंग भी करा दी।
पहले भी पकड़े जा चुके हैं फर्जी मामले
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी विजय कुमार पर फर्जी दस्तावेज के जरिए नौकरी लेने के आरोप लगे हैं। शासन ने मामले की जांच सीडीओ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति को दी थी। सीडीओ ने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर विजय की नियुक्ति से संबंधित कई जानकारियां मांगी हैं। विजय कुमार की कूट रचित दस्तावेज से हासिल करने की शिकायत प्रमुख सचिव गृह से की गई थी।
शिकायत पर वर्ष2018 में पूर्व नगरायुक्त उमेश प्रताप सिंह ने विजय को बर्खास्त कर दिया। इसके बाद उमेश प्रताप का नगर निगम से अन्यत्र तबादला हो गया तो विजय कुमार ने साठगांठ करके फिर से नौकरी बहाल करा ली। शासन ने सीडीओ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का फैसला हो सकता है। लेकिन यह जांच रिपोर्ट भी दबा दी गई है।

